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विमालता रूप:जैन मंदिरों में मनाया जा रहा दशलक्षण महापर्व, किए जा रहे धार्मिक अनुष्ठान

रामगढ़9 दिन पहले
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श्री दिगंबर जैन समाज की ओर से दशलक्षण महापर्व मनाया जा रहा है। रामगढ़ के मेन रोड के श्री दिगंबर जैन मंदिर और रांची रोड के श्रीपारसनाथ जिनालय में सादगी के साथ महापर्व के अनुष्ठान किए जा रहे हैं। महापर्व के चौथे दिन श्रीदिगंबर जैन मंदिर रामगढ़ में श्रीजी का प्रथम अभिषेक पदम चंद जैन व शांतिधारा का सौभाग्य राकेश जैन को मिला। वहीं, रांची रोड के श्रीपारसनाथ जिनालय में प्रथम अभिषेक सुरेश सेठी और शांतिधारा करने का सौभाग्य अशोक जैन को प्राप्त हुअा।

वहीं,धार्मिक अनुष्ठान में उत्तम सत्य धर्म की विधान की गई। जबकि, पांचवें दिन उत्तम शौच धर्म की विधान की गई। रामगढ़ जैन मंदिर में अभिषेक अनुष्ठान संपतलाल चूड़ीवाल व शांतिधारा संतोष अजमेरा और रांची रोड के मंदिर में श्रीजी का अभिषेक धीरज बज और शांतिधारा अनुष्ठान विकास पाटनी ने किया। पंडित सुरेश जैन ने मनुष्य अनेक कारणों से असत्य बोलता है। झूठ बोलने का प्रधान कारण लोभ है। लोभ में आकर मनुष्य अपना स्वार्थ सिद्ध करने के लिए असत्य बोला करता है।

असत्य भाषण करने का दूसरा कारण भय है। उन्होंने बताया कि जो व्यक्ति उत्तम शौच धर्म को धारण करता है। उसकी आत्मा लोभ व लालच जैसे मल का त्याग कर परम उज्ज्वलता को प्राप्त होती है। उस व्यक्ति के मन में संतोष गुण सहित अनेक गुण रत्नों के भंडार प्राप्त होते है। उसका जीवन परम शांति को उपलव्ध होता है। कहा कि धन का लोभ धन लाभ में निमित्त नहीं है,पर धन लाभ में पुण्य निमित्त है। संतोष रूपी निर्मल जल जो तीव्र लोभ रूप मलपुंज को धोता है। भोजन की गृद्धता से रहित है। उसको विमालता रूप शौच धर्म होता है।

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