करिश्मा कुदरत का:दो छोटे पत्थरों पर टिकी है हजारों टन वजनी चट्‌टान, आर्कियोलॉजिस्ट के अनुसार, पलामू में हजारों साल पुराने ऐसे कई चट्‌टान हैं, जिनका संरक्षण जरूरी है

माेहम्मदगंज10 महीने पहले
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आर्कियोलॉजिस्ट अभिषेक ने बताया कि दो छोटे-छोटे पत्थरों पर टिकी चट्टान डोलमेन मेगालिथ का यह एक रूप है। - Dainik Bhaskar
आर्कियोलॉजिस्ट अभिषेक ने बताया कि दो छोटे-छोटे पत्थरों पर टिकी चट्टान डोलमेन मेगालिथ का यह एक रूप है।

कुदरत का करिश्मा देखना है तो पलामू के मोहम्मदगंज जरूर आएं। लकड़ही पहाड़ी और गोला पत्थर गांव में कई अजूबे चट्टान हैं जो लोगों के लिए कौतूहल और आस्था का केंद्र हैं। लकड़ही पहाड़ी पर दो छोटे-छोटे पत्थरों पर हजारों टन वजनी चट्‌टान टिकी है। चट्टान हजारों साल पुराना है।

पदार्थडीह झरिवा टोला के रंजीत कुमार कुशवाहा और सर्व शिक्षा अभियान के जेई विकास कुमार मेहता ने बताया कि पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण के कारण ही दो पत्थरों पर चट्टान टिकी है। यह कुदरत का अनमोल उपहार है। इसके संरक्षण पर काम करना चाहिए।

दैनिक भास्कर ने ग्राउंड जीरो पर जाकर जानकारी ली। हुसैनाबाद निवासी आर्कियाेलाॅजिस्ट व एसएस मेमोरियल कॉलेज रांची के असिस्टेंट प्रो. अभिषेक कुमार गुप्ता से बात की। उन्होंने बताया कि प्रकृति संरक्षण से जीवन खुशहाल होगा।

मोहम्मदगंज में मेगालिथ

  • क्षेत्र में ऐसे अजूबे पत्थरों की भरमार है
  • ये कोई साधारण पत्थर नहीं बल्कि मेगालिथ हैं
  • कहीं-कहीं जीवाश्म के रूप में भी ये मौजूद हैं
  • संरक्षण हो तो बनेगी आर्कियोलॉजिकल साइट

गोल पत्थर के कारण गांव का नाम ही पड़ गया गोला पत्थर

आर्कियोलॉजिस्ट अभिषेक ने बताया कि दो छोटे-छोटे पत्थरों पर टिकी चट्टान डोलमेन मेगालिथ का यह एक रूप है। चतरा में भी ऐसा ही एक पत्थर है। इसी पहाड़ी के आसपास के नगरूआ पहाड़ में भी मेगालिथ पाए गए हैं। इसी प्रकार का अजूबा गोल पत्थर पास के गांव में भी है।

इस कारण गांव का नाम गोला पत्थर पड़ गया है। पत्थर को लोग भगवान शिव के रूप में पूजा करते हैं। यह एक जीवाश्म है। जो सदियों पुराना है। मोहम्मदगंज के पहाड़ों में ऐसे कई अजूबे हैं।

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