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ऑक्सीजन रोकने से हुई 24 मरीजों की मौत:21 दिन पहले लगे टैंक में हुए लीकेज पर उठे सवाल, अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या के प्रयास का केस दर्ज; बॉम्बे हाईकोर्ट ने राज्य से मांगा जवाब

नासिक2 वर्ष पहले
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इस हादसे के बाद से हॉस्पिटल के अंदर और बहार भारी संख्या में पुलिसबल तैनात हैं। - Dainik Bhaskar
इस हादसे के बाद से हॉस्पिटल के अंदर और बहार भारी संख्या में पुलिसबल तैनात हैं।

बुधवार को नासिक के डॉ जाकिर हुसैन अस्पताल में ऑक्सीजन टैंकर में हुई लीकेज के बाद 24 मरीजों की मौत हो गई थी, जिसके बाद गुरुवार को जिलाधिकारी के निर्देश पर अज्ञात लोगों के खिलाफ गैर इरादतन हत्या (IPC की धारा 304) का केस दर्ज किया गया है। इस घटना की जांच के लिए 7 सदस्यीय उच्च स्तरीय जांच समिति गठित की गई है। टीम ने आज हॉस्पिटल पहुंच मामले में जांच शुरू कर दी है। इसी मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। अदालत ने घटना के पीछे की वजह की डिटेल रिपोर्ट पेश करने को कहा है।

यह समिति दुर्घटना की पूरी जांच करके जो रिपोर्ट देगी उसके आधार पर दोषियों पर कार्रवाई होगी और ऐसी दुर्घटना दोबारा ना हो इसके लिए यह समिति जो रिपोर्ट देगी उसे SOP के तौर पर सभी अस्पतालों में लागू किया जाएगा। विभागीय आयुक्त राधाकृष्ण गमे की अध्यक्षता में यह जांच समिति नियुक्त की गई है। इसमें एक मेडिकल ऑफिसर, एक इंजीनियरिंग कॉलेज के प्राचार्य, महापालिका के इंजीनियर और ऑक्सीजन प्लांट का निर्माण करने वाले लोग शामिल हैं।

राज्य के 4 मंत्रियों ने अब तक किया हॉस्पिटल का दौरा
इससे पहले हादसे को लेकर बुधवार को स्वास्थ्य राजेश टोपे, खाद्य और नागरिक आपूर्ति मंत्री छगन भुजबल, राजस्व मंत्री बाला साहेब थोराट, औषधि प्रशासन मंत्री राजेंद्र शिंगणे ने अस्पताल का दौरा किया था। डॉ जाकिर हुसैन अस्पताल नासिक नगर निगम के अंदर आने वाला सबसे बड़ा हॉस्पिटल है। फिलहाल यहां सिर्फ कोविड मरीजों का इलाज जारी है। जिस दौरान यह घटना हुई हस्पिटल में 170 से ज्यादा मरीज ऑक्सीजन सपोर्ट पर थे।

इसी ऑक्सीजन टैंक में हुआ था लीकेज।
इसी ऑक्सीजन टैंक में हुआ था लीकेज।

सरकार ने घटना की पुनरावृत्ति रोकने के लिए शुरू किया प्रयास

  • स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने कहा कि इस घटना से सबक लेते हुए राज्य सरकार अब सभी अस्पतालों को ऑक्सीजन लिक्विड टैंक में कितना ऑक्सीजन है, कितना प्रेशर है, इन सब बातों का सही रिकॉर्ड रखने की हिदायत देने जा रही है।
  • टैंक के आसपास 24 घंटे सिक्यूरिटी गार्ड की तैनाती की जाएगी।
  • ऑक्सीजन टैंक और सिलेंडरों के मेंटेनेंस के लिए भी मेंटेनेस मैनेजर को रखा जाएगा।
  • रिपोर्ट में जो फाइंडिंग्स होंगी उससे SOP तैयार कर उसे पूरे राज्य में लागू किया जाएगा।

21 दिनों में कैसे टूट गई ऑक्सीजन की पाइप?
इस हादसे को लेकर एक नई जानकारी यह सामने आ रही है कि शहर के बिटको अस्पताल, मविप्र मेडिकल कॉलेज और डॉ. जाकिर हुसेन अस्पताल में ऑक्सीजन टैंक स्थापित करने का काम पुणे की 'टायो निप्पॉन सन्सो' नाम की जापानी कंपनी ने 21 दिन पहले ही पूरा किया था। ऑक्सीजन प्लांट के देखरेख और मरम्मत की जिम्मेदारी भी इसी कंपनी पर थी, लेकिन घटना वाले दिन कंपनी का कोई भी कर्मचारी वहां उपस्थित नहीं था। नगर निगम के मुख्य दमकल अधिकारी संजय बैरागी ने खुद रेड कैप के नीचे का वाल्व बंद किया था। अब सवाल यह उठ रहे हैं कि कैसे सिर्फ 21 दिन में पाइप लाइन में खराबी आ गई और उसमें लीकेज हो गया।

स्टैंडिंग कमेटी ने के आदेश को दरकिनार किया गया
सबसे खास यह है कि नगर निगम की स्टैंडिंग कमिटी ने इस प्लांट का काम नगर निगम द्वारा करवाने का आदेश दिया था। सूत्रों के मुताबिक, एक बड़े अधिकारी के दबाव में यह ठेका पुणे में स्थित इस जापानी कंपनी को दिया गया। इस हादसे के बाद स्टैंडिंग कमेटी के सभापति गणेश गिते ने इससे जुड़े ठेकेदार के साथ नगर निगम के अधिकारियों की भी जांच की मांग की है।

कैसे हुई यह दुर्घटना?
बुधवार को दिन के साढ़े बारह बजे नासिक के जाकिर हुसैन अस्पताल में ऑक्सीजन के टैंकर से ऑक्सीजन के टैंक में ऑक्सजीन की रिफिलिंग की जा रही थी तब टैंकर में लगे वॉल्व एयर पाइपलाइन से लिकेज शुरू हुआ। इसके बाद इसे ठीक करने के लिए आधे घंटे तक ऑक्सीजन की सप्लाई को रोकना पड़ा। इससे वेंटिलेटर पर मरीजों को ऑक्सीजन नहीं मिल पाया और इसके अभाव में 24 मरीजों की मौत हो गई। इनमें से 12 पुरुष और 12 महिला हैं। यह 13 हजार लीटर का स्टोरेज वाला टैंक था। लिकेज की वजह से इससे बहुत सारा ऑक्सीजन निकल गया।

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