कार्यक्रम:रंका अनुमंडल क्षेत्र के विभिन्न पूजा पंडालों में नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप शैलपुत्री की पूजा की गयी

रंका16 दिन पहले
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रंका अनुमंडल क्षेत्र के विभिन्न पूजा पंडालों में नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप शैलपुत्री की पूजा की गयी सफेद वस्त्र धारण किए मां शैलपुत्री के दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल शोभायमान है। मां के माथे पर चंद्रमा सुशोभित है। यह नंदी बैल पर सवार संपूर्ण हिमालय पर विराजमान हैं। शैलपुत्री मां को वृषोरूढ़ा और उमा के नामों से भी जाना जाता है।

मान्यता है की मां शैलपुत्री का जन्म पर्वत राज हिमालय के घर में हुआ था, जिसके कारण उनका नाम शैलपुत्री पड़ा। देवी के इस रूप को करुणा और स्नेह का प्रतीक माना गया है। घोर तपस्या करने वाली मां शैलपुत्री सभी जीव-जंतुओं की रक्षक मानी जाती हैं।पूजा समितियों के द्वारा नवरात्रि के पहले दिन प्रात:काल से ही क्रियाशील दिखे ।उधर कांडी अंतर्गत हरिहरपूर मंडल भाजपा के लोग श्रीनगर गांव में दुर्गा पूजा की जलयात्रा कार्यक्रम में पूजा समिति के लोगों के साथ शामिल हुए।

कार्यक्रम में शामिल भाजपा मंडल अध्यक्ष बिनोद बिहारी द्विवेदी ने कहा कि शक्ति की आराधना से बल, बुद्धि, विवेक, ऐश्वर्य एवं दुष्टों से लड़ने की शक्ति की प्राप्ति होती है। भक्ति करने से व्यक्ति में सुपर पावर के प्रति आस्था मजबूत होती है।

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