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धर्म-समाज:महुआडांड़ में सादगी से लोगों ने मनाया बकरीद का त्योहार

महुआडांड़8 दिन पहले
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त्याग व समर्पण का त्योहार ईद उल अजहा (बकरीद) बुधवार को प्रखंड में सादगीपूर्ण तरीके से मनाया गया। कोरोना के प्रकोप को देखते हुए प्रशासन के द्वारा घर पर ही रहकर त्योहार मनाने को कहा गया था और सामूहिक रूप से नमाज अदा करने की मनाही थी, जिसके कारण प्रखंड अंजुमन कमेटी ने सभी मुस्लिम धर्मावलंबी से आह्वान किया था कि घर में रहकर नमाज पढ़े और मोबाइल, सोशल मीडिया के माध्यम से अपने प्रियजनों को ईद की मुबारकबाद दें।

इस दाैरान जामा मस्जिद, मदीना मस्जिद एवम गौशिया मस्जिद के इमाम ने अपने सहयोगियों के साथ मस्जिद में नमाज अदा करते हुए कोरोना से देश और दुनिया को मुक्त करने की दुआ भी की। वहीं नमाज के बाद लोगों ने अपने-अपने घरों में बकरे की कुर्बानी भी की। बताते चलें कि मुसलमान यह त्योहार कुर्बानी के पर्व के तौर पर मनाते हैं। इस्लाम में इस पर्व का विशेष महत्व है।इस्लाम मजहब की मान्यताओं के अनुसार पैगंबर हजरत इब्राहिम से ही कुर्बानी देने की प्रथा शुरू हुई थी। कहा जाता है कि अल्लाह ने एक बार पैगंबर इब्राहिम से कहा था कि वह अपने प्यार और विश्वास को साबित करने के लिए सबसे प्यारी चीज का त्याग करें और इसलिए पैगंबर इब्राहिम ने अपने इकलौते बेटे की कुर्बानी देने का फैसला किया था। कहते हैं कि जब पैगंबर इब्राहिम अपने बेटे को मारने वाले थे। उसी वक्त अल्लाह ने अपने दूत को भेजकर बेटे को एक बकरे(दुम्बे) से बदल दिया था। तभी से बकरीद अल्लाह में पैगंबर इब्राहिम के विश्वास को याद करने के लिए मनाई जाती है।

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