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  • The Government Should Gear Up To Give New Jobs! Because ... 72% Of The Workers Returned To Jharkhand No Longer Want To Go Back To Other States

भास्कर का श्रमिक सर्वे:नए रोजगार देने के लिए अपनी कमर कस लीजिए सरकार! क्योंकि...झारखंड लौटे 72% मजदूर अब दूसरे राज्यों को वापस नहीं जाना चाहते

रांचीएक महीने पहले
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  • झारखंड लौटे हर मजदूर का एक ही सवाल... सरकार बताए घर से दूर गए बिना आखिर कैसे चलाएं अपना घर
  • 27.81% बोले... अब कोई नौकरी मिले या न मिले, घर छोड़कर नहीं जाएंगे
  • 44.18% बोले... फिर भुखमरी हो तो ही छोड़ेंगे घर, कम पर भी यहीं गुजारा करेंगे

कोरोना संकट के दौरान लॉकडाउन के शुरुआती दौर में जब देश के सभी महानगरों से मजदूरों की घर वापसी शुरू ही हुई थी, तब झारखंड सरकार ने आश्वासन दिया था कि राज्य में लौटने वाले सभी श्रमिकों को यहीं रोजगार दिया जाएगा। अब ऐसा लगता है कि राज्य सरकार को अपना यह वादा पूरा करने के लिए भरपूर मौका मिलने वाला है।

अब तक झारखंड में 5.47 लाख से ज्यादा श्रमिकों की वापसी हो चुकी है। खुद सरकार मान रही है कि अब एकमुश्त मजदूरों के लौटने की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। दैनिक भास्कर ने सभी 24 जिलों में घर लौटे श्रमिकों पर एक सर्वे किया। सर्वे में 5000 से ज्यादा मजदूरों ने भाग लिया। नौकरी के लिए फिर दूसरे राज्य जाने के सवाल पर 71.99% मजदूरों ने कहा कि वह घर से दूर नहीं जाना चाहते।

इनमें से 27.81% ने तो कहा कि चाहे राज्य में नौकरी मिले या न मिले, वह घर छोड़कर नहीं जाएंगे। जबकि 44.18% ने कहा कि अगर भुखमरी की स्थिति बने तो ही राज्य छोड़ेंगे, वरना कुछ कम में भी यहीं गुजारा करेंगे। इनके अलावा 14.81% मजदूर ही ऐसे हैं जो तुरंत वापस जाने को तैयार हैं। 13.20% का कहना है कि वे कुछ समय बाद ही घर छोड़ेंगे।

5 लाख से ज्यादा को रोजगार देने की सरकारी तैयारी की यह तस्वीर...हर मजदूर को पूरे 100 दिन रोजगार मिले तो सालाना सिर्फ 19400 रु. ही मिलेंगे

दूसरे राज्यों से लौटे श्रमिकों को झारखंड में ही रोजगार मुहैया कराने के लिए राज्य सरकार यूं तो अलग-अलग कार्ययोजनाएं बना रही है, मगर सबसे ज्यादा जोर मनरेगा पर है। सरकार का कहना है कि मनरेगा के तहत ज्यादा से ज्यादा कार्यदिवसों का सृजन कर इन मजदूरों को रोजगार दिया जाएगा। अब तक 7 लाख से ज्यादा मजदूर मनरेगा से जुड़ भी चुके हैं, मगर इनमें से 98% से ज्यादा राज्य में ही रह रहे श्रमिक हैं। प्रवासी मजदूरों का जुड़ना अभी शुरू ही हुआ है। वर्तमान में 1.65 लाख से ज्यादा परियोजनाएं मनरेगा में चल रही हैं, इनके जरिये करीब 50 करोड़ मानव कार्यदिवसों के सृजन की योजना है।

मगर मनरेगा के तहत एक परिवार को साल में 100 दिन का ही रोजगार मिलता है। अब तक कुल 547631 श्रमिक दूसरे राज्यों से लौटे हैं। हर मजदूर को एक परिवार की इकाई माना जा सकता है। यदि हम यह भी मान लें कि सभी प्रवासी श्रमिकों को पूरे 100-100 दिन का रोजगार मिल भी जाएगा तो 194 रु. प्रति कार्यदिवस की दर से उन्हें सालाना 19400 रुपए ही मिलेंगे। भास्कर के सर्वे के मुताबिक लौटे श्रमिकों में 96% की सालाना आय 60 हजार से ज्यादा है।

सरकार मनरेगा के सहारे, मगर... लौटे श्रमिकों में 96% की सालाना आय 60 हजार रुपए से अधिक थी

547631 श्रमिक अब तक झारखंड लौटे हैं

65% का ही इनमें निबंधन हुआ

सरकार की स्किल मैपिंग अधूरी

निबंधित श्रमिकों की स्किल मैपिंग होनी है, कई जिलों में शुरू भी नहीं हुई है। भास्कर सर्वे के मुताबिक

69.95% श्रमिक हैं अनस्किल्ड

30.05% श्रमिक ही हैं स्किल्ड

भास्कर निष्कर्ष : दूसरे राज्यों में ज्यादातर श्रमिक अपने परिवार से दूर थे। काम बंद होने के बाद नियोक्ता ने कोई पैसे नहीं दिए, किराये के लिए दबाव था...खाने का भी इंतजाम नहीं था। ऐसे में बाहर न जाने की इच्छा रखना स्वाभाविक है।

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