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आंदोलन पर डटे:5 वर्षों से नहीं बढ़ा मानदेय, एक माह से आंदोलन; पर उनका हक नहीं मिल रहा

सिमडेगाएक महीने पहले
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  • कोरोना काल में फ्रंटलाइन वर्कर बन अहम भूमिका निभा रहे हैं एमपीडब्ल्यू

स्वास्थय विभाग के अधीन अनुबंध पर बहाल हुए एमपीडब्ल्यू वर्कर पिछले 37 दिनों से शांतिपूर्ण ढंग से आंदोलन पर डटे हुए हैं। उन्होंने इस दौरान सभी विभागीय कार्यों को पूरी ईमानदारी पूर्वक अपने कर्तव्यों का निर्वहन भी किया है। जिले को कोरोना से मुक्त करने में अपने तन मन से काम कर रखा है। आंदोलनरत कर्मचारियों का कहना है कि स्वास्थ विभाग ने वर्ष 2008 में पहली बार मल्टी पर्पज वर्कर(एमपीडब्ल्यू)के रूप में सेवा लेना शुरू किया था।

इसके बाद वर्ष 2016 में राज्य सरकार ने कैबिनेट से पद सृजित करते हुए उन्हें पुनः उसी पद पर बहाल किया गया। एमपीडब्ल्यू कर्मियों ने कहा कि उनकी बहाली तमाम नियमों का अनुपालन करते हुए की गई। विभाग द्वारा विशेष कार्य के लिए समय समय पर एमपीडब्ल्यू को अंतर जिला ट्रांसफर पोस्टिंग भी कर दिया जाता है। इसके बावजूद न तो आम कर्मचारियों की तरह तय ग्रेड पे के अनुसार वेतन मिल रहा है और न ही टीए -डीए या अन्य कोई पर्याप्त सुविधा मिल पाती है। कोरोना काल में सरकार एमपीडब्ल्यू वर्करों से फ्रंट लाइन वर्कर के रूप में सेवा ले रही है। लेकिन सरकार द्वारा वर्ष 2016 से न तो मानदेय में किसी तरह की कोई बढ़ोतरी की गई और न ही विभाग द्वारा स्थाई तौर पर समायोजित करने का प्रयास किया गया।

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