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जनजातीय सलाहकार परिषद:केंद्रीय विधि मंत्रालय की राय, झारखंड सरकार ने टीएसी गठन में राज्यपाल के कई अधिकारों को किया नजरअंदाज

रांचीएक महीने पहले
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  • राज्य को कहेंगे, गवर्नर के माध्यम से गठित हो टीएसी: अर्जुन मुंडा

केंद्रीय विधि मंत्रालय ने कहा है कि झारखंड सरकार ने टीएसी (जनजातीय सलाहकार परिषद) के गठन में वहां के राज्यपाल के कई अधिकारों को नजरअंदाज किया है। गवर्नर के एप्रूवल के बाद ही टीएसी सदस्यों के नाम नोटिफाई किए जा सकते हैं। लोकसभा में सोमवार को भाजपा सांसद निशिकांत दुबे के सवाल के जवाब में जनजातीय मामलों के मंत्री अर्जुन मुंडा ने यह जानकारी दी।

उन्होंने कहा कि वे झारखंड सरकार को सूचित कर रहे हैं कि राज्यपाल के माध्यम से जनजातीय सलाहकार परिषद सही ढंग से गठित हो। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि राज्यपाल ने टीएसी के गठन के तरीके पर विधि मंत्रालय और केंद्रीय जनजातीय मंत्रालय से जानकारी मांगी थी। बाद में जनजातीय मंत्रालय ने भी विधि मंत्रालय से इस संबंध में राय मांगी।

विधि मंत्रालय ने अपने सुझाव में कहा है कि टीएसी मामले में झारखंड सरकार ने जो नीति अपनाई है, उसमें राज्यपाल के कई अधिकारों को नजरअंदाज किया गया है। उन विषयों को फिर से राज्यपाल को भेजा जाए और राज्यपाल के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाए कि वह सलाहकार परिषद सही ढंग से गठित हो। लोकसभा में गोड्‌डा सांसद निशिकांत दुबे ने कहा कि झारखंड सरकार ने टीएसी गठन में गैर संवैधानिक कार्य किया है।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्यपाल को टीएसी के अध्यक्ष पद से हटा कर खुद वह पद प्राप्त कर लिया है। सांसद ने मंत्री से जानना चाहा कि क्या यह संवैधानिक है? राज्यपाल के समाप्त किए गए अधिकार के बारे में सदन क्या सोचती है।

टीएसी के गठन में समाप्त कर दी गई है राज्यपाल की भूमिका
4 जून 2021 को राज्य सरकार ने टीएसी की नई नियमावली बनाई थी, जिसके अनुसार टीएसी गठन में राज्यपाल की भूमिका समाप्त कर दी गई। मुख्यमंत्री ही इसके सर्वेसर्वा हो गए। सभी सदस्याें की नियुक्ति के अनुमाेदन का अधिकार भी सीएम के पास ही आ गया। सीएम की स्वीकृति से ही टीएसी गठित हुई। सदस्यों की नियुक्ति भी सीएम ने ही की। पहले टीएसी के गठन का अधिकार राज्यपाल के पास था।

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