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  • There Will Be Separate Departments For All 09 Languages Of PG TRL, Dean Will Also Be Separate, But There Will Be No Separate HOD Now; Because There Are No Teachers

अधिसूचना:पीजी टीआरएल की सभी 09 भाषाओं के लिए होंगे अलग-अलग विभाग, डीन भी होंगे अलग, लेकिन अभी अलग एचओडी नहीं होंगे; क्योंकि शिक्षक नहीं हैं

रांचीएक महीने पहले
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फाइल फोटो - Dainik Bhaskar
फाइल फोटो
  • अभी सभी विभागों में अलग-अलग एचओडी की नियुक्ति नहीं होगी

रांची विश्वविद्यालय के पीजी जनजातीय और क्षेत्रीय भाषा विभाग (टीआरएल) के अंतर्गत 9 भाषाओं की पढ़ाई होती है। इन सभी भाषाओं के लिए अब अलग-अलग विभाग स्थापित करने की अधिसूचना इसी माह जारी होने वाली है। लेकिन, अभी सभी विभागों में अलग-अलग एचओडी की नियुक्ति नहीं होगी।

क्योंकि, शिक्षक हैं ही नहीं। नौ भाषाओं में सिर्फ तीन टीचर हैं, इनमें से एक डॉ. टीएन साहू यूनिवर्सिटी में प्रॉक्टर हैं। अभी नौ भाषाओं के लिए सिर्फ दो शिक्षक हैं। आने वाले दिनों में अलग स्ट्रीम (संकाय) होगा। अलग डीन भी होंगे। टीआरएल विभाग के एचओडी डॉ. हरि उरांव ने सभी भाषाओं के सेपरेट विभाग का नोटिफिकेशन और अलग स्ट्रीम का प्रस्ताव तैयार कर रांची विवि मुख्यालय को भेज दिया है।

स्ट्रीम व सेपरेट विभाग का यह है उद्देश्य

पीजी टीआरएल विभाग में सभी भाषाओं को सेपरेट विभाग का दर्जा देने का उद्देश्य स्टूडेंट्स को क्वालिटी एजुकेशन देना है। रिसर्च स्कॉलरों ने कहा है कि टीआरएल की अलग पहचान तब ही बन पाएगी जब सभी शिक्षकों व कर्मियों की नियुक्ति हो।

पीजी टीआरएल में इन भाषाओं की पढ़ाई

पीजी टीआरएल विभाग में नौ जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा की पढ़ाई होती है। इसमें पांच जनजातीय भाषा और चार क्षेत्रीय भाषा है। इसमें खोरठा, कुडुख, कुरमाली, नागपुरी, संताली, मुंडारी, पंच परगनिया, हो और खड़िया शामिल हैं।

सात भाषाओं में एक भी शिक्षक नहीं

पीजी टीआरएल के सात भाषाओं में संथाली, हो, मुंडारी, खड़िया, कुरमाली, खोरठा व पंचपरगनिया शामिल हैं। इन भाषाओं के शिक्षकों के रिटायर हो जाने के बाद उनकी जगह पर नई नियुक्ति नहीं की गई।

अलग स्ट्रीम के लिए भेजा दिया प्रस्ताव

पीजी टीआरएल को अलग स्ट्रीम और सेपरेट विभाग का नोटिफिकेशन जारी करने से संबंधित प्रस्ताव रांची विवि मुख्यालय को भेज दिया गया है। एकेडमिक काउंसिल में प्रस्ताव पर निर्णय होगा।
-डॉ. हरि उरांव, एचओडी पीजी टीआरएल

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