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  • Here Eunuchs Are Transporting Rations, Masks And Sanitizers To The Homes Of The Needy; Help Reached More Than 80 Thousand People So Far

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मुंबई में मददगार बने ट्रांसजेंडर:कोरोना के बीच किन्नर जरूरतमंदों को राशन, मास्क और सैनिटाइजर बांट रहे; अब तक 80 हजार लोगों को मदद पहुंचाई

मुंबई6 दिन पहले
किन्नर मां संस्था के लोग मुंबई, पुणे, ठाणे, वसई और नालासोपारा जैसे इलाकों में मदद पहुंचा रहे हैं।

मुंबई में कोरोना के डरावने मंजर के बीच ट्रांसजेंडर लोगों की मदद के लिए आगे आ रहे हैं। यहां 'किन्नर मां संस्था' से जुड़े सदस्य मुंबई के अलग-अलग इलाकों में जाकर जरूरतमंद लोगों तक राशन पहुंचाने का काम कर रहे हैं।

किन्नर मां संस्था की अध्यक्ष सलमा खान बताती हैं कि कोरोना की दूसरी लहर आने के बाद वे अब तक 80 हजार से ज्यादा लोगों तक राशन पहुंचा चुकी हैं। संस्था से जुड़े लोग हर दिन एक हजार से ज्यादा राशन के पैकेट बांटते हैं। ये लोग लोगों को मास्क और सैनिटाइजर भी पहुंचा रहे हैं। साथ ही, पुलिस स्टेशन और बस स्टैंड पर भी मास्क और सैनिटाइजर बांट चुके हैं। संस्था से एक लाख से ज्यादा ट्रांसजेंडर जुड़े हुए हैं।

किन्नर मां संस्था से वर्तमान समय में 1 लाख से ज्यादा ट्रांसजेंडर जुड़े हुए हैं।
किन्नर मां संस्था से वर्तमान समय में 1 लाख से ज्यादा ट्रांसजेंडर जुड़े हुए हैं।
ट्रांसजेंडर लोगों को राशन के साथ मास्क और सैनिटाइजर भी देते हैं।
ट्रांसजेंडर लोगों को राशन के साथ मास्क और सैनिटाइजर भी देते हैं।

पहले सिर्फ ट्रांसजेंडर के लिए शुरू की थी यह मुहिम
सलमा ने बताया, 'यह काम सरकार का है, लेकिन हम कब तक सरकार के भरोसे बैठे रहेंगे। हम सभी को अपनी जिम्मेदारी उठानी चाहिए। इसलिए हम जरूरतमंदों तक खाना पहुंचाने का काम कर रहे हैं। हम मुंबई के साथ ठाणे, नालासोपारा, पालघर, पुणे और वसई में भी राशन पहुंचा चुके हैं। हमने सबसे पहले यहां के किन्नरों के लिए इस मुहिम को शुरू किया था, लेकिन बाद में हम आम लोगों की मदद भी करने लगे। हम ज्यादातर स्लम इलाकों में रहने वाले लोगों तक ही खाना पहुंचाते हैं।'

लोगों को सूखा राशन दिया जाता है, जिसमें दाल-चावल, आटा और नमक शामिल होता है।
लोगों को सूखा राशन दिया जाता है, जिसमें दाल-चावल, आटा और नमक शामिल होता है।

हम केवल मानव धर्म का पालन कर रहे हैं
उन्होंने कहा कि ट्रांसजेंडर लोगों को अभी तक समाज में अपना सही स्थान नहीं मिला है। कुछ लोग हमें घृणास्पद नजरों से देखते हैं। हम सभी बुनियादी मानव अधिकारों से वंचित हैं। लेकिन आज, हम उस सब की परवाह नहीं करते हैं। देश में महामारी है और हम केवल मानवता के धर्म का पालन कर रहे हैं। आज लोगों को मदद की जरूरत है और हम वो सब कर रहे हैं जो हमारे लिए संभव है।

किन्नर मां संस्था की तरफ से ज्यादातर स्लम इलाकों में रहने वालों तक राशन पहुंचाया जाता है।
किन्नर मां संस्था की तरफ से ज्यादातर स्लम इलाकों में रहने वालों तक राशन पहुंचाया जाता है।
शुरुआत में सिर्फ किन्नरों के घरों तक मदद पहुंचाई जाती थी, बाद में आम लोगों को भी शामिल किया गया।
शुरुआत में सिर्फ किन्नरों के घरों तक मदद पहुंचाई जाती थी, बाद में आम लोगों को भी शामिल किया गया।

हमारे पास शेल्टर होम होता तो उसे कोविड मरीजों के लिए खोल देते
सलमा बताती हैं कि, 'पिछले 10 साल से हम ट्रांसजेंडर लोगों के लिए शेल्टर होम की मांग कर रहे हैं, लेकिन किसी ने हमारी बात नहीं सुनी। अगर आज हमारे पास एक आश्रय होता, तो हम इसमें COVID केयर सेंटर खोलने की पेशकश कर सकते थे।'

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