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ट्रेंड बदला:कोरोनाकाल में बढ़ी कर्मचारियों की कंपनी के प्रति लॉयल्टी, दिसंबर तिमाही में आईटी में नौकरी छोड़ने की दर सबसे कम

मुंबईएक महीने पहले
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  • देश की प्रमुख आईटी कंपनियों के एचआर के आंकड़े कर रहे इस बात की पुष्टि

कोरोना महामारी के समय में कर्मचारियों की अपनी कंपनी के प्रति लॉयल्टी बढ़ी है। आईटी सेक्टर के कर्मचारियों में जल्दी-जल्दी नौकरी बदलने का ट्रेंड बदला है। अब वे जॉब सिक्योरिटी को ज्यादा तरजीह दे रहे हैं। देश की प्रमुख आईटी कंपनियों के एचआर के आंकड़ों से इस बात की पुष्टि कर रहे हैं।

31 दिसंबर 2020 को खत्म हुई चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में आईटी कंपनियों में नौकरी छोड़ने वाले कर्मचारियों की दर सबसे कम रही है। देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनी टीसीएस में नौकरी छोड़ने की दर अभी तक की सबसे कम रही। इसके बाद देश की तीसरी और चौथी बड़ी आईटी कंपनी एचसीएल टेक और विप्रो का क्रम रहा। इनमें कर्मचारियों के नौकरी छोड़ने की दर (एट्रिशन रेट) तीन साल में सबसे कम रही।

टीसीएस में सितंबर तिमाही में यह दर 8.9 फीसदी थी। दिसंबर तिमाही में घटकर 7.6 फीसदी रह गई। एचसीएल में यह दर 12.2 फीसदी से घटकर 10.2 फीसदी रह गई। विप्रो में यह 11 फीसदी पर स्थिर रही। वहीं, देश की दूसरी बड़ी आईटी कंपनी इन्फोसिस में कर्मचारियों के नौकरी छोड़कर जाने की दर सितंबर तिमाही के मुकाबले दिसंबर तिमाही में थोड़ी बढ़कर 10 फीसदी पर पहुंच गई।

इन्फोसिस के सीओओ प्रवीण राव का कहना है कि उनकी कंपनी में कर्मचारियों की स्वेच्छा से नौकरी छोड़ने की दर घटकर 10 फीसदी पर आ गई है। यह हमारे कंफर्ट बैंड 14-15 फीसदी से कम ही है। रिसर्चर फर्म एवरेस्ट ग्रुप के वाइस प्रेसिडेंट युगल जोशी कहते हैं, अनिश्चितता के इस दौर में कर्मचारी अपनी वर्तमान नौकरी या नियोक्ता को नहीं छोड़ना चाहते हैं।

साथ ही जैसे जैसे मांग बढ़ रही है, तो उन्हें नए प्रोजेक्ट में लगाया जा रहा है जिसकी वजह से वे अपनी नौकरी छोड़ना नहीं चाहते या छोड़ नहीं सकते हैं। हालांकि उनके टिके रहने के पीछे मुख्य वजह ये है कि चीजें अब बेहतर हो रही हैं।

रुझान आगे भी बना रहेगा या नहीं, 3 माह करना होगा इंतजार

स्टाफिंग सॉल्यूशन कंपनी एक्सफेनो के को-फाउंडर कमल कारंत कहते हैं, महामारी के कारण कंपनियों की भर्ती और नौकरी से हटाने के रुझान में बदलाव आया है। कर्मचारियों के स्वेच्छा से नौकरी छोड़ने की दर भी घटी है। लेकिन क्या यह रुझान आगे भी बना रहेगा, यह देखने के लिए हमें एक और तिमाही का इंतजार करना पड़ेगा, जब कंपनियां अपनी पूरी क्षमता से काम करना शुरू कर देंगी। नई भर्तियों में कंपनियां फ्रेशर्स और छोटी कंपनियों के लोगों को तरजीह देती हैं।

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