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मांग:फैक्ट्री में नहीं दी जाती न्यूनतम मजदूरी प्रदूषण से जल, जंगल, जमीन हो रहे बर्बाद

सिरकाएक महीने पहले
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  • झारखंड इस्पात में प्रदूषण जांच करने पहुंची टीम की गाड़ी महिलाओं ने रोकी, बोलीं

अरगड्डा बिरसा चौक के समीप प्रदूषण और न्यूनतम मजदूरी के मांग आंदोलनकारी अभय कुमार सहानी के आवाज उठाने के बाद गुरुवार दिन लगभग 12 बजे रामगढ़ सीओ भोला शंकर महतो की अगुवाई में प्रदूषण जांच टीम झारखंड इस्पात फैक्ट्री हेसला के प्रांगण पहुंची। इससे दो घंटे पूर्व फैक्ट्री को पूरी तरह प्रबंधन ने बंद कर दिया। कोयला स्पंच के गर्दो को उड़ने से बचाने के लिए पानी का छिड़काव भी शुरू कर दिया। सूचना के बाद हेसला, महुआटांड़, अरगड्डा नीचे धौड़ा, चेक पोस्ट और आसपास के ग्रामीण और मजदूर परिजन झारखंड इस्पात फैक्ट्री के गेट के समक्ष अपनी फरियाद लेकर खड़े रहे।

घंटों बाद प्रदूषण जांच टीम जैसे ही वाहनों में बैठकर फैक्ट्री से बाहर निकली। ग्रामीण दर्जनो महिलाओं ने प्रदूषण टीम के वाहनों को रोका। इसके बाद ग्रामीण महिलाओं ने अपने गांव हेसला, अरगड्डा में प्रचुर मात्रा में फैक्ट्री द्वारा धुआं, कोयला स्पंज के गर्त उड़ाकर प्रदूषण फैलाने की बात कहीं। साथ ही अपने घरवालों के काम के एवज में न्यूनतम मजदूरी की बात रखी गई। इस संबंध में ग्रामीण लीलावती देवी ने बताया कि हम लोगों के क्षेत्र में फैक्ट्री प्रदूषण से काफी गर्त फैली हुई है। जिससे हम लोगों का जीना मुहाल हो रहा है। घर के लोग कारखाना में काम करते हैं। लेकिन न्यूनतम मजदूरी और समय पर वेतन भी नहीं मिलता है। प्रतिदिन केवल 210 रुपए के हिसाब से दिए जाते हैं। ग्रामीणों ने रामगढ़ सीओ और प्रदूषण जांच टीम से अपने क्षेत्र में प्रदूषण से फैले जल, जंगल, जमीन को देखने का आग्रह किया। लेकिन उनकी बातें सुनकर ही जांच टीम के सदस्य रामगढ़ की ओर चले गए।

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