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धरोहर:553 साल पहले पुरी से वृंदावन जाते समय कुजू में पड़े थे चैतन्य महाप्रभु के कदम, मनाेरम प्राकृतिक दृश्य देख किया था हरिनाम संकीर्तन

कुजू10 महीने पहले
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कुजू में पहाड़ी पर उभरे चैतन्य महाप्रभु के पैरों के निशान - Dainik Bhaskar
कुजू में पहाड़ी पर उभरे चैतन्य महाप्रभु के पैरों के निशान
  • ऐसी मान्यता है कि महाप्रभु के साथ हरिनाम संकीर्तन में पशु-पक्षी भी नृत्य करते थे, चट्टानाें पर हैं महाप्रभु के पैराें के निशान

अरविंद वर्मा, प्राकृतिक छटा व कल-कल बहती जलधाराओं के बीच स्थित चरण पहाड़ी मंदिर वर्षा ऋतु में हरियाली की चादर लपेटे  सैलानियों को बरबस अपनी ओर आकर्षित कर रही है। नदी, झरना, पर्वत, सुरम्य वादियों से घिरा चैतन्य महाप्रभु का मंदिर है। चरणधारा धाम के मुख्य पुजारी बाबा रामदास ने बताया कि 533 वर्ष पूर्व श्री चैतन्य महाप्रभु के चरण कुजू स्थित चाैथा नदी के तट पर पड़े थे।

जिसके कारण यह जगह चरणधारा धाम के नाम से विख्यात हाे गई। श्री चैतन्य महाप्रभु जगन्नाथपुरी धाम से वृन्दावन जाने के क्रम में यहां के प्राकृतिक मनोहारी दृश्यों से मोहित होकर रुके थे। इस दौरान भावविभोर महाप्रभु ने कल-कल बहती चौथा नदी के निर्मल जल में स्नान कर हरी नाम संकीर्तन प्रारम्भ किया जिसमें वहां के तमाम पशु पक्षियों ने भी महाप्रभु के साथ नृत्य किया था।

जिसका प्रमाण आज भी नदी तट पर स्थित चट्टानों पर स्पष्ट रूप से देखा जाता है। महाप्रभु के चरण सहित कीर्तन में शामिल जंगली जानवरों के चरण चिन्ह पत्थर पर अंकित है। साथ ही नदी के तट पर स्वयं भू शिवलिंग मौजूद है। मकर संक्रांति पर 15 वर्षों से दो दिवसीय टुसू मेला लगता आ रहा है।

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