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मुंबई में कोरोना पर ग्राउंड रिपोर्ट:सड़कों पर घूम रहे पॉजिटिव मरीज, ऑक्सीजन बेड हुए फुल; कोविड सेंटर के बाहर परिजन लगा रहे झाड़ू

मुंबई24 दिन पहलेलेखक: विनोद यादव
दहिसर स्थित कोविड सेंटर के बाहर एंबुलेंस में लेटे इस मरीज को अस्पताल में बेड खाली होने का इंतजार है।

मुंबई में कोरोना संक्रमण के चलते अस्पतालों में ज्यादातर बेड फुल हैं। मरीज इंतजार में हैं कि अस्पतालों के दरवाजे खुले तो इंजेक्शन और ऑक्सीजन जैसी चीजें मुहैया हो सकें। कोरोना की स्थिति क्या है, मरीजों का क्या हाल है, अस्पतालों और इलाज की क्या व्यवस्था है। भास्कर ने मुंबई के हालात जाने, आप भी पढ़िए...

मलाड के रहने वाले 84 साल के मुरलीधर खत्री कोरोना पॉजिटिव हैं। एंबुलेंस उन्हें दहिसर चेकनाके कोविड सेंटर लेकर पहुंची तो पता चला बेड खाली नहीं है। खत्री के भाई कहते हैं रविवार रात से फोन कर-करके पूरा परिवार थक गया है।

मुरलीधर के साथ आए उनके भाई और दामाद कोविड सेंटर के अधिकारियों से पूछते हैं कि अब मैं उन्हें भर्ती कराएं? हम भी उनके संपर्क में हैं, हम कहां जाएं? मैं कौन सी हेल्पलाइन पर मदद के लिए कॉल करें? कल रात से कॉल कर कर के हमारे परिवार के लोग पूरी तरह से थक गए हैं।

एक कोविड सेंटर में बेड नहीं मिलने के बाद ऑटो में इंतजार करती महिला।
एक कोविड सेंटर में बेड नहीं मिलने के बाद ऑटो में इंतजार करती महिला।

भास्कर की टीम दहिसर चेकनाका के कोविड सेंटर पहुंची तो देखा कि जिस जिस गेट से मरीज भीतर जाते हैं, वहां कुर्सी पर ऑक्सीजन लगाए पॉजिटिव महिला बैठी थी। यहां सेंटर के बाहर 64 साल के हार्ट पेशेंट गौरीशंकर भट्‌ट की बेटी मिलीं। उन्होंने बताया- हम चार निजी अस्पतालों में गए, लेकिन जगह नहीं मिली। अब कोविड सेंटर के कर्मचारी कह रहे हैं कि बाहर बेड की व्यवस्था कर लो।

मीरा रोड के उमेश संक्रमित हैं और रिपोर्ट लेने दहिसर कोविड सेंटर आए हैं। उमेश ने बताया कि 5 दिन से भाई चक्कर लगा रहा है, रिपोर्ट नहीं मिली। मीरा रोड के ही संतोष घाडीगांवकर की सास इंदुवती 75 साल की हैं। उन्हें डॉक्टरों ने ऑक्सीजन की जरूरत बताई है, लेकिन बेड नहीं मिला। संतोष उन्हें ऑटो से दहिसर सेंटर लेकर आए, लेकिन कर्मचारियों ने हाथ खड़े कर दिए।

मरीजों की खातिर रुके परिजनों को बुनियादी सुविधाएं नहीं

BKC के जंबो कोविड सेंटर के अंदर मरीजों को इलाज से कोई शिकायत नहीं थी, लेकिन उनके परिजन परेशान दिखे। उनके रुकने के लिए जो जगह दी गई थी, वहां बुनियादी सुविधाएं भी नहीं। जोगेश्वरी की रहने वाली जरीना चूनावाला के बेटे जुबेर कोविड सेंटर के बाहर लगे एक तंबू में झाड़ू लगाते दिखे। पूछने पर बताया गया कि BKC के कोविड सेंटर में परिजनों को ठीक ढंग मरीज के बारे में जानकारी नहीं दी जाती।

मरीजों के परिजनों के रुकने की जहां व्यवस्था की गई है, वहां साफ-सफाई भी उन्हीं लोगों को करनी पड़ रही है।
मरीजों के परिजनों के रुकने की जहां व्यवस्था की गई है, वहां साफ-सफाई भी उन्हीं लोगों को करनी पड़ रही है।

जहां पेशेंट के घर के लोगों को इंतजार करने और रुकने की अस्थायी व्यवस्था की गई है, वहां साफ-सफाई और सैनिटाइजेशन की कोई व्यवस्था नहीं दिखती। यहां के टॉयलेट बदबू मार रहे हैं। कचरे का डिब्बा भर गया है, तो कोई उसे साफ करने तक नहीं आ रहा है। पानी की भी समुचित व्यवस्था नहीं है।

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