आदेश की समीक्षा:राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन अभियान निदेशक का आदेश अव्यवहारिक, अप्रासंगिक

रामगढ़17 दिन पहले
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अभियान निदेशक ,राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ,नामकुम, रांची के कार्यालय आदेश पत्रांक 2571(MD) दिनांक 01:09 :2021 के द्वारा 34 नियमित स्थाई चिकित्सकों को अपने पदस्थापित स्थल के अतिरिक्त प्रतिनियुक्त किया गया है । इस कार्यालय आदेश की समीक्षा के लिए पूर्व में एक बैठक झासा के राज्य सचिव डॉ विमलेश सिंह की अध्यक्षता में की गई थी।

जिसमे उपस्थित सभी सदस्यों ने सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया की इस कार्यालय आदेश का विरोध होना चाहिए और रद्द करने की मांग की जानी चाहिए। इस संबंध में झासा के राज्य समन्वयक डॉ ठाकुर मृत्युंजय कुमार सिंह एवं डॉ पीपी शाह ने संयुक्त रूप से प्रेस रिलीज जारी किया।

जिसमे बताया है कि इसी उद्देश्य से झासा का एक प्रतिनिधिमंडल 12 सितंबर को माननीय स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता जी से मुलाकात की और मंत्री ने प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों के सामने ही अपने मोबाइल से अभियान निदेशक से बातचीत की उन्हें बताया कि यह आदेश न्यायोचित नहीं है।

इस पर जल्दी संज्ञान ले और इसे रद्द करें। इसके विपरीत अभियान निदेशक ने कार्यालय आदेश 2792(MD) दिनांक 21 :09;2021 के द्वारा सभी जिलों के सिविल सर्जन से प्रतिनियुक्त चिकित्सकों का अद्यतन रिपोर्ट मांगा है और नहीं उपलब्ध कराए जाने की स्थिति मे संबंधित सिविल सर्जन के द्वारा बरती गई लापरवाही एवं कार्य में शिथिलता मानते हुए उन पर अनुशासनात्मक करवाई के लिए विभाग को लिखा जाएगा, ऐसा आदेश दिया है।

इस पर झारखंड राज्य स्वास्थ्य सेवा संघ ने पुन: 03: 10 2021 को एक आपातकालीन मीटिंग बुलाई जिसमें सभी जिलों के प्रतिनिधि उपस्थित हुए और सभी ने सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया कि यह आदेश अव्यवहारिक, अप्रासंगिक है संघ इसका विरोध करती है और विभाग से यह आग्रह करती है की इसे अविलंब रद्द किया जाए। अन्यथा संघ आंदोलन के लिए बाध्य होगा और इसकी पूरी जिम्मेवारी विभाग की होगी। बैठक में कार्यालय आदेश की इन त्रुटियों को अंकित किया गया।

अभियान निदेशक नियमित स्थाई चिकित्सकों का प्रतिनियुक्ति नहीं कर सकते है। यह उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं है। इसमें अपर मुख्य सचिव ,स्वास्थ्य चिकित्सा शिक्षा एवं समाज कल्याण परिवार विभाग का अनुमोदन प्राप्त नहीं है । यह आदेश अव्यवहारिक है और अप्रासंगिक है। पदस्थापित एवं प्रतिनियुक्ति स्थल के बीच की दूरी जानने की कोशिश नहीं की गई है।

अधिकांश चिकित्सकों को प्रतिदिन 60 से 110 किलोमीटर का आवागमन करना होगा ,जिसमें 3 से 4 घंटे यूं ही व्यर्थ निकल जाएंगे। ना आवास की व्यवस्था की गई और ना आवागमन की व्यवस्था की गई। महिला चिकित्सक ,जिन्हें प्रतिनियुक्त किया गया है, उनकी सुरक्षा एवं महिला संबंधित मूलभूत आवश्यकताओं पर ध्यान नहीं दिया गया है।

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