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लॉकडाउन का असर:सिसई के कई दुकानदारों के समक्ष भुखमरी की स्थिति, कहा, इंतहा हाे गई, अब राहत दें

सिसई4 महीने पहले
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  • दो माह लॉकडाउन होने से पूरी तरह ठप रहा व्यवसाय , अभी भी कई दुकान खुलने की सूची में नहीं

दो माह लॉक  डाउन होने से सैलून दुकान कपड़ा दुकान जुता चप्पल दुकान सिंगार दुकान और होटल व्यवसायी के समक्ष भुखमरी की स्थिति हो गई है।वही पिछले 2 माह से बंद कई दुकानें खुलने लगी है। उक्त दुकानदारों ने आस लगाये बैठे थे। लेकिन सूची मे नहीं रहने से मायूस हो गये। सैलून की दुकान  नहीं खुलने से सैलून दुकानदारों के समक्ष भुखमरी की स्थिति आ गई है। लाँक डाउन के पूर्व कमाए गये पैसे को खाने पीने मे खत्म  कर दिये। जीने  के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। दुकान नहीं खुलती है तो आर्थिक स्थिति और बिगड़ जाएगी इधर कपड़ा दुकानदार होटल कर्मी की भी स्थिति यथावत है ।रोजमर्रा की जिंदगी जीने वाले फुचका चाट, चनाचुर बेचने वालों का सब्र  टूटता जा रहा है अभी लाँक  खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है।31 मई  को भी लाँक डाउन समाप्त  होने स्थिति नहीं है। जिससे  दिन-ब-दिन आर्थिक स्थिति गिरते जा रहा है ।
जीने - खाने का एकमात्र सैलून दुकान है, कमाये थे, लॉकडाउन में खाने मे खत्म हो गया, अब कुछ नहीं बचा, कैसे घर चलेगा : महेश
महेश ठाकुर ने कहा  कि हम लोगों की 8 परिवार हैं जिसका जीने - खाने का एकमात्र सैलून दुकान है, कमाये थे।लाँक डाउन में खाने मे खत्म कर दिए। अब कुछ नहीं रहा। लाँक डाउन खुलने का नाम ले रहा है।  प्रवासी मजदूर आ रहे हैं डर तो लग रहा है लेकिन पापी पेट का सवाल है। सिसई मेन रोड निवासी राजकुमार ठाकुर ने कहा कि सैलून दुकान से हमारे 3 परिवार के 10 सदस्य हैं,जिसका भरण पोषण होता है। पिछले दो माह से लाँक डाउन होने के कारण दुकान बंद है। 2 महीना किसी तरह जीविकोपार्जन  कर रहे हैं । अब आर्थिक स्थिति जवाब देने लगा है। हम लोगों को इसके अलावे कोई रोजगार नहीं है।  किसी प्रकार रोजगार मिलने से आर्थिक स्थिति सबल हो सकता है। 

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