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मुंबई के 87% लोगों में कोरोना एंटीबॉडी बनी:85% पुरुष और 88% महिलाओं में रोग प्रतिरोधक क्षमता डेवलप हुई, पांचवें सीरो सर्वे ने पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़े

मुंबईएक महीने पहले
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यह सीरो सर्वे सायन अस्पताल, एटीआई चंद्रा फाउंडेशन और IDFC इंस्टीट्यूट ने मिलकर किया था। -फाइल फोटो - Dainik Bhaskar
यह सीरो सर्वे सायन अस्पताल, एटीआई चंद्रा फाउंडेशन और IDFC इंस्टीट्यूट ने मिलकर किया था। -फाइल फोटो

मुंबई के 86.64% लोगों में कोरोना संक्रमण के खिलाफ लड़ाई लड़ने वाली एंटीबॉडी मिली हैं। इस आबादी में 85.07% पुरुष और 88.29% महिलाएं शामिल हैं। यह जानकारी सायन अस्पताल, ATI चंद्रा फाउंडेशन और IDFC इंस्टीट्यूट के सीरो सर्वे में सामने आई है। मुंबई में हुआ यह पांचवां सीरो सर्वे है। इसमें पिछले चारों सीरो सर्वे के रिकॉर्ड टूट गए हैं।

मुंबई महानगरपालिका के आयुक्त इकबाल सिंह चहल ने एंटीबॉडी वाली आबादी बढ़ने पर खुशी जाहिर की, लेकिन उन्होंने नियमों की सख्ती से पालन करने की हिदायत भी दी। चहल ने बताया कि पांचवें सीरो सर्वे में शामिल 65% नागरिकों ने कोरोना वैक्सीन ली हुई थी। 35% लोगों ने एक भी डोज नहीं लिया था। इनमें से वैक्सीन ले चुके 90.26% लोगों में एंटीबॉडी मिली हैं। टीका न लगवाने वाले 79.86% लोगों में भी एंटीबॉडी मिली हैं। इसके अलावा, 87.14% हेल्थ वर्कर्स में एंटीबॉडी मिली हैं। सर्वे 8,674 लोगों पर 12 अगस्त से 8 सितंबर 2021 के बीच किया गया था।

एंटीबॉडी सुरक्षा की गारंटी नहीं: ‌BMC
पांचवें सीरो सर्वे की रिपोर्ट जारी करने के साथ ही प्रशासन ने अलर्ट भी जारी किया है। BMC ने कहा है कि एंटीबॉडी कितने फीसदी सुरक्षा प्रदान करती है, इसकी गारंटी नहीं दी जा सकती। सर्वे में सामने आया है कि स्लम में रहने वाले 87.02% और नॉन स्लम में रहने वाले 86.22% लोगों में एंटीबॉडी मिली हैं।

मुंबई में कब-कब हुआ सीरो सर्वे

  • पहला: जुलाई 2020
  • दूसरा: अगस्त 2020
  • तीसरा: मार्च 2021
  • चौथा : अप्रैल 2021

चौथे सीरो सर्वे में 50% बच्चों में मिली थी एंटीबॉडी
जुलाई 2020 में हुए पहले सीरो सर्वे में स्लम में रहने वाले 16% लोग कोरोना संक्रमित मिले थे। अगस्त 2020 में दूसरा सर्वे हुआ। इसमें तादाद बढ़कर 18% हो गई थी। मार्च 2021 में हुए तीसरे सर्वे में आंकड़ा 28.5% हो गया था।

चौथे सीरो सर्वे में करीब 50% बच्चों में एंटीबॉडी मिली थी। तीसरे सीरो सर्वे से साबित हो गया था कि मुंबई के स्लम में पहले हुए 2 सर्वे के मुकाबले कम लोग कोरोना संक्रमित हो रहे हैं। जबकि नॉन स्लम इलाके में लोगों के शरीर में एंटीबॉडी बनने का प्रतिशत बढ़ा था।

सीरो सर्वे का मकसद
सीरो सर्वे के जरिए यह पता लगाया जाता है कि किसी इलाके में कोरोनावायरस का संक्रमण कितना फैला है और पूरी आबादी का कितना बड़ा हिस्सा कोरोना से संक्रमित है और कितने लोगों के अंदर इस वायरस से लड़ने के लिए इम्यूनिटी यानी रोग प्रतिरोधक क्षमता बन चुकी है और कितने शरीर में एंटीबॉडी पैदा हो चुकी हैं।

रिपोर्ट तैयार होने की प्रक्रिया
सीरो सर्वे करने वाली टीम पहले लोगों के ब्लड सैंपल एकत्रित करती है। फिर 30 मिनट में आने वाले सैंपल के परिणाम से पता किया जाता है कि जिस व्यक्ति का ब्लड सैंपल लिया गया है उसके अंदर वायरस से लड़ने के लिए इम्यूनिटी विकसित हुई है या नहीं। विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर कोई व्यक्ति कोरोना संक्रमित होता है, लेकिन उसमें लक्षण नहीं दिखते। तो ये माना जाता है कि ऐसे लोगों में 5-7 दिन के अंदर अपने आप एंटीबॉडी बनना शुरू हो गई होगी।

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