धरना प्रर्दशन:टंडवा में आंदोलनकारियों को कांग्रेस, आजसू के बाद भाकपा माले का भी मिला समर्थन

टंडवाएक महीने पहले
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संबोधित करते भाकपा माले के झारखंड प्रभारी। - Dainik Bhaskar
संबोधित करते भाकपा माले के झारखंड प्रभारी।

एनटीपीसी से तीन सूत्री मांगों को लेकर आंदोलित विस्थापित विकास संघर्ष समिति के समर्थन मे आजसू व कांग्रेस के सूची के बाद भाकपा माले भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। मंगलवार को भाकपा माले के झारखंड प्रभारी पीएन सिंह ने धरना स्थल पर पहुंच कर अपने संबोधन के जरिए मांगो के समर्थन उतरे आंदोलन कारियों के हौसले को क्रांतिकारी अभिनंदन के साथ जीत दिलाने का भरोसा दिलाया।

रैयतों के मांगो पर पत्रकारों के सवाल पर कहा कि मांग पुरी करने मे एनटीपीसी, स्थानीय सांसद विधायक के साथ साथ केंद्र सरकार को पुरी दोषीवार ठहराया। जबकि इस मुद्दे पर राज्य सरकार को भी दबी जुबान से दोषी ठहराया। उन्होंने कहा कि आगामी 16 दिसबंर से आयोजित विधान सभा सत्र मे भाकपा माले विधायक द्वारा सदन मे आवाज उठाने का भरोसा रैयतों को दिया। कहा कि आवश्यकता पड़ी तो टंडवा चतरा ही नही पलामु प्रमंडल से किसानों का जत्था विधान सभा के समक्ष धरना देकर कैविनेट के मंत्रियों एंव मुख्यमंत्री को ध्यानाकृष्ट कराया जाएगा।

उन्होंने कहा कि मुआवजा निधारण मे भेद भाव कि गई है। उन्होंने सवाल उठाया कि पड़ोसी जिले के बड़कागांव मे किसानों की जमीन का मुआवजा बीस लाख रुपये प्रति एकड़ भुगतान किया गया। तो एनटीपीसी मे 15 लाख रुपया कैसे हुई। कहा कि आवश्यकता पड़ी तो किसानों के हित में सरकार के विरुद्ध भी मोर्चा खोलने में भाकपा माले पीछे नहीं रहेगी । इससे पूर्व भाकपा माले के राम कुमार भार्गव,रामविलास सिंह ,सफदर इमाम आदि वक्ताओं ने सभा को संबोधित करते हुए आंदोलनकारियों की हौसले को सलाम किया।

धरना स्थल मे झारखंड सरकार के आने के बाद भी अब तक मांगे नहीं हुई पूरी : तीन सूत्री मांगो को लेकर आंदोलित रैयतों का धरना 331 दिन बीत गये। इस दौरान रैयतों के आंदोलन का समर्थन बड़े बड़े नेताओं का मिला। 11 जनवरी से शुरु हुई अनिश्चित कालिन के पहले दिन इंटक के राष्ट्रीय अध्यक्ष सह पूर्व मंत्री के एन त्रिपाठी तथा 7 फरवरी को आजसू के केंद्रीय प्रवक्ता देव शरण तथा 10 फरवरी को झारखंड सरकार के कृषि मंत्री बादल पत्रलेख जैसे हस्तियों ने दौरा कर आंदोलन को समर्थन किया था।

पिछले दस फरवरी को धरना स्थल पर आए झारखंड सरकार के कृषि मंत्री बादल पत्रलेख ने कहा था कि पहले आंदोलनकारी झारखंड सरकार को मांग पत्र देने जाते थे। पर आज की झारखंड सरकार आपके मांग पत्र को खुद आपसे लेने आई है। आज की सरकार आपकी सरकार है। धरना स्थल पर सरकार के आने के बाद भी 331 दिनो से धरना पर बैठे रैयतों को न्याय नही मिला। अब कांग्रेस आजसू के बाद भाकपा माले का समर्थन मिला है। जिससे रैयतों की उम्मीद एक बार फिर से जगी है

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