जिम्मेंदारों की अनदेखी:ट्रॉमा सेंटर में चतुर्थवर्गीय कर्मी व वार्ड अटेंडेंट मरीजों का करते हैं ड्रेसिंग व दवा का वितरण

रामगढ़3 दिन पहलेलेखक: शंकर कुमार देवघरिया
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मरीज के टूटे हाथ में ड्रेसिंग करते चर्तुथवर्गीय कर्मचारी। - Dainik Bhaskar
मरीज के टूटे हाथ में ड्रेसिंग करते चर्तुथवर्गीय कर्मचारी।
  • हाथ- पैर टूटे मरीजों को एक्स-रे के लिए जाना पड़ता है 8 किलोमीटर दूर
  • ऑर्थो वार्ड चालू होने के 5 माह बाद भी मैनपावर और संशाधन नहीं

जिले के बाइपास फोरलेन मोड़, चुटुपालू घाटी सहित कई स्थानों को एक्सीडेंटल जोन के रूप में चिन्हित किया गया है। जिसे देखते हुए स्वास्थ्य विभाग द्वारा दुर्घटनाग्रस्त मरीजों को राहत दिलाने के उद्देश्य से बाइपास फोरलेन मोड़ के समीप स्थित नवनिर्मित ट्रॉमा सेंटर भवन में पांच माह पूर्व सदर अस्पताल के ऑर्थो वार्ड को शिफ्ट किया गया है। उक्त सेंटर में मरीजों के इलाज के लिए चार ऑर्थोपेडिक डॉक्टर की नियुक्ति तो स्वास्थ्य विभाग द्वारा कर दी गई है। लेकिन आज भी मैनपावर और संसाधन का घोर अभाव है। संसाधनों की कमी की वजह से उक्त सेंटर में हाथ-पैर टूटे मरीजों के इलाज के नाम पर उक्त सेंटर में मरीजों के जीवन से खिलवाड़ किया जा रहा है।

ट्रॉमा सेंटर में मैनपावर व संसाधन की कमी है। सेंटर में मरीजों के इलाज के नाम पर चार ऑर्थोपेडिक डॉक्टर हैं। जिसमें डॉ राजेश्वर, डॉ सपन कुमार, डॉ राहुल बरेलिया और डॉ अभिजीत शामिल हैं। यहां प्रतिदिन दस-पंद्रह हाथ-पैर टूटे मरीज अपना इलाज कराने आते हैं। लेकिन पांच माह पूर्व इस सेंटर को चालू किये जाने के बावजूद यहां एक्स-रे तक की सुविधा नहीं है। जिसके कारण डॉक्टर द्वारा मरीजों की जांच के बाद एक्स-रे के लिए सदर अस्पताल भेजा जाता है।

वहीं मरीजों को आठ-दस किलोमीटर की दूरी तय कर एक्स-रे करा उन्हें फिर से ट्रॉमा सेंटर आकर अपना इलाज कराना पड़ता है। वहीं मैनपावर के अभाव में चर्तुथवर्गीय कर्मचारी व वार्ड अटेंडेंट हाथ-पैर टूटे मरीजों का ड्रेसिंग व प्लास्टर करते हैं। जबकि फार्मासिस्ट के अभाव में अप्रशिक्षित नर्स द्वारा मरीजों के बीच दवा का भी वितरण किया जा रहा है।

मरीज बोले-10 किमी. दूरी तय कर एक्सरे कराने के बाद फिर डॉक्टर को दिखाने आए
ट्रॉमा सेंटर में इलाज कराने चितरपुर से पहुंचे युवक विकास कुमार व सोसो निवासी मुंदरी देवी ने बताया कि वे हाथ-पैर में चोट लगने के बाद वे इलाज के लिए यहां आये थे। लेकिन डॉक्टर ने जांच के बाद एक्स-रे कराने की सलाह देकर सदर अस्पताल भेज दिया। जहां हमने 130 रुपये शुल्क अदा करने के साथ ही दस किलोमीटर की दूरी तय कर एक्स-रे कराने के बाद दोबारा डॉक्टर को दिखाने के लिए यहां पहुंचे हैं।

ट्रामा सेंटर में एक्सरे मशीन आ गई है, इंस्टॉलेशन और टेक्निशियन की व्यवस्था जल्द: डीएस
मैनपावर व संसाधन की कमी को लेकर सदर अस्पताल के डीएस डॉ उदय श्रीवास्तव कहते हैं कि ट्रॉमा सेंटर में मरीजों की सुविधा के लिए एक्स-रे मशीन उपलब्ध करा दिया गया है। जल्द ही टेक्नीशियन और मशीन के इंस्टॉल होने के बाद मरीजों को एक्स-रे की सुविधा ट्रॉमा सेंटर से मिलने लगेगी। वहीं उन्होंने बताया कि मैनपावर को लेकर स्टेट के पदाधिकारियों को पत्राचार किया गया है।

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