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मारा गया 25 लाख का ईनामी रूसी:छत्तीसगढ़-महाराष्ट्र बार्डर पर मारे गए 5 नक्सलियों पर था कुल 43 लाख का इनाम, रूसी राव जी पर 115 मामले थे दर्ज

गढ़चिरौली3 महीने पहले
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मुठभेड़ के दौरान मारे गए नक्सलियों के शव। नक्सल प्रभावित गढ़चिरौली जिले के कोरपर्शी जंगल में पुलिसकर्मियों और नक्सलियों के बीच 24 दिन पहले भी एक बड़ी मुठभेड़ हुई थी जिसