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ऐसा सिर्फ झारखंड में:जहां विवि शिक्षकों के लिए पिछले 12 साल से प्रमोशन नियम ही नहीं

रांची25 दिन पहले
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  • एक साथ नियुक्त हुए थे...बिहार में बन गए प्रोफेसर, यहां असिस्टेंट प्रोफेसर ही हैं
  • 7 विवि के 2000 शिक्षकों का प्रमोशन बाधित
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राकेश, देश में झारखंड एक ऐसा राज्य है जहां पिछले 12 साल से विश्वविद्यालय शिक्षकों के लिए प्रमोशन नियम अस्तित्व में नहीं है। यानि 31 दिसंबर 2008 के बाद प्रमोशन नियम बना ही नहीं। इस कारण जिन शिक्षकों को वर्ष 2008 के बाद प्रमोशन मिलना था, उनका प्रमोशन बाधित है। एकीकृत बिहार के समय वर्ष 1993 और 1996 में विवि शिक्षकों की नियुक्ति हुई थी। इस बैच के शिक्षक बिहार में प्रोफेसर बन गए हैं। वहीं, इसी बैच के 95 प्रतिशत शिक्षक झारखंड में असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर ही कार्य कर रहे हैं। सिर्फ पांच प्रतिशत शिक्षक एसोसिएट प्रोफेसर बन सके हैं।

लेकिन प्रोफेसर पद पर एक भी शिक्षक का प्रमोशन नहीं हुआ है। प्रमोशन नियम नहीं रहने के कारण राज्य के रांची यूनिवर्सिटी समेत सातों विवि के लगभग 2000 शिक्षकों का प्रमोशन बाधित है। इसके लिए सरकार और यूनिवर्सिटी प्रशासन समान रूप से जिम्मेवार हैं। दूसरी ओर प्रमोशन नहीं मिलने से शिक्षक मायूस और आक्रोश में हैं। 2008 के बाद यूजीसी ने बनाए तीन रेगुलेशन : यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (यूजीसी) द्वारा समय पर विवि शिक्षकों के लिए प्रमोशन रेगुलेशन जारी किया गया है। वर्ष 2008 के बाद यूजीसी द्वारा तीन प्रमोशन रेगुलेशन जारी किए गए। इनमें रेगुलेशन 2010, 2016 और 2018 शामिल हैं। लेकिन यहां वर्ष 2018 का प्रमोशन रेगुलेशन तो दूर, वर्ष 2010 का भी नहीं बना है।

प्रमोशन संबंधी नियम बनाने की चल रही कवायद

उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग ने पिछले 22 जून को राज्य के सभी विवि को प्रमोशन नियम बनाने को लेकर पत्र लिखा। जिसमें कहा गया कि विश्वविद्यालय प्रमोशन नियम बनाकर शीघ्र भेजें, ताकि आगे की कार्यवाही की जा सके। लेकिन रांची विवि समेत किसी भी यूनिवर्सिटी ने अभी तक नियम बनाकर नहीं भेजा है।

पड़ोसी राज्यों बिहार, यूपी और छत्तीसगढ़ में क्या है स्थिति

पड़ोसी राज्य बिहार, यूपी, छत्तीसगढ़ और ओडिशा में विवि शिक्षकों का प्रमोशन बाधित नहीं है। वहां लगातार प्रमोशन मिल रहा है। यहां रेगुलेशन 2010 और 2016 के अनुसार विवि शिक्षकों को प्रमोशन दिया जा रहा है। जिन राज्यों में प्रमोशन नियम बनने में विलंब हुआ, वहां रेगुलेशन 2008 को ही विस्तार दे दिया गया।

प्रमोशन नहीं मिलने यह पड़ रहा प्रभाव

जेपीएससी द्वारा प्रिंसिपल पद पर नियुक्ति के लिए आवेदन आमंत्रित किया गया था। इसमें एसोसिएट प्रोफेसर ही आवेदन दे सकते थे। लेकिन निर्धारित अर्हता पूरी नहीं करने के चलते 47 में से 23 पद रिक्त रह गए थे। वहीं, कुलपति और प्रतिकुलपति पद के लिए प्रोफेसर पद का होना जरूरी है। झारखंड के विवि में गिने चुने प्रोफेसर बचे हैं। इस कारण वीसी-प्रोवीसी के पद पर दूसरे राज्यों के शिक्षकों का चयन होता है।

सिर्फ झारखंड में नहीं मिला प्रमोशन

देश के 29 राज्यों में से सिर्फ झारखंड में ही प्रमोशन नहीं मिल रहा है। विवि में समय-समय पर नियुक्ति हुई है। लेकिन प्रमोशन की ओर ध्यान नहीं दिया गया। इस कारण एक साथ बहाल हुए शिक्षक दूसरे राज्यों में प्रोफेसर बन गए हैं। लेकिन यहां जिस पद पर थे, वहीं रह गए। - डॉ. एलके कुंदन, पीजी शिक्षक सह सीनेट सदस्य।

कल फिर से भेज देंगे नियम

यूजीसी के वर्ष 2010 रेगुलेशन के अनुसार प्रमोशन नियम बनाकर चार वर्ष पहले शिक्षा विभाग को भेज चुके हैं। अब शिक्षा विभाग द्वारा फिर से प्रमोशन नियम मांगा गया है, जिसे बुधवार तक भेज देंगे। 
- डॉ. अमर कुमार चौधरी, रजिस्ट्रार, रांची विश्वविद्यालय।

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