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दुर्गोत्सव कल महालया:पहली बार दुर्गा पूजा के लिए महीने भर इंतजार, इस बार बस परंपरा निभाएंगे छोटे मंडप बनेंगे, मूर्ति 4 फीट की

रांची8 दिन पहले
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राजस्थान मित्र मंडल पूजा समिति के सदस्य भूमि पूजन करते हुए।
  • महालया के 35 दिनों बाद दुर्गा पूजा का अजब संयोग, पूजा आयोजक बोले - राज्य सरकार की गाइडलाइन का इंतजार
  • 17 सितंबर को महालया 22 अक्टूबर को बेलवरण, कोरोना के कारण छोटे स्तर पर पूजा की तैयारी

‘जागो‌..तुमि जागो...जागो मृन्मयी जागो चिन्मयी, तुमि जागो मां...ऐशो मां आमार घरो’ महालया के दिन रेडियो पर यह बोधन तथा आगमनी संगीत सुनकर दुर्गा पूजा आने का एहसास हो जाता है। बंगाली समुदाय इस दिन से ही मां दुर्गा का धरती पर आगमन मानता है। दूसरे दिन से नवरात्र की पूजा शुरू हो जाती है। 5 दिनों बाद षष्ठी के दिन बेलवरण से दुर्गा मां घरों में विराजमान हो जाती हैं। लेकिन, इस बार महालया के 35 दिनों बाद बेलवरण होगा और मां घरों में पधारेंगी।

पितृपक्ष श्राद्ध 17 सितंबर को अमावस्या के साथ समाप्त होगा, नियम के अनुसार इसी दिन महालया होगा। एक सामान्य वर्ष में, ‘महालया’ और ‘महाषष्ठी’ के बीच का अंतर छह दिनों का होता है। इस वर्ष महाषष्ठी 22 अक्टूबर को है। 23 को महासप्तमी, 24 को महाअष्टमी, 25 को महानवमी और 26 अक्टूबर को विजया दशमी मनाई जाएगी। वहीं नवरात्र की कलश स्थापना 17 अक्टूबर को होगी।

मलमास... एक महीने बाद 17 अक्टूबर को होगी नवरात्र की कलश स्थापना, 26 अक्टूबर को विजयादशमी

आशंका... मां के आवाहन के बाद भी उनकी स्थापना नहीं होने से रोग, शोक और बढ़ सकती हैं महामारियां

मान्यता... हर साल महालया के छठे दिन बेलवरण पूजा के साथ घरों में होता है मां दुर्गा का प्रवेश

महालया में न तो मेहमान आएंगे, न ही स्वादिष्ट व्यंजन बनेंगे...

बांग्ला समाज की लालपुर निवासी रिंकू बनर्जी कहती हैं कि दुर्गा पूजा हम बंगालियों के लिए धार्मिक ही नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक त्योहार भी है। लेकिन पहली बार ऐसा हो रहा है कि महालया के बाद एक महीना कुछ नहीं होगा। हमारे यहां महालया के दिन घर की साफ-सफाई के बाद विधिपूर्वक पूजा शुरू हो जाती है। नए कपड़े खरीदना, घर को सजाना, लोगों से मिलना-जुलना, अच्छे-अच्छे स्वादिष्ट पकवान भी बनने शुरू हो जाते हैं। बाहर रहने वाले घर के सदस्य भी महालया के दिन ही आ जाते हैं। इस बार ऐसा कुछ नहीं होगा, सब फीका लग रहा है।

एक महीना पूजा बढ़ने से उत्साह कम

दुर्गा बाटी के सह-सचिव श्वेतांको सेन कहते हैं कि पहली बार ऐसा हो रहा है कि महालया के महीने भर बाद दुर्गा पूजा की शुरुआत होगी। महालया के बाद ही मां दुर्गा की मूर्तियों को अंतिम रूप दे दिया जाता है। पर मलमास के कारण एक महीने दुर्गा पूजा बढ़ने से पूजा का उत्साह कम हो गया है। आरयू के बांग्ला विभाग के एचओडी डॉ. एनके बेरा कहते हैं कि मां दुर्गा के धरती पर आने के बाद भी उनकी स्थापना नहीं होने से रोग, शोक, महामारी की आशंका बढ़ गई है।

