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  • To Find Out The Variant Of Corona, A Proposal To Install A Machine In The Rims Was Made Eight Months Ago, Every Time Stuck In The Papers

जीनाेम सिक्वेंसिंग मशीन जल्द लाने का संकल्प लीजिए:कोरोना के वैरिएंट का पता लगाने के लिए आठ महीने पहले बना था रिम्स में मशीन लगाने का प्रस्ताव, हर बार कागजों में अटका रहा

रांची2 महीने पहलेलेखक: अमन मिश्रा
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  • भास्कर अपील...जैसे भी हो, तत्काल मशीन की खरीदारी करें
  • पुराना संकल्प रद्द होने से फंसी खरीदारी, अब मांगा मार्गदर्शन

काेराेना का नया वैरिएंट ओमिक्राॅन तेजी से फैल रहा है। इसका पता लगाने का एकमात्र साधन जीनाेम सिक्वेंसिंग ही है। लेकिन झारखंड में अब तक यह मशीन संकल्प (सरकारी आदेश) में उलझी हुई है। यहां से 26 सैंपल जांच के लिए भुवनेश्वर भेजे गए हैं। एक सप्ताह बाद भी इसकी रिपाेर्ट नहीं आई है।

ऐसे में प्रक्रिया में उलझने की बजाय मशीन जल्द खरीदने का संकल्प लेना हाेगा, ताकि समय पर वैरिएंट का पता चल सके। दरअसल रिम्स के लिए जीनाेम सिक्वेंसिंग मशीन खरीदने की प्रक्रिया करीब आठ महीने पहले शुरू हुई थी। इसके बाद कई बार प्रस्ताव बना, लेकिन हर बार कागजाें में अटका रहा। अब चार अगस्त काे फिर रिम्स के माइक्राेबायाेलाॅजी विभाग ने मशीन खरीद का प्रस्ताव स्वास्थ्य विभाग काे भेजा है। लेकिन रिम्स प्रबंधन काे यह जानकारी ही नहीं है कि फाइल कहां फंसी है।

स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अरुण कुमार सिंह ने कहा कि मशीन खरीद प्रक्रिया काे मंजूरी देकर फाइल नेशनल हेल्थ मिशन (एनएचएम) काे भेज दी गई है। जबकि एनएचएम के डायरेक्टर रमेश घाेलप ने कहा कि पहले संकल्प जारी हुआ था, वह रद्द हाे गया है। इसलिए अब विभाग से मार्गदर्शन मांगा गया है कि खरीद कैसे हाे।

पहले संकल्प में मशीन खरीदने के दो विकल्प दिए गए थे

काेराेना के पीक के दाैरान एक संकल्प जारी हुआ था। इसमें दाे विकल्प थे-या ताे नाॅमिनेशन के आधार पर किसी नामी कंपनी से खरीदी जाए या जिस संस्थान ने सस्ती दर पर मशीन खरीदी है, उस आधार पर ही खरीदारी हाे। मिशन डायरेक्टर ने कहा कि जब मशीन की खरीद काे मंजूरी दी गई थी, तब ओडिशा की तर्ज पर खरीदनी थी। अब वह संकल्प निरस्त हाे चुका है। इसलिए फाइल वापस विभाग काे भेजकर मार्गदर्शन मांगा है कि खरीद टेंडर से हाेगी या अन्य माध्यम से। वैसे मशीन एनएचएम भी खरीद सकती है और मेडिकल काॅरपाेरेशन भी।

रिम्स से 26 सैंपल भेजे, सात दिन बाद भी रिपाेर्ट नहीं आई : कर्नाटक, महाराष्ट्र और राजस्थान में जिनाेम सिक्वेंसिंग के बाद ओमिक्राॅन की पुष्टि हुई है। इनमें से अधिकतर राज्याें के पास अपनी जीनाेम सिक्वेंसिंग मशीन है। इसी कारण समय पर वैरिएंट का पता लग गया। लेकिन झारखंड में ऐसी व्यवस्था नहीं है। यहां से सैंपल जांच के लिए भुवनेश्वर भेजना पड़ता है। वहां से रिपाेर्ट आने में 30 से 45 दिन लग जाते हैं। ऐसे में अनुमान लगाया जा सकता है कि रिम्स से एक दिसंबर को जो 26 सैंपल भेजे गए हैं, उनकी रिपोर्ट कब आएगी।

एक्सपर्ट व्यू, शंभू प्रसाद, अध्यक्ष आईएमए रांची- टेंडर में फंसे ताे होगी देरी

केंद्र सरकार ने जिस स्तर पर तैयारियां करने का निर्देश दिया है, उससे साफ है कि काेविड का खतरा टला नहीं है। नए वैरिएंट का पता लगाने के लिए जिनाेम सिक्वेंसिंग मशीन जरूरी है। लेकिन दुर्भाग्य है कि यहां वैरिएंट का पता लगाने वाली मशीन ही नहीं है। ऐसे में नए और पुराने संकल्प में फंसने से बेहतर है कि किसी भी माध्यम से मशीन की खरीद हाे। अगर टेंडर प्रक्रिया में फंसे ताे खरीद में निश्चित ताैर पर देर हाेगी।

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