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अव्यवस्था का खंडहर:लावारिस की तरह संक्रमित शवों को फूंक रहा प्रशासन, जहां लाशें जल रहीं वहीं 2 करोड़ का शवदाह गृह कबाड़

रांची13 दिन पहले
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  • पिछले वर्ष सितंबर-अक्टूबर में 15 दिनों में 100 मौतें हो रही थीं तब भी घाघरा शवदाहगृह-श्मशान को व्यवस्थित नहीं किया
  • शवदाहगृह में लगी दो मशीनों के कलपुर्जे चोरी, भवन के दरवाजे-खिड़की भी ले गए

कोरोना से संक्रमित शवों का अंतिम संस्कार लावारिस मुर्दे की तरह फूंका जा रहा है। रांची जिला प्रशासन और नगर निगम के अफसरों की नाकामी का नतीजा है कि घाघरा श्मशान घाट पर कोरोना संक्रमित शव का अंतिम संस्कार परिजनों के सामने ही सामूहिक रूप से किया जा रहा है। हालात ऐसे हैं कि परिजनों को अपने प्रियजन की अस्थियां भी नहीं मिल रही है, ताकि वे गंगा में प्रवाहित कर सकें। यह हालात अचानक उत्पन्न नहीं हुए हैं। क्योंकि पिछले वर्ष कोरोना की पहली लहर में हुई मौत ने इसके संकेत दे दिए थे।

सितंबर और अक्टूबर माह में 15-15 दिनों में 100-100 कोरोना संक्रमित का शव हरमू मोक्ष धाम में जलाया गया था। इसके बावजूद प्रशासन और निगम के अधिकारियों ने कोरोना संक्रमित के शव को सम्मानजनक तरीके से अंतिम संस्कार करने की कोई भी व्यवस्था नहीं की। जबकि घाघरा में जिस स्थान पर एक ही चिता पर सामूहिक रूप से 10 से 15 शवों का अंतिम संस्कार किया जा रहा है, उसके ठीक पीछे 2 करोड़ रुपए की लागत से बना विद्युत शवदाह गृह हमारे सिस्टम को मुंह चिढ़ा रहा है। यह शवदाहगृह अब बस नाम का ही है। यहां शव जलाने के लिए लगाए गए दो मशीन का अब सिर्फ बाहरी ढांचा रह गया है। अंदर के सारे कलपुर्जे चोरी हो गए हैं। शवदाहगृह के खिड़की-दरवाजे तक गायब हो गए, लेकिन अफसरों ने कभी भी इसे दुरूस्त कराने की जहमत नहीं उठाई। इसी वजह से आज सामूहिक शव जलाना पड़ रहा है।

प्रशासनिक अफसरों ने बंद रखी आंखें जनप्रतिनिधि भी आगे नहीं आए

कोरोना की पहली लहर मार्च में आई थी। इसके बाद मारवाड़ी सहायक समिति ने 11 वर्षों से कंडम पड़े हरमू विद्युत शवदाहगृह के संचालन का जिम्मा लिया। 31 दिसंबर 2020 तक मोक्ष धाम में करीब 600 शव का अंतिम संस्कार हुआ। इसके बावजूद निगम के अफसरों ने घाघरा शवदाहगृह को दुरूस्त कराने या किसी दूसरे श्मशान घाट-कब्रिस्तान को व्यवस्थित करने की जहमत नहीं उठाई। आज लावारिस की तरह कोरोना संक्रमित शव जलाया जा रहा।

जिस तरह जीने का अधिकार उसी तरह सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार का अधिकार

हाईकोर्ट के अधिवक्ता राजेश कुमार ने बताया कि मृतकों को संविधान के अनुच्छेद 21 और 25 के तहत धर्म के अनुसार सम्मानपूर्वक तरीके से शव का अंतिम संस्कार करने का अधिकार दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने भी करीब 25 साल पहले पंडित परमानंद बनाम भारत सरकार के केस में फैसला सुनाते हुए कहा था कि हर व्यक्ति का अधिकार है कि मृत्यु के बाद उसके शव का धार्मिक रीति-रिवाज के मुताबिक क्रियाकर्म किया जाए।

डोरंडा के घाघरा विद्युत शवदाहगृह में लगेगी नई मशीन- डिप्टी मेय

डिप्टी मेयर संजीव विजयवर्गीय ने कहा कि घाघरा विद्युत शवदाहगृह को दुरूस्त करके चालू करने सहित अन्य श्मशान-कब्रिस्तान को व्यवस्थित करने पर पिछली स्टैंडिंग कमेटी की बैठक में निर्णय हुआ है। घाघरा विद्युत शवदाहगृह का संचालन करने के लिए नई मशीन लगेगी। दूसरे श्मशान घाट पर सुविधाएं बढ़ेंगी।

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