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तस्वीर बदलने में जुटे ग्रामीण:गांव के बच्चे शिक्षित हाें, मुख्यधारा से न भटकें इसलिए चंदा कर बच्चाें काे पढ़ा रहे हैं

रांची2 महीने पहले
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भवन नहीं है, ओपेन स्कूल में पढ़ाई।
  • कुख्यात नक्सली कुंदन पाहन का गांव... आज भी नहीं पहुंचीं सरकारी सुविधाएं

गांव के बच्चे शिक्षित हाें। वे मुख्यधारा से नहीं भटकें। भविष्य में गांव का काेई बच्चा और युवा नक्सली संगठन से न जुड़े। बारीगड़ा गांव के ग्रामीण इसी उद्देश्य काे लेकर योजनाबद्ध तरीके से काम कर रहे हैं, मगर इन बाताें काे बाेलने से बचते हैं। प्रत्येक माह गांव के ग्रामीण खुद से 50-50 रुपए एकत्र करते हैं। उस पैसे का भुगतान गांव के ही शिक्षक राजकु़मार लकड़ा काे करते हैं। उसने पिछले साल खुद मैट्रिक की परीक्षा पास की है।

अभी गांव के 30 बच्चाें काे पढ़ाता है। ग्राम सभा की बैठक में ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से शिक्षक का चयन किया है। बारीगढ़ा गांव। जहां आज भी सरकारी तंत्र नहीं पहुंचा है। गांव तक पहुंच पथ नहीं है। बिजली-पानी के लिए ग्रामीणों काे संघर्ष करना पड़ रहा है। सिर्फ इसलिए क्याेंकि कुख्यात नक्सली कुंदन पाहन, इसी बारीगढ़ा गांव का था। कुंदन के सरेंडर करने के बाद भी सरकारी तंत्र गांव तक नहीं पहुंच पाया है। अब ग्रामीण खुद गांव की तस्वीर बदलने में जुटे हुए हैं।

3 महिला समितियां... जहां 15 रु. सप्ताह जमा करते हैं ग्रामीण

गांव में तीन महिला समितियां सक्रिय हैं। ये महिलाएं गांव में नियमित बैठक करती हैं। जरूरत के अनुसार ग्रामीणों काे कर्ज भी देती हैं। ग्रामीण महिला समितियाें में प्रत्येक सप्ताह 15 रुपए जमा करते हैं। उस राशि का उपयाेग समिति की महिलाओं द्वारा गांव में स्वरोजगार आदि पर खर्च किया जाता है। इतना ही नहीं, महिलाएं बच्चाें की पढ़ाई, चिकित्सा आदि के लिए भी रकम अलग से खर्च करती हैं।

स्कूल दूसरे गांव में मर्ज कर दिया

रांची से करीब 75 किमी. दूर अड़की ब्लॉक में पहाड़ाें के बीच जंगल से घिरा है गांव बारीगढ़ा। यहां एक उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय था, जिसे बंद कर दूसरे स्कूल में मर्ज कर दिया गया। इस वजह से कई बच्चाें ने पढ़ाई छाेड़ दी। तब ग्रामीणों ने निर्णय लिया कि बच्चाें की पढ़ाई किसी हाल में नहीं रुकने दी जाएगी।

बदलाव का प्रयास कर रहे ग्रामीण

गांव के सुंदर सिंह मुंडा कहते हैं, कुंदन पाहन के नक्सली बनने के बाद गांव की छवि खराब हाे गई है। जिससे गांव सरकारी याेजनाओं से आज भी वंचित है। इस छवि काे बदलने की काेशिश है। बच्चे और युवा मुख्यधारा से भटके नहीं, इसलिए उन्हें बेहतर शिक्षा देने का निर्णय लिया गया है।

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