इस बार मूर्ति भी देर से बननी शुरू होगी

दुर्गा पूजा कराने वाले पुजारी दिलीप चटर्जी कहते हैं कि पितृपक्ष का समापन और देवी पक्ष के आगमन का काल महालया है। साल भर हम इस दिन की प्रतीक्षा करते हैं। महालया के दिन ही लगभग बन चुकी मां दुर्गा की मूर्ति की आंखें मूर्तिकार तैयार करते हैं, इस बार मूर्ति भी देर से ही बननी शुरू होगी।

रांची में इस बार की दुर्गा पूजा में सिर्फ परंपराओं का निवर्हन होगा। मां दुर्गा की प्रतिमाएं 4 फीट की होंगी। भव्य पंडाल नहीं बनेंगे, बल्कि छोटे मंडपों में मां की प्रतिमा स्थापित की जाएगी। मेला नहीं लगेगा। भोग का वितरण भी नहीं होगा। कोरोना को देखते हुए ज्यादातर पूजा समितियों ने यह निर्णय लिया है। उनका कहना है कि भव्य पंडाल और बड़ी प्रतिमा बनाने में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं हो पाएगा। हालांकि समितियां अभी भी राज्य सरकार की गाइडलाइन का इंतजार कर रही हैं। इसके कारण उनमें दुर्गोत्सव को लेकर असमंजस है। समितियों ने बताया कि अभी तक सरकार की गाइडलाइन है कि दूसरे राज्यों से यहां आने वाले लोगों को 14 दिन क्वॉरेंटाइन में रहना होगा। जबकि, यहां पंडालों के कारीगर और मूर्तिकार बंगाल से आते हैं। ऐसे में रांची आने पर उनका क्वॉरेंटाइन रहना संभव नहीं है।

न मेला, न ही भोग वितरण, सात कमेटियों ने किया भूमि पूजन

पूजा कमेटियों के पदाधिकारियों का कहना है कि झारखंड सरकार को जल्द गाइडलाइन जारी करनी चाहिए, ताकि साधारण रूप में ही दुर्गोत्सव की तैयारी शुरू की जाए। ओडिशा सरकार ने गाइडलाइन जारी कर दी है। इधर, रांची रेलवे स्टेशन, राजस्थान मित्र मंडल, गीतांजलि क्लब, त्रिकोण हवनकुंड, कला संगम ढिबरी बाजार, ज्योति संगम क्लब, कोकर दुर्गा पूजा समिति ने भूमि पूजन किया है।

रावण दहन पर संशय

पितृ पक्ष के बाद सीएम से मिलकर होगा निर्णय

पंजाबी-हिंदू बिरादरी के प्रवक्ता अरुण चावला ने बताया कि इस बार रावण दहन की संभावना कम है। अगर अक्टूबर में संभावना बनती है तो हो सकता है। वहीं, रावण दहन समिति अरगोड़ा के महासचिव पंकज साहू ने बताया कि पितृ पक्ष के बाद मुख्यमंत्री से मिलकर तय करेंगे कि रावण दहन होगा या नहीं।

पूजा समितियां बोलीं

सभी अनुष्ठान मंडपों में ही पूरे कराए जाएंगे...

पूजा के लिए भूमि पूजन हो चुका है। चार फीट की प्रतिमा स्थापित होगी। पंडाल को एक छोटा मंडप का रूप दिया जाएगा। -मुनचुन राय रांची रेलवे स्टेशन

छोटे रूप में पूजा होगी। बकरी बाजार मैदान में ही मंदिर से सटी जगह पर मां का मंडप बनेगा। -अशोक चौधरी अध्यक्ष, बकरी बाजार

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