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छापेमार कार्रवाई:आदिवासियों काे बरगलाकर माफिया ने किराए पर ली उनकी जमीन, बना रहे अवैध शराब; हर माह 10 करोड़ का कारोबार

रांची24 दिन पहले
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हेथू का इलाका... यहां अनाज के साथ शराब की भी खेती।
  • एयरपोर्ट से डोरंडा तक घाघरा नदी के किनारे 50 माफिया की 100 अवैध शराब की भटि्ठयां
  • नतीजा... पुलिस छापेमारी करती है तो भाग जाते हैं माफिया और फंस जाते हैं आदिवासी जमीन मालिक

डीजीपी के आदेश के अनुसार एक नवंबर से अवैध शराब के खिलाफ अभियान चलना है। इससे पहले ही भास्कर ने चार घंटे तक अवैध शराब का धंधा कैसे और कहां चल रहा है। पड़ताल में कई चौंकाने वाली बातें सामने आईं। छह थाना क्षेत्र एयरपोर्ट, डोरंडा, नामकुम, कांके, पिठौरिया व रातू में बड़े पैमाने पर अवैध शराब बनाने का धंधा चल रहा है।

पड़ताल में पता चला कि चंद रुपयों का लालच देकर माफिया गरीब आदिवासियों की जमीन लेकर वहां शराब बना रहे हैं। इसके पीछे कारण है कि जब पुलिस छापेमारी करती है तो माफिया भाग जाते हैं और जमीन मालिक आदिवासी इसमें फंस जाते हैं। सिर्फ एयरपोर्ट थाना क्षेत्र के हेथू से डोरंडा इलाकों में हर सप्ताह 10 हजार लीटर से अधिक अवैध शराब तैयार किए जा रहे हैं। नामकुम, डाेरंडा,एयरपोर्ट, कांके, पिठौरिया व रातू में हर महीने 10 करोड़ का धंधा हो रहा है।

हमारी सूचना पर एयरपोर्ट थाना पुलिस ने छापा मारा, भट्‌ठी तोड़ी

नदी किनारे की जमीन के नीचे रखे टंकियों में छिपाया जाता है जावा महुआ
नदी किनारे की जमीन के नीचे रखे टंकियों में छिपाया जाता है जावा महुआ

भास्कर की सूचना पर एयरपोर्ट थाना की पुलिस ने अवैध शराब के अड्डों पर छापेमारी की। इस दौरान 15 शराब बनाने के अड्डे मिले। जहां जमीन के नीचे पानी की टंकियों में दबा कर शराब बनाने के लिए रखे 20 हजार किलो जावा महुआ मिले। वहीं शराब बनाने के लिए भट्ठियां तैयार कर रखी गई थीं। जिसे पुलिस ने नष्ट कर दिया।

दलदल में युवा, भट्ठी के लिए माफिया देते हैं हर सप्ताह हजार रुपए

.स्थानीय आदिवासी जिनके खेत हैं, उन्होंने बताया कि हेथू से बड़ा घाघरा तक जिन आदिवासियों के खेत नदी से सटे हैं, शराब माफिया उन्हीं की जमीन का उपयोग अवैध शराब बनाने के लिए करते हैं। क्योंकि, उन्हें आसानी से नदी का पानी मिल जाता है। अवैध शराब बनाने में पानी का इस्तेमाल सबसे ज्यादा होता है। इसलिए नदी किनारे खेत का डिमांड है। खेत के लिए हर सप्ताह माफिया जमीन मालिक को हजार रुपए देते हैं। किसानों को लगता है कि खेती की आड़ में इस पर नजर किसी की नहीं पड़ेगी। जमीन मालिकों ने बताया कि ज्यादातर बेरोजगार युवा इस अवैध काम से जुड़े हुए हैं। माफिया युवाओं को प्रतिदिन 500 रुपए देते हैं, जो शराब बनाने से लेकर बाजार तक पहुंचाने का काम करते हैं।

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