बुली बाई ऐप केस के भोपाल से जुड़े तार:दिल्ली पुलिस ने असम से युवक को अरेस्ट किया; VIT भोपाल का इंजीनियरिंग स्टूडेंट था, यूनिवर्सिटी ने किया सस्पेंड

मुंबई4 महीने पहले

विवादास्पद 'बुली बाई' ऐप मामले में गुरुवार को दिल्ली पुलिस को एक बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। दिल्ली पुलिस ने दावा किया है कि उन्होंने GitHub प्लेटफॉर्म पर bulli bai ऐप बनाने वाले 20 साल के इंजीनियरिंग स्टूडेंट को असम के जोरहाट से अरेस्ट कर लिया है। गिरफ्तार युवक की पहचान 21 वर्षीया नीरज विश्नोई के रूप में हुई है।

यह युवक भोपाल के वेल्लोर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (VIT) से कंप्यूटर साइंस में इंजीनियरिंग कर रहा है। दिल्ली पुलिस की इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटजिक ऑपरेशन यूनिट (IFSO) द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद VIT ने उसे सस्पेंड कर दिया है।

गुरुवार को ही दिल्ली पुलिस ने उसे स्थानीय कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे 10 जनवरी तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है। साथ ही पुलिस को कोर्ट ने बुली बाई ऐप मामले में उसके ठिकानों की तलाशी लेने की अनुमति भी दे दी है।

पुलिस नीरज को बुली बाई ऐप का मुख्य साजिशकर्ता बता रही है। इस ऐप पर मुस्लिम महिलाओं को निशाने पर लेकर उनकी बोली तक लगाई जा रही थी। इस मामले में उत्तराखंड की श्वेता सिंह, बेंगलुरु के विशाल झा और मयंक रावल को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है।

यही है आरोपी युवक नीरज, जो भोपाल के वेल्लोर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से कंप्यूटर साइंस में इंजीनियरिंग कर रहा है।
यही है आरोपी युवक नीरज, जो भोपाल के वेल्लोर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से कंप्यूटर साइंस में इंजीनियरिंग कर रहा है।

मुंबई पुलिस भी पकड़ने के लिए गई थी असम
जानकारी के मुताबिक, दिल्ली और मुंबई पुलिस दोनों इसे पकड़ने का प्रयास कर रही थीं, लेकिन मुंबई पुलिस के जोरहाट पहुंचने से एक घंटे पहले दिल्ली की टीम पहुंची और आरोपी को उठा ले गई। इसके बाद साइबर सेल के अधिकारियों ने दिल्ली पुलिस के ऑफिसर से इस संबंध में बात की है। दोनों टीमों ने एक-दूसरे को सहयोग करने का वादा किया है।

बहनों को नीरज के काम पर शक था
जानकारी के मुताबिक, विश्नोई के पिता असम में एक दुकान चलाते हैं। वह दो बहन के बाद सबसे छोटा है। पिता के मुताबिक, साल 2020 में उसने भोपाल में एडमिशन लिया था और लॉकडाउन के बाद वह घर चला आया था। उसके पास दिन भर अनजान नंबरों से फोन आया करते थे। पूरे दिन वह कंप्यूटर में घुसा रहता था और देर रात तक काम करता था। पिता ने बताया कि कुछ राजनीतिक पार्टी के लोग भी इससे मिलने आते थे। वो लोग कौन हैं, मैं उन्हें नहीं जानता। इसकी बहनों को इसके काम पर शक था। जब भी वो इससे पढ़ाई को लेकर पूछती तो झगड़ा करता था।

यूजर का दावा-गलत लोगों को पुलिस ने किया अरेस्ट
इससे पहले @giyu नाम के एक ट्विटर यूजर ने कहा था कि आपने गलत व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। जिन दो लोगों को गिरफ्तार किया है, उनका इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है। उन्हें जल्द से जल्द रिहा करें। उसने दावा किया था कि उसी ने इस ऐप को बनाया है। माना जा रहा है कि यह ट्वीट करने वाला शख्स विश्नोई ही है।

@giyu44 यूजर द्वारा सोशल मीडिया में किया गया पोस्ट।
@giyu44 यूजर द्वारा सोशल मीडिया में किया गया पोस्ट।

कोई फ्लाइट का टिकट दे तो मैं कर दूंगा सरेंडर
ट्वीट में आगे लिखा है, 'जब यह सब शुरू हुआ तो मुझे भी इस बारे में ज्यादा नहीं पता था कि इससे क्या हो सकता है। मैं अपने दोस्तों विशाल व श्वेता के अकाउंट का उपयोग करता हूं। उन्हें पता भी नहीं है कि मैं क्या करने जा रहा हूं। वे दोनों मेरी वजह से गिरफ्तार हुए हैं। अब वे मुझे गाली देने के लिए आजाद हैं। इसके आगे किए गए ट्वीट में यूजर ने कहा कि अगर कोई मेरी फ्लाइट का बंदोबस्त कर देता है तो मैं आकर आत्मसमर्पण कर दूंगा। उधर, मुंबई पुलिस के अधिकारियों का कहना है कि @giyu44 हैंडल से किए गए ट्वीट की सत्यता की पुष्टि की जा रही है।

तीन लोगों को किया गया है गिरफ्तार
बुली बाई एप मामले में पुलिस ने अब तक तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। इसमें से एक उत्तराखंड की रहने वाली 18 साल की श्वेता सिंह है। पुलिस का दावा है कि ऐप के पीछे मास्टरमाइंड यही लड़की है। इसके अलावा उसके 20 वर्षीय दोस्त मयंक रावत व 21 वर्षीय विशाल कुमार झा को गिरफ्तार किया गया है।

बहन ने भी लगाया श्वेता को फंसाने का आरोप
श्वेता की बहन मनीषा सिंह ने भी अपनी बहन को फंसाए जाने का आरोप लगाया है। मनीषा ने कहा कि उनकी बहन निर्दोष है और उसे एक ऐसे व्यक्ति ने फंसाया था जिससे वह ऑनलाइन मिली थी। श्वेता को पुलिस ने रुद्रपुर स्थित उसके घर से गिरफ्तार किया है। मनीषा ने कहा कि श्वेता वह एक सोशल मीडिया वेबसाइट पर एक गियू के संपर्क में आई। गियू नेपाल का रहने वाला है। उसका मूल नाम हिमांशु गोयल है। उसने श्वेता को धोखा दिया और इंटरनेट पर उसके नाम से इन भयानक कृत्यों को अंजाम दिया। उसने इसके लिए श्वेता की साख का इस्तेमाल किया।

'बीएचयू में पढ़ना चाहती थी'
बहन ने कहा कि श्वेता भारतीय सेना में नर्सिंग सेवाओं में शामिल होना चाहती थी, लेकिन एक नेत्र रोग का पता चलने के बाद उसे अपना सपना छोड़ना पड़ा। उसका इलाज दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में किया गया। बाद में, श्वेता बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से पुरातत्व में बीए करना चाहती थी, लेकिन कोरोना महामारी के चलते उसका यह सपना भी पूरा नहीं हो सका।

क्या है बुली बाई ऐप केस
बुली बाई ऐप के जरिए मुस्लिम समुदाय की महिलाओं की तस्वीरें लगाकर उनकी कथित तौर पर बोली लगाने का आरोप है। पुलिस ने आरोप लगाया है कि श्वेता ने एक अन्य आरोपी के साथ विवादास्पद ऐप को कंट्रोल करती थी। उसने ही ऐप का ट्विटर हैंडल भी बनाया था।

खबरें और भी हैं...