लापरवाही का मामला:मोतियाबिंद ऑपरेशन के बाद आंखों की रोशनी जाने के मामले में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने जांच शुरू की

साहिबगंज7 महीने पहले
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झारखंड सेवा सदन क्लीनिक में जांच करती टीम। - Dainik Bhaskar
झारखंड सेवा सदन क्लीनिक में जांच करती टीम।
  • झारखंड सेवा सदन डायग्नोस्टिक सेंटर में मिली कई अनियमितताएं, सेंटर ने लगभग 1 करोड़ रुपए की निकासी की

साहिबगंज जिले के बरहरवा स्थित मेन रोड में संचालित झारखंड सेवा सदन डायग्नोस्टिक सेंटर में मोतियाबिंद के ऑपरेशन में लगभग एक दर्जन लोगों के आंखों की रोशनी चिकित्सकों की लापरवाही से जाने के मामले में रविवार को स्वास्थ्य विभाग द्वारा गठित टीम ने जांच की। जिसमें बताया जा रहा है कि बहुत सारी अनियमितता पाई गई है।

दिसंबर 2020 से झारखंड सेवा सदन नामक हेल्थ क्लीनिक में लगभग 1200 लोगों का मोतियाबिंद ऑपरेशन अब तक किया गया है। सभी का भारत सरकार द्वारा जारी आयुष्मान भारत कार्ड के माध्यम से ऑपरेशन की राशि वसूली गई है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार औसतन एक मरीज का आयुष्मान भारत के अंतर्गत ऑपरेशन में 7000 से लेकर 10000 रुपए तक स्वास्थ्य विभाग के खाते से निकाली गई गई है।

जानकारों का कहना है कि लगभग 80 लाख से एक 1 करोड़ों रुपए झारखंड सेवा सदन नामक क्लीनिक ने मुख्यमंत्री आरोग्य योजना आयुष्मान भारत के तहत निकाले हैं। सिविल सर्जन डॉ. अरविंद सिंह ने इस संबंध में बताया कि उन्हें वास्तविक जानकारी नहीं है।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार लगभग 12 सौ मरीजों के मोतियाबिंद ऑपरेशन किए जाने की बात झारखंड सेवा सदन नमक क्लीनिक के द्वारा किए जाने का मामला सामने आ रहा है। रविवार को स्वास्थ्य विभाग की टीम ने झारखंड सेवा सदन‌ नर्सिंग होम एंड डायग्नोस्टिक सेंटर की जांच लगभग 4 घंटे तक की।

नर्सिंग होम के मैनेजर से 4 घंटे हुई पूछताछ मैं नर्सिंग होम के सारे दस्तावेज़ को खंगाला गया। स्वास्थ्य विभाग की 6 सदस्यीय जांच टीम जिला यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ थॉमस मुर्मू के नेतृत्व में बरहरवा स्थित झारखंड सेवा सदन‌ नर्सिंग होम एंड डायग्नोस्टिक सेंटर रविवार को पहुंची। जहां टीम ने नर्सिंग होम के मैनेजर सुमन सिंह से 4 घंटों तक लंबी पूछताछ की।

स्वास्थ्य मंत्री के निर्देश पर डीसी ने जांच शुरू की

ज्ञात हो कि मामले के खुलासे के बाद स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता के संज्ञान लेने पर डीसी रामनिवास यादव के निर्देशानुसार सिविल सर्जन ने उसी दिन रात में नर्सिंग होम का निरीक्षण किया। साथ ही शनिवार को जिला यक्ष्मा पदाधिकारी के नेतृत्व में 6 सदस्यीय जांच टीम का गठन कर टीम को 24 घन्टे में पूरे मामले की जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था।

जांच टीम के हेड जिला यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ. थॉमस मुर्मू ने बताया कि नर्सिंग होम के मैनेजर ने 5 ऐसे मरीजों की जानकारी दी है। जिन्होंने आंख की रोशनी गायब होने की शिकायत उनसे की है। अभी प्रारंभिक जांच हुई है जिसकी रिपोर्ट सिविल सर्जन को की जाएगी। जरूरत पड़ी तो दूसरी जांच भी की जाएगी।

10 दिसंबर से अब तक 1200 का किया ऑपरेशन

झारखंड सेवा सदन‌ नर्सिंग होम एंड डायग्नोस्टिक सेंटर 10 दिसंबर 2020 से शुरू हुआ है। बताया जा रहा है कि इस दौरान नर्सिंग होम में 1200 लोगों की आंखों का ऑपरेशन किया गया है। बताया जाता है कि एक मरीज से लगभग 7000 से 10000 रुपए तक की राशि की वसूली सरकार से की जाती है इस तरह से क्लीनिक खोलने से अब तक आयुष्मान भारत योजना से लगभग 80 लाख से 1 करोड़ रुपए तक की निकासी की जा चुकी है।

स्वास्थ्य विभाग द्वारा गठित टीम की सदस्य डॉक्टर सरिता टुडू ने बताया कि भारी पैमाने पर क्लीनिक के द्वारा हेराफेरी का मामला मामला सामने आया हैl जांच के बाद ही कुछ बताया जा सकता है। जांच रिपोर्ट के संबंध में सिविल सर्जन डॉ अरविंद कुमार सिंह ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की टीम ने रविवार को झारखंड सेवा सदन क्लीनिक का जांच किया है अभी रिपोर्ट नहीं मिला है।

सारे रिपोर्ट को तैयार कर सरकार को भेजा जाएगा उन्होंने बताया कि ऑपरेशन में गड़बड़ी की बात सामने आई है लेकिन अभी पूरी तरह से यह नहीं कहा जा सकता कि चिकित्सक की लापरवाही है या मरीजों की लापरवाही है। फिलहाल मरीजों की रोशनी जाने को लेकर यह माना जा रहा है कि ऑपरेशन में कहीं चूक हुई है पूरी जांच के बाद ही कुछ बताया जा सकता है। जांच टीम को जल्द से जल्द रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया है।

मरीजों के नाम जिनकी आंखों की रोशनी चली गई
मुख्तार शेख, माजीरा बीबी, हसन, राजकुमार बागती, सेना शेख, रोबी रजक, सहदेव मंडल, बताशसन बेवा, दिल्लू मियां की पत्नी गूलनार बीबी, देलरा बीबी, सावित्री बेवा, मरांग सोरेन, सुफल मरांडी, बादन हेंब्रम।

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