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100 करोड़ की रिश्वत का मामला:बॉम्बे हाईकोर्ट में CBI का आरोप- अनिल देशमुख के खिलाफ जांच में सहयोग नहीं कर रही महाराष्ट्र सरकार

मुंबई4 महीने पहले
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CBI अनिल देशमुख से 3 बार पूछताछ कर चुकी है। उनके 12 ठिकानों पर भी जांच एजेंसी ने रेड की थी। - Dainik Bhaskar
CBI अनिल देशमुख से 3 बार पूछताछ कर चुकी है। उनके 12 ठिकानों पर भी जांच एजेंसी ने रेड की थी।

सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टीगेशन (CBI) ने सोमवार को हाईकोर्ट को बताया कि महाराष्ट्र सरकार राज्य के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख के खिलाफ जांच में उनका सहयोग नहीं कर रही है। CBI, देशमुख के खिलाफ 100 करोड़ की रिश्वत के परमबीर सिंह के आरोप की जांच कर रही है। इस मामले में देशमुख से 3 बार पूछताछ भी हो चुकी है। कुछ महीने पहले CBI ने देशमुख के 12 ठिकानों पर छापा भी मारा था।

सोमवार को CBI की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि हाईकोर्ट के पिछले आदेश के बाद शुरू की गई जांच, "पूरे राज्य प्रशासन की सफाई करने" का मौका था, लेकिन महाराष्ट्र सरकार केंद्रीय एजेंसी के साथ सहयोग करने से इनकार कर रही है। न्यायमूर्ति एसएस शिंदे और न्यायमूर्ति एनजे जामदार की पीठ महाराष्ट्र सरकार की उस याचिका पर सुनवाई कर रही है, इसमें उनसे FIR से दो पैराग्राफ को हटाने का आग्रह किया था। इसी मामले में CBI आज अपना जवाब दाखिल कर रही थी।

राज्य सरकार के 'हस्तक्षेप' के आरोप को नकारा
मेहता ने राज्य सरकार द्वारा लगाए गए इन आरोपों से इनकार किया कि CBI जांच में पूर्व सहायक पुलिस निरीक्षक सचिन वझे की बहाली और मुंबई पुलिस अधिकारियों के ट्रांसफर और तैनाती में देशमुख के अनुचित हस्तक्षेप के मुद्दों को शामिल करके उच्च न्यायालय के आदेश से बाहर जा रही है।

तुषार मेहता ने राज्य के वकील, रफीक दादा द्वारा लगाए गए आरोपों का खंडन किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि CBI अवैध फोन टैपिंग और पुलिस तैनाती से संबंधित संवेदनशील दस्तावेजों को कथित तौर पर लीक करने के मामले में IPS अधिकारी रश्मि शुक्ला के खिलाफ जांच में पिछले दरवाजे से प्रवेश पाने के लिए देशमुख के खिलाफ चल रही तहकीकात का इस्तेमाल कर रही है।

जयश्री पाटिल की याचिका के बाद CBI के हाथ में गया था केस
हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस दीपांकर दत्ता की अगुवाई वाली पीठ ने अप्रैल में CBI को निर्देश दिया था कि वह मुंबई के एक पुलिस स्टेशन में वकील जयश्री पाटिल की ओर से दर्ज कराई गई एक क्रिमिनल कंप्लेंट के आधार पर देशमुख के खिलाफ जांच शुरू करे। अदालत के आदेश के बाद ही देशमुख ने मंत्री पद से इस्तीफा दिया था। पाटिल ने हाईकोर्ट में एक याचिका दायर कर उनकी ओर से दर्ज कराई गई शिकायत पर कार्रवाई की गुजारिश की थी।

जयश्री ने अपनी याचिका में देशमुख के खिलाफ सिंह द्वारा लगाए गए आरोपों का उल्लेख किया था और सिंह द्वारा महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को लिखे गए एक पत्र की एक प्रति भी संलग्न की है जिसमें मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त ने देशमुख के खिलाफ आरोप लगाए हैं।

वझे की बहाली का मुद्दा भी परमबीर के आरोप का हिस्सा
मेहता ने बॉम्बे हाईकोर्ट को बताया कि परमबीर सिंह का पत्र पाटिल की शिकायत का एक हिस्सा है, जिस पर CBI की जांच आधारित है। चूंकि पत्र में सचिन वझे की बहाली और तबादलों व तैनाती में देशमुख के हस्तक्षेप की बात की गई है, इसलिए CBI इन मुद्दों (जो राज्य सरकार प्राथमिकी में से हटवाना चाहती है) को देखने के दौरान उच्च न्यायालय के आदेश के अंतर्गत ही काम कर रही है। मेहता ने कहा, “वझे की बहाली और तबादलों व तैनाती के मुद्दे, अनिल देशमुख के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों से जुड़े हुए हैं।”

उन्होंने कहा, “अगर अवैध तैनाती और तबादलों का गिरोह मौजूद है, तो CBI को इसकी जांच करनी चाहिए। फिर राज्य सरकार कैसे कह सकती है कि इन हिस्सों को FIR से हटा दिया जाए?”

मेहता ने कहा, “वझे सिर्फ एक API (सहायक पुलिस निरीक्षक) था, लेकिन गृह मंत्री के आवास तक उसकी सीधी पहुंच थी। उसका अतीत संदेहपूर्ण था, फिर भी उसे 15 साल बाद (2020 में) बहाल कर दिया गया था, जब राज्य में एक खास शख्स गृह मंत्री था।”

वझे को बहाल करने वाली कमेटी के दस्तावेज नहीं दे रही सरकार
अदालत ने पूछा कि क्या CBI तीन सदस्यीय समिति के खिलाफ भी जांच कर रही है, जिसने वझे की बहाली को मंजूरी दी थी? इस पर मेहता ने कहा कि वह तफ्तीश करना तो चाहती है, लेकिन महाराष्ट्र सरकार CBI को वझे की बहाली से संबंधित दस्तावेज नहीं दे रही है। राज्य सरकार के वकील दादा ने कहा कि उच्च न्यायालय यह अनुमान नहीं लगा सकता कि प्रारंभिक जांच का निर्देश देने वाले अदालत के आदेश के तहत राज्य सरकार के लिए जरूरी है कि वह CBI को वे दस्तावेज दे जो उसने मांगे हैं। हाईकोर्ट बुधवार को मामले में अगली सुनवाई करेगा।

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