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मेयर-नगर आयुक्त के बीच टकराव:मेयर और नगर आयुक्त के झगड़े में पांच माह में शहर अस्त-व्यस्त

रांची2 महीने पहले
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ऑनलाइन बैठक में बात रखतीं मेयर आशा लकड़ा। - Dainik Bhaskar
ऑनलाइन बैठक में बात रखतीं मेयर आशा लकड़ा।
  • नगर आयुक्त गलत करेंगे तो हर हाल में रोकेंगे : मेयर
  • जनता के सभी काम हो रहे, कोई विवाद नहीं : एमसी

नगर निगम की वर्चुअल बैठक गुरुवार को हुई। इसमें भी मेयर-नगर आयुक्त के बीच टकराव हुआ। मेयर ने दो एंबुलेंस, दो शव वाहन सहित एक हजार ऑक्सीजन सिलेंडर खरीदने का निर्देश दिया। इस पर नगर आयुक्त ने कहा कि ऑक्सीजन सिलेंडर रखने की जगह निगम के पास नहीं है। मेयर ने बैठक के तुरंत बाद नगर आयुक्त को पत्र भेजकर खरीदारी करने का निर्देश देते हुए कहा कि जगह उपलब्ध करा दिया जाएगा। पार्षदों ने शहर की दुर्दशा बताते हुए सफाई का ठेका लेने वाली सीडीसी और जोनटा कंपनी को हटाने की गुहार लगाई।

मेयर ने जलजमाव दूर करने के लिए अतिरिक्त कर्मचारियों को लगाने का निर्देश दिया। इधर, नगर आयुक्त, मुकेश कुमार ने कहा कि रांची को साफ-स्वच्छ बनाना मेरा पहला काम है। सफाई कंपनी को काम में सुधार करने का निर्देश दिया है। निगम की टीम स्वयं इसमें लगी है। पार्षद जो भी समस्या लेकर आते हैं, उसके समाधान का प्रयास होता है। उपलब्ध फंड से सड़क-नाली बनाने के लिए टेंडर भी हो रहा। नियम संगत हर काम हो रहे। किसी से कोई विवाद नहीं।

जनता के टैक्स का पैसा बर्बाद नहीं होने देंगे

मेयर-नगर आयुक्त के पास अलग-अलग अधिकार हैं, जो नगर पालिका अधिनियम से मिला है। नगर आयुक्त से कोई विवाद नहीं है, लेकिन वे गलत करेंगे तो हर हाल में रोकेंगे। जनता के टैक्स का पैसा बर्बाद नहीं होने देंगे। 15वें वित्त आयोग के फंड से गली- मुहल्लों में पेवर्स ब्लॉक लगना है, लेकिन नगर आयुक्त एनएच और पथ निर्माण की सड़क पर खर्च करने में लगे थे। इसलिए दिल्ली में केन्द्रीय मंत्री से शिकायत की गई है।

  • नागरिक सुविधा मद में नगर निगम को इस वर्ष एक रुपया नहीं मिला। गढ़ा टोली में जिस पुल से बाइक सवार की मौत हुई थी, वह नहीं बना।
  • जनवरी में निगम परिषद की बैठक में 60 पानी टैंकर खरीदने का निर्णय हुआ था। पूरी गर्मी बीत गई एक भी टैंकर नहीं खरीदा।
  • पार्षदों की मांग पर 60 मैनुअल व 7 बड़ी कोल्ड माउंटेड फॉगिंग मशीन खरीदनी थी, टेंडर भी निकाला, लेकिन खरीदारी नहीं हो सकी।
  • नगर निगम परिषद की वर्चुअल बैठक में पार्षदों ने सुनाया दुखड़ा, सफाई व्यवस्था पर उठाए सवाल

नगर निगम का मूल काम साफ सफाई भी ढंग से नहीं हो रहा

शहर की सरकार के बीच चल रहे विवाद ने पूरे राजधानी को अस्त-व्यस्त कर दिया है। बड़ी योजनाओं को धरातल पर उतारना तो दूर नगर निगम का मूल काम साफ-सफाई भी ढंग से नहीं हो रहा। दैनिक भास्कर ने 15 पार्षदों से इस मुद्दे पर बात की, तो बताया कि निगम में छिड़े विवाद से शहर का विकास ठप पड़ गया।

50% घरों से भी कूड़ा नहीं उठ रहा, कंपनी कैसे काम कर रही

पार्षदों ने कहा कि पिछले दिसंबर सीडीसी कंपनी को आउटसोर्सिंग पर सभी 53 वार्ड में सफाई का ठेका दिया गया, लेकिन 50% घरों से भी कूड़ा का उठाव नहीं हो रहा। झिरी डंपिंग यार्ड तक कूड़ा पहुंचाने के लिए जोनटा कंपनी को ठेका दिया गया। कंपनी को 75 स्थान पर 233 डस्टबिन लगना है, लेकिन कहां और कब लगेगा।

पार्षदों की पीड़ा...

आम लोग पार्षदों के पास समस्या लेकर आते हैं। निगम बोर्ड की बैठक में ही पार्षद अपनी बात रखते हैं। पांच माह से बैठक नहीं हुई तो कोई समस्या सुनने वाला नहीं।
- अरुण झा, पार्षद,वार्ड-26

नगर निगम अब लड़ाई का मैदान बन गया है। नगर आयुक्त को समस्या बताई तो सड़क-बड़ा नाला बनाने का भरोसा दिया। पहले की तरह काम नहीं हो रहा।
ओमप्रकाश, पार्षद, वार्ड 27

ऊपर के लोग अपने फायदे के लिए सारा हथकंडा अपना रहे हैं, पर इसमें जनता पिस रही है। पहले के निर्णय पर अभी तक काम नहीं हुआ, लोगों को पार्षद क्या जवाब दें।
नाजिमा रजा, पार्षद, वार्ड 16

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