सार्वजनिक छुट्टी पर हाईकोर्ट सख्त:बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा-देश में बहुत अधिक सार्वजनिक छुट्टियां, उन्हें बढ़ाने के बजाय कम करने का समय आ गया

मुंबई15 दिन पहले
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न्यायमूर्ति गौतम पटेल और न्यायमूर्ति माधव जामदार की खंडपीठ ने किशनभाई घुटिया की याचिका को खारिज करते हुए कहा कि सार्वजनिक छुट्टी के लिए कोई कानूनी रूप से लागू करने योग्य मौलिक अधिकार नहीं है। - Dainik Bhaskar
न्यायमूर्ति गौतम पटेल और न्यायमूर्ति माधव जामदार की खंडपीठ ने किशनभाई घुटिया की याचिका को खारिज करते हुए कहा कि सार्वजनिक छुट्टी के लिए कोई कानूनी रूप से लागू करने योग्य मौलिक अधिकार नहीं है।

छुट्टियां भले ही आम लोगों को अच्छी लगती हैं, लेकिन बॉम्बे हाईकोर्ट को यह कुछ ज्यादा पसंद नहीं है। शुक्रवार को एक मामले की सुनवाई के दौरान बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि देश में बहुत अधिक सार्वजनिक छुट्टी हैं और उन्हें बढ़ाने के बजाय कम करने का समय आ गया है।

हाईकोर्ट, दादरा और नगर हवेली के रहने वाले एक शख्स की उस याचिका की सुनवाई कर रहा था, जिसमें उसने 2 अगस्त को सार्वजनिक छुट्टी देने की मांग उठाई थी। याचिकाकर्ता ने कहा था कि 2 अगस्त 1954 को केंद्र शासित प्रदेश में छुट्टी हुआ करती थी, क्योंकि इस दिन हमें पुर्तगाली शासन से मुक्त मिली थी। यह छुट्टी 2020 तक दी जाती रही, लेकिन 29 जुलाई 2021 से इसे बंद कर दिया गया।

न्यायमूर्ति गौतम पटेल और न्यायमूर्ति माधव जामदार की खंडपीठ ने किशनभाई घुटिया की याचिका को खारिज करते हुए कहा कि सार्वजनिक छुट्टी के लिए कोई कानूनी रूप से लागू करने योग्य मौलिक अधिकार नहीं है और किसी विशेष दिन को सार्वजनिक छुट्टी या वैकल्पिक अवकाश घोषित करना सरकार की नीति का मामला है।"

छुट्टी देने को लेकर याचिकाकर्ता का यह था तर्क
हाईकोर्ट में याचिकाकर्ता अधिवक्ताओं ने तर्क दिया कि यदि देश के स्वतंत्रता दिवस को चिह्नित करने के लिए 15 अगस्त को सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया था, तो ऐसा कोई कारण नहीं है कि 2 अगस्त को दादरा और नगर हवेली के लिए सार्वजनिक अवकाश घोषित नहीं किया जाना चाहिए।

2019 के एक फैसले के आधार पर मांगी छुट्टी
याचिकाकर्ता ने सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट की एक अन्य पीठ के 15 अप्रैल 2019 के आदेश का भी उल्लेख किया, जिसमें 'गुड फ्राइडे' को प्रतिबंधित (वैकल्पिक) छुट्टी के रूप में सूचीबद्ध किया गया था, लेकिन राजपत्रित छुट्टी नहीं थी। याचिकाकर्ता के वकील ने हाईकोर्ट में सवाल किया गया कि सरकार को गुड फ्राइडे को राजपत्रित अवकाश घोषित करने का निर्देश दिया था, क्योंकि केंद्र शासित प्रदेश की आबादी में ईसाई शामिल थे। हालांकि, तब सरकार ने तर्क दिया था कि चूंकि क्रिसमस और इसी तरह की छुट्टियों को व्यापक रूप से मनाया जाता है, इसने गुड फ्राइडे की छुट्टी को वैकल्पिक रखा।

याचिकाकर्ता के वकीलों की ओर से सवाल किया गया कि सरकार 15 अगस्त और 26 जनवरी को सार्वजनिक अवकाश के रूप में मना सकती है, लेकिन क्या वह दादर नागर हवेली के लोगों को 2 अगस्त का दिन (उनका मुक्ति / स्वतंत्रता दिवस) मनाने से रोकेगी?

अदालत ने याचिका खारिज करने के पीछे यह तर्क दिया
तमाम दलीलों को सुनने के बाद न्यायमूर्ति पटेल ने कहा, "यह आदेश वर्तमान मामले से अलग स्तर पर है। वह जनहित याचिका राजपत्र में विफलता के बारे में थी यानी इसे वैकल्पिक रखने के बजाय अनिवार्य, सार्वजनिक अवकाश बनाने के बारे में थी। किसी विशेष दिन को सार्वजनिक अवकाश या वैकल्पिक अवकाश घोषित करना या न करना सरकार की नीति का विषय है। ये कोई कानूनी रूप से लागू करने वाला अधिकार नहीं है, जिसे उल्लंघन कहा जा सकता है। किसी को भी सार्वजनिक अवकाश का मौलिक अधिकार नहीं है।"

देश में छुट्टी कम करने का समय आ गया है
देश में सार्वजनिक छुट्टियों की संख्या पर टिप्पणी करते हुए न्यायमूर्ति पटेल ने कहा, "वैसे भी इस देश में हमारे पास बहुत अधिक सार्वजनिक छुट्टियां हैं। शायद अब इसे बढ़ाने की जगह कम करने का समय आ गया है। हमें याचिका में कोई सार नहीं दिखता है। इसे खारिज कर दिया जाता है।"