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लापरवाही:ब्लड बैंक में नहीं मिलता सभी ग्रुप का खून, चली जाती है कई लाेगाें की जान

रामगढ़8 महीने पहले
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  • जिला बनने के 13 साल बाद अप्रैल 2020 में खुले ब्लड बैंक का लोगों को नहीं मिल रहा फायदा

कोरोना काल (अप्रैल माह) में जिले में ब्लड बैंक आरंभ होने के बावजूद मरीजों को जरूरत के ग्रुप का ब्लड नहीं मिल पा रहा है। जिसके कारण मरीजों के परिजनाें काे खून की तलाश में रांची या दूसरे जगहाें का चक्कर लगाना पड़ रहा है। इस दाैरान मरीजाें की जान भी चली जाती है। ब्लड बैंक के कर्मियों के अनुसार जिले के लोगों में स्वैच्छिक रक्तदान के प्रति जागरुकता नहीं है। जिसके कारण रक्तदान शिविर के आयोजन होने के बावजूद ब्लड बैंक में बहुत कम मात्रा में ब्लड स्टॉक हो पाता है। कर्मियों के अनुसार प्रतिमाह यहां 250-300 यूनिट ब्लड शिविर के माध्यम से आता है।

जिसमें 60-65 यूनिट ब्लड थैलीसिमिया रोगियों को बिना डोनर के दिया जाता है। वहीं अस्पताल में भर्ती गर्भवती माताओं को प्रसव के दौरान और दुर्घटना में घायल मरीजों को भी बिना डोनर के ब्लड दिया जाता है। इसके बाद बाकी बचे ब्लड को अन्य जरूरतमंदों की जान बचाने के लिए दिया जाता है। लेकिन ब्लड के अभाव में परेशानी तभी आती है जब किसी मरीज को उसके जरूरत के हिसाब से ग्रुप का ब्लड बैंक में नहीं मिल पाता है। उस समय जरूरतमंद अगर ब्लड बैंक में डोनर भी लेकर आए, तो उसे ब्लड नहीं मिल पाता है। ऐसी स्थिति में मरीजों के परिजनों की परेशानी बढ़ जाती है। गाैरतलब है कि 2007 में जिला बनने के 13 साल बाद 2020 में यहां ब्लड बैंक खाेला जा सका है।

सबसे बड़ा कारण...लाेगाें में रक्तदान के प्रति जागरुकता का अभाव

एबी पाॅजिटिव ग्रुप की हमेशा रहती है कमी

ब्लड बैंक के टेक्नीशियन उपेंद्र कुमार के अनुसार समय-समय पर शिविर का आयोजन होता है, उस समय ब्लड बैंक में ए, बी, ओ या ए बी पॉजिटीव या निगेटिव सभी प्रकार के ब्लड स्टॉक में रहते हैं। लेकिन थैलीसीमिया मरीजों और गर्भवती माताओं को ब्लड देने के बाद अगर कोई व्यक्ति किसी खास ग्रुप का ब्लड अपनी जरूरत के अनुसार लेने आता है, तो ऐसी स्थिति में परेशानी उत्पन्न होती है। अगर किसी मरीज को एबी पॉजिटिव ब्लड की आवश्यकता हाेती है ताे अकसर स्टॉक में उक्त ग्रुप का ब्लड नहीं मिलता है। ऐसे में डोनर लाने के बावजूद हम उसे ब्लड नहीं दे पाते हैं। ऐसी स्थित में जरूरतमंद को सेम ग्रुप का डोनर लाने को कहा जाता है। लेकिन डोनर नहीं मिलने से मरीज के परिजनों को परेशानी होती है।

सेम ग्रुप का डोनर ले जाने पर ही मिलता है ब्लड : अमरलाल

गोला के कोरांबे निवासी अमरलाल ने कहा कि ब्लड बैंक में सेम ग्रुप का डोनर लेकर जाने के बाद ही ब्लड मिल पाता है। अगस्त माह में उनकी मां के बीमार होने के बाद उन्होंने ब्लड बैंक में एबी पॉजिटीव ग्रुप के ब्लड की मांग की। उन्हें सेम ग्रुप का डोनर लाने को कहा। वहीं दोहाकातू निवासी राजेंद्र ने बताया कि अपने मित्र के दुर्घटनाग्रस्त होने पर ब्लड के लिए सेम ग्रुप का डोनर लाने को कहा गया।

ब्लड बैंक में सभी संशाधन सिर्फ सेपेरेटर का अभाव

ब्लड बैंक कर्मियों के अनुसार ब्लड बैंक में अधिकांशत: संसाधन हैं। सिर्फ यहां सेपेरेटर का अभाव है। जिसके कारण पैक्ड सेल और प्लाज्मा प्लेसमेंट का कार्य नहीं हो सकता।

22 यूनिट रक्त नष्ट : हेपेटाइटिस बी और सी, एचआईवी और मलेरिया के के कारण सात माह में यहां अब तक 22 यूनिट ब्लड नष्ट हुआ है।

रक्तदान के लिए प्रचार-प्रचार किया जा रहा : प्रभारी डॉ. रेणु

ब्लड बैंक की प्रभारी डाॅ. रेणु ने बताया कि स्टॉक में खून की कमी का मुख्य कारण लोगों में स्वैच्छिक रक्तदान के प्रति जागरुकता का अभाव है। इसके लिए लोगों में प्रचार-प्रसार की आवश्यकता है। डीसी संदीप सिंह के प्रयासों से रेडक्रॉस सोसाइटी सहित विभिन्न सामाजिक संगठन रक्तदान के प्रति लोगों को जागरूक कर रहेे हैं। इससे स्थिति में जल्द सुधार होगा। लोगों को सभी ग्रुप के ब्लड मिलने लगेंगे।

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