एंटीलिया विस्फोटक केस:NIA को शक- मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह भारत छोड़कर भागे, यूरोप के किसी देश में छिपने की आशंका

मुंबई4 महीने पहले
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उद्योगपति मुकेश अंबानी के घर ‘एंटीलिया’ के बाहर से मिली विस्फोटकों से भरी स्कॉर्पियो और उसके मालिक मनसुख हिरेन की हत्या मामले की जांच कर रही केंद्रीय जांच एजेंसी (NIA) को शक है कि मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह देश से फरार हो चुके हैं। NIA ने उन्हें कई बार पूछताछ के लिए समन भेजा लेकिन उनकी ओर से इसे रिसीव नहीं किया गया है।

जांच एजेंसी का मानना है कि हो सकता है परमबीर गिरफ्तारी के डर से देश छोड़ चुके हैं। इस मामले पर राज्य के गृहमंत्री दिलीप वालसे पाटिल ने कहा है कि जांचकर्ताओं को संदेह है कि पूर्व पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह नतीजों के डर से देश छोड़कर भाग गए और हम उनकी तलाश कर रहे हैं। हम उन्हें खोजने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय के साथ काम कर रहे हैं। उनके मिलने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

गृहमंत्री पर लगाया था 100 करोड़ की वसूली का आरोप
इस मामले के मुख्य आरोपी सचिन वझे की गिरफ्तारी के बाद NIA ने परमबीर सिंह का बयान दर्ज किया था। उस दौरान यह बातें सामने आई थी कि सचिन वझे परमबीर को सीधे रिपोर्ट करते थे और उनके कहने पर ही एंटीलिया मामले की जांच वझे को सौंपी गई थी। इस मामले में संदिग्ध भूमिका मिलने के बाद राज्य सरकार ने परमबीर सिंह का तबादला होमगार्ड डीजी के पद पर कर दिया था।

हालांकि, इस ट्रांसफर के बाद परमबीर सिंह ने तत्कालीन गृहमंत्री अनिल देशमुख पर 100 करोड़ की वसूली का आरोप लगाकर कई बड़े खुलासे किए थे। जिसके बाद अनिल देशमुख को अपने पद से इस्तीफा भी देना पड़ा था और परमबीर के आरोपों की जांच के लिए राज्य सरकार को SIT गठित करनी पड़ी थी।

10 हजार पन्ने की 4 सीट में परमबीर की भूमिका संदिग्ध
आपको बता दें कि एंटीलिया मामले में NIA की ओर से 10000 पन्नों की एक चार्जशीट दायर की गई है इस चार्जशीट में कई ऐसे सबूत हैं जो यह साबित करते हैं कि सचिन वझे की कारस्तानी की पूरी जानकारी परमबीर सिंह को थी। इसी बात की पुष्टि के लिए NIA उनसे फिर से पूछताछ करना चाहती है। दो बार समन भेजने के बावजूद यह डिलीवर नहीं हुआ है।

परमबीर के यूरोप में छिपे होने की संभावना
NIA की टीम छत्तीसगढ़, रोहतक सहित और कुछ जगहों पर गई, पर कहीं भी सिंह नहीं मिले। सूत्रों के मुताबिक, एजेंसी को शक है की परमबीर देश छोड़कर कहीं बाहर चले गए हैं और यूरोपियन देश में छिपे हुए हैं। हालांकि, इसका सबूत अब तक किसी एजेंसी को नहीं मिला है।

इस वजह से एनआईए की रडार पर है परमबीर सिंह

  • एनआईए की चार्जशीट पर एक साइबर एक्सपर्ट ने अपने जवाब दाखिल करने के दौरान बताया कि एंटीलिया के पास से जो जिलेटिन स्टिक्स स्कॉर्पियो में मिली थी, उसके बाद एक टेलीग्राम चैनल पर धमकी आई थी, जिस पर जैश उल हिंद लिखा था। ये कहां से आया था, इसकी रिपोर्ट को मोडिफाई करने के लिए परमबीर सिंह ने उसे 5 लाख रुपए दिए थे।
  • इसके अलावा एनआईए ने बताया की जांच के दौरान उन्हें एक फेसटाइम आईडी मिली, जिसका इस्तेमाल एंटीलिया कांड और मनसुख हत्या मामले में गिरफ्तार आरोपियों और संदिग्धों से सीक्रेट संपर्क स्थापित करने के लिए किया गया था।
  • एएनआई ने एपल से इस आईडी के बारे में पूछा तो पता चला कि इसका फर्स्ट नेम कुरकुरे और लास्ट नेम बालाजी था। वहीं जब एनआईए ने वझे के करीबी का बयान दर्ज किया तो उसने बताया की परमबीर को आइफोन लेना था और तब उन्होंने आइफोन में फेसटाइम का फस्ट नेम कुरकुरे और लास्ट नेम बालाजी रखा था। इसके अलावा एनआईए को एक और फ़ेसटाइम आईडी की जानकारी का इंतजार है, जिसका इस्तेमाल इसी तरह के सीक्रेट कम्यूनिकेशन के लिए किया गया था।

परमबीर के खिलाफ दर्ज हैं 5 केस NIA के अलावा स्टेट CID और ठाणे पुलिस ने परमबीर के खिलाफ लुक आउट सर्कुलर जारी किया है। परमबीर सिंह के खिला अब तक 5 मामले दर्ज हैं, जिसमें से एक की जांच मुंबई, एक की ठाणे और तीन मामलों की जांच स्टेट CID कर रही है। परमबीर राज्य सरकार द्वारा गठित चांदीवाल कमीशन के सामने भी पूछताछ के लिए हाजिर नहीं हुए हैं। उनकी ओर से भी परमबीर के खिलाफ जमानती वारंट जारी किया गया है।

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