संविधान:आधुनिकता के युग में संविधान प्रस्तावना के शिलापट को भी रंका के लोग गए भूल

रंकाएक महीने पहले
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झाड़ियों में छुपी शिलालेख की तस्वीर। -तस्वीर सत्यनारायण मालाकार की। - Dainik Bhaskar
झाड़ियों में छुपी शिलालेख की तस्वीर। -तस्वीर सत्यनारायण मालाकार की।

आज की आधुनिकता के दौर में सभी लोग अपने पुराने धरोहरों एवं संस्कृतियों को भूलते चले जा रहे हैं। इसी का देन है कि रंका प्रखंड कार्यालय परिसर में भारतीय संविधान के प्रस्तावना का शिलालेख धीरे धीरे झाड़ियों में छिपता चला जा रहा है । यहां बता दें कि सन 1950 में देश में संविधान लागू होने के बाद संविधान का प्रस्तावना का शिलालेख सभी प्रखंड सह अंचल कार्यालय परिसर में लगाए गए थे। जिसके तहत कार्यालय में समय-समय पर संविधान के प्रस्तावना को कार्यालय में दोहराया जाता था वही सरकारी कार्यालय तथा विद्यालयों में सबसे पहले संविधान की प्रस्तावना को पढ़ने का रिवाज था लेकिन आज के आधुनिकता की वजह से हम लोग संविधान के प्रस्तावना को भूलते चले जा रहे हैं।

यही कारण है कि रंका प्रखंड कार्यालय परिसर में लगाया गया संविधान के प्रस्तावना का शिलालेख धीरे धीरे झाड़ियों में तब्दील होता चला जा रहा है। यह एक बहुत बड़ी लापरवाही है जिस पर आला अधिकारियों की नजर होना जरूरी है अन्यथा हम अपने संविधान एवं संस्कृतियों से धीरे-धीरे दूर होते चले जाएंगे।

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