क्या महाराष्ट्र में फिर बदलेंगे राजनीतिक हालात:चंद्रकांत पाटिल ने कहा- शरद पवार की ओर से होगी सरकार गिराने की पहल!

मुंबई8 महीने पहलेलेखक: विनोद यादव
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पाटिल ने बताया कि महाराष्ट्र जब मध्यावधि चुनाव होंगे तो भाजपा को 122 से 130 सीट मिलने की उम्मीद है। - Dainik Bhaskar
पाटिल ने बताया कि महाराष्ट्र जब मध्यावधि चुनाव होंगे तो भाजपा को 122 से 130 सीट मिलने की उम्मीद है।

फरवरी में होने वाले मुंबई सहित अन्य स्थानीय निकाय चुनावों के बाद मई महीने में महाराष्ट्र में मध्यावधि चुनाव होंगे। महाविकास आघाडी सरकार गिराने की पहल राकांपा अध्यक्ष शरद पवार की ओर से होगी। राज्य में जब तक भाजपा की सरकार फिर से नहीं आती है, तब तक मुख्यमंत्री पद का चेहरा देवेंद्र फडणवीस ही होंगे। सत्ता में हलचल पैदा करने वाले ऐसे कई खुलासे भाजपा प्रदेशाध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल ने दैनिक भास्कर से अनौपचारिक बात करते हुए किए हैं।

दक्षिण मुंबई के गरवारे क्लब में पाटिल ने महाराष्ट्र सरकार के बारे में पूछे जाने पर कहा, शरद पवार जिस तरह से सरकार चलाना चाहते हैं, वैसे सरकार नहीं चल रही है। इसलिए उन्होंने फरवरी में होने वाले स्थानीय निकाय चुनाव तक अपने गुस्से को कंट्रोल कर रखा है। उन्होंने कहा कि जब पति-पत्नी के बीच झगड़ा होता है, तो एक स्टेज तक दोनों ही सहन करते हैं। उसके बाद तलाक लेकर अलग हो जाते हैं। महाविकास आघाडी सरकार का भी कुछ ऐसा ही होने की प्रबल संभावना है।

पाटिल ने बताया कि महाराष्ट्र जब मध्यावधि चुनाव होंगे तो भाजपा को 122 से 130 सीट मिलने की उम्मीद है। सरकार बनाने के लिए इतने ही विधायकों की आमतौर पर जरूरत पड़ती है, क्योंकि 2014 में जब सरकार बनी थी तब हमारे पास 122 ही विधायक थे।

मनसे से लाभ कम नुकसान ज्यादा
राज ठाकरे की पार्टी मनसे से जुड़े सवाल पर भाजपा प्रदेशाध्यक्ष पाटिल ने बताया कि मनसे से भाजपा को लाभ कम नुकसान ज्यादा होने की संभावना है। क्योंकि आने वाले कुछ महीनों में यूपी विधानसभा चुनाव है और मुंबई का अमराठी वर्ग भी मनसे को पसंद नहीं करता। राज्य स्तर पर भी मनसे की उपयोगिता बहुत कम है। इसके साथ ही उन्होंने जोड़ा कि यदि मुंबई में भाजपा और मनसे साथ आती है, तो शिवसेना को सौ फीसदी हाराया जा सकता है।

समीर वानखेडे को हमें समर्थन करने की आवश्यकता नहीं
उन्होंने कहा, हमें (भाजपा) एनसीबी के जोनल डायरेक्टर समीर वानखेडे का समर्थन करने की कोई आवश्यकता नहीं है। वे एक अफसर है। उन्हें क्या करना है? वे खुद जानते हैं और जो प्रकरण चल रहा है। उसे देख लेने में सक्षम हैं। परंतु महाराष्ट्र की सत्ताधारी पार्टी सिस्टम को तोड़ने और उसका मनोबल गिराने की जो कोशिश हो रही है। भाजपा उसका कड़ा विरोध करती है। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका, सीबीआई वह अन्य केंद्रीय एजेंसियों को सूबे के सत्तारूढ़ दल तोड़ने की कोशिश हो रही हैं। यह बात सामान्य लोगों के ध्यान में आ रही है।

विधान परिषद की उम्मीदवारी को लेकर पार्टी के भीतर मदभेद
मुंबई से विधान परिषद की किसे उम्मीदवारी दी जाए? इस पर पार्टी के भीतर अभी तक सहमति नहीं बन पाई है। मुंबई मनपा चुनाव में उपयोगी साबित हो ऐसे नाम की तलाश पार्टी के भीतर है। हालांकि थोड़ा झुकाव उत्तर भारतीय की ओर अधिक है। संगठन के भीतर सक्रिय महिला नेताओं और कार्यकर्ताओं का नाम बहुत अच्छा है। यदि जयवंती बहन मेहता जैसी कोई दबंग महिला नेता इस वक्त होती, तो उससे उम्मीदवारी दिए जाने पर विचार हो सकता था, परंतु फिलहाल अभी ऐसा कोई नाम सामने नहीं आ रहा है। यदि कोई नाम चर्चा में है भी तो मुंबई मनपा चुनाव में उनकी उपयोगिता कुछ खास नजर नहीं आती। क्योंकि अभी हमारी प्राथमिकता मुंबई महानगर पालिका में उपयोगी पढ़ने वाले नाम की है

ठाकरे सरकार के खिलाफ एक साथ 78 प्रेस कांफ्रेंस करेगी भाजपा
मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में महाविकास आघाडी सरकार को नवंबर महीने में दो वर्ष पूरे होने जा रहे हैं। इस मौके पर भाजपा किसानों और प्रदेश में बढ़ते अपराध की वारदातों पर कुल 78 प्रेस कांफ्रेंस कर राज्य सरकार पर हमला बोलने वाली है।

तनातनी के बावजूद क्यों सरकार टिकी हुई है
भाजपा प्रदेशाध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल ने कहा कि शिवसेना और राष्ट्रवादी के बीच इस वक्त जोर जबरदस्ती का दौर चल रहा है। जब उनसे पूछा गया कि इसके बावजूद क्यों ठाकरे सरकार टिकी हुई है, तो उन्होंने तर्क दिया कि दरअसल सरकार शिवसेना,राकांपा और कांग्रेस गठबंधन की होने के बावजूद राज्यभर में अधिकांश महानगरपालिकाओं और अन्य स्थानीय निकायों पर भाजपा का कब्जा है।

पाटिल ने कहा-सत्तारूढ़ दल को लगता है कि सरकार में रहकर ही स्थानीय निकायों पर विजय हासिल किया जा सकता है। इसलिए वे फरवरी में होने वाले स्थानीय निकाय चुनावों में अपना कब्जा स्थापित करने की पूरी कोशिश करने वाले हैं। पाटिल ने बताया कि भाजपा ने भी दिसंबर-मई इन छह महीनों तक महाविकास आघाड़ी सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतर कर कड़ा संघर्ष करने का निर्णय लिया है ताकि जब मई में मध्यावधि चुनाव हो, तो जनता के बीच हम मजबूत विकल्प के रूप में रहें।

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