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अधिसूचना से हाईकोर्ट नाराज:किस कानून के तहत जनप्रतिनिधियों काे निजी वाहनों पर नेम प्लेट लगाने की दी छूट

रांची3 महीने पहले
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  • निजी वाहनाें पर नेम प्लेट या बाेर्ड लगाने के खिलाफ दायर अर्जी पर सुनवाई, राज्य सरकार की

वाहनाें पर नेम प्लेट या बाेर्ड लगाने के खिलाफ दायर याचिका पर गुरुवार को झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस डाॅ. रवि रंजन और जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की बेंच ने राज्य सरकार द्वारा जारी अधिसूचना पर नाराजगी जताई। बेंच इस बात से नाराज है कि राज्य सरकार ने अधिसूचना जारी करके सभी जनप्रतिनिधियों काे अपने वाहन पर नेम प्लेट या बाेर्ड लगाने की छूट दे दी है। जबकि, अधिसूचना में कहा गया है कि सरकारी वाहनों पर ही बाेर्ड लगाया जा सकता है, जाे अपने आप में विरोधाभास पैदा कर रहा है।

चीफ जस्टिस की अध्यक्षतावाली बेंच ने इस मामले में राज्य सरकार से स्पष्‍ट जवाब मांगा है। सुनवाई के दौरान वीडियाे कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए परिवहन सचिव केके साेन भी मौजूद थे। कोर्ट ने परिवहन सचिव से पूछा कि जब न्यायिक पदाधिकारियों काे निजी वाहन पर बाेर्ड लगाने की छूट नहीं दी गई है, ताे फिर जनप्रतिनिधियों काे निजी वाहन पर बाेर्ड लगाने की छूट क्याें और कैसे दी गई है। क्या जनप्रतिनिधि अपने क्षेत्र में किसी परिचय के माेहताज हैं, जाे उन्हें नेम प्लेट लगाने की छूट दी जा रही है। किस कानून के तहत ऐसा किया गया है। इस मामले में परिवहन सचिव से 5 अगस्त तक जवाब मांगा गया है।

सरकार की दलील : जनप्रतिनिधियों को दूर क्षेत्रों में जाना पड़ता है

परिवहन सचिव केके सोन ने कोर्ट को बताया कि केवल सरकारी वाहनों पर ही नेम प्लेट या बोर्ड लगाया जा सकता है। निजी वाहन पर ऐसा करना प्रतिबंधित है। सोन के जवाब सुनने के बाद कोर्ट ने पूछा कि क्या सभी सांसद, विधायक और मुखिया को सरकारी वाहन मिलता है? इस दौरान महाधिवक्ता राजीव रंजन ने कहा कि जनप्रतिनिधियों को दूर क्षेत्रों में जाना पड़ता है, इसलिए उन्हें इसकी छूट है। वहीं, सीओ-बीडीओ के सवाल पर उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था के संधारण के लिए उन्हें छूट दी गई है।

34वां राष्ट्रीय खेल घोटाला : आरके आनंद ने अग्रिम जमानत के लिए एसीबी कोर्ट में दायर की याचिका

34वें राष्ट्रीय खेल घोटाले के मुख्य आरोपी और ओएनजीसी के तत्कालीन चेयरमैन आरके आनंद ने अग्रिम जमानत के लिए एसीबी के स्पेशल कोर्ट में गुरुवार को याचिका दाखिल की है। उनकी याचिका पर 12 जुलाई को कोर्ट में सुनवाई होगी। इससे पहले आरोपी आरके आनंद इस मामले से राहत पाने के लिए झारखंड हाईकोर्ट में जमानत लेने और इस संबंध में थाने में दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने के लिए याचिका दाखिल की थी। उन्होंने बताया था कि वह निर्दाेश हैं, लेकिन हाईकोर्ट ने उनकी याचिका को खारिज कर दिया था। इसके बाद उनकी ओर से स्पेशल कोर्ट में जमानत के लिए याचिका दाखिल की गई है। यह मामला वर्ष 2010 में एसीबी रांची के थाने में दर्ज कराया गया था। इस मामले के अन्य आरोपी पीसी मिश्रा, एसएम हाशमी और मधुकांत पाठक को पहले ही जमानत मिल चुकी है। उपरोक्त सभी आरोपियों के खिलाफ अदालत में एसीबी के जांच पदाधिकारी ने चार्जशीट दाखिल कर दी है।

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