आदेश / डीडीसी के आदेश पर मनरेगा कूप की हुई जांच, दस्तावेज जमा करने का निर्देश

DDC order ordered MNREGA coup investigation, submission of documents
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DDC order ordered MNREGA coup investigation, submission of documents

दैनिक भास्कर

May 30, 2020, 05:00 AM IST

पलामू. जिले के मनिका क्षेत्र के जुंगूर पंचायत के जुंगूर गांव के सिंधिया टोला में मस्टर रोल में नाम नहीं होने के बाद भी मनरेगा के तहत हो रहे कूप निर्माण में काम कर रही सोनी कुमारी के घायल होने की खबर प्रकाशित होने के बाद जिले की उपविकास आयुक्त माधवी मिश्रा ने शुक्रवार को जांच टीम भेजकर जांच कराई। इस खबर को दैनिक भास्कर ने जब प्रमुखता से प्रकाशित किया तो यह संभव हो सका।

जांच टीम में डीआरडीए के परियोजना पदाधिकारी ज्ञानेश्वर शुक्ला व लेखापाल कर्नला कुमार शामिल थे। मौके पर मौजूद ग्रामीणों से पूछताछ के दौरान इस बात की पुष्टि हुई कि कूप निर्माण में काम कर रही सोनी कुमारी 23 मई को जख्मी हो गयी थी, जिसका इलाज डालटनगंज के एक निजी क्लीनिक में चल रहा है। जांच टीम के अधिकारियों ने इस योजना का सारा दस्तावेज जिला मुख्यालय में जमा करने का निर्देश पंचायत सेवक अर्जुन राम को दिया है।

मौके पर रोजगार सेवक अरुण कुमार, लाभुक रंजीत उरांव व मुखिया पति गुलाब भी मौजूद थे। गौरतलब हो कि सोनी के घायल होने की जानकारी केवल लाभुक, रोजगार सेवक, पंचायत सेवक और मुखिया के अलावे मनिका बीडीओ एनके राम को थी, लेकिन किसी ने इसकी जानकारी जिला प्रशासन को देना मुनासिब नहीं समझा। बताया जाता है कि 23 मई, 2020 को निर्माणाधीन कूप के धंसने से 21 वर्षीय सोनी कुमारी, पिता गोपाल उरांव गंभीर रूप से घायल हो गयी है। घटना के समय वह मिट्टी में बुरी तरह दबकर बेहोश हो गई थी। वर्तमान में उनका इलाज मेदिनीनगर के एक निजी अस्पताल नारायण सुपर स्पेशिएलिटी में चल रहा है। लड़की का दाहिना पैर घुटने के नीचे बुरी तरह टूट गया है।

घटना संबंध में सोनी ने बताया था कि उस वक्त 7-8 मजदूर कार्यरत थे। मजदूरों के नाम क्रमश: पूनम कुमारी पिता- धाना उरांव, सरिता कुमारी व सुनीता कुमारी दोनों के पिता जानदेव उरांव एवं पुनी कुमारी पिता स्व. श्यामदेव उरांव हैं। सोनी कुमारी कुएं से मिट्टी बाहर फेंककर निकासी हेतु बने रास्ते से वापस घुस रही थी, तभी कुएं के ऊपरी हिस्से का एक भाग अचानक उसके ऊपर गिर पड़ा और वह उसमें दब गई थी। अाॅनलाइन रिकाॅर्ड चेक करने से स्पष्ट होता है कि उक्त मजदूरों को बिना मस्टर रोल के ही काम कराया जा रहा था। इस वित्तीय वर्ष में पहला मस्टर रोल संख्या 1833 सृजित की गई है, जिसकी कार्य अवधि 21 से 27 मई 2020 है। इस मस्टर रोल में उन लड़कियों के नाम दर्ज नहीं हैं, जो जांच का असली मुद्दा भी है।

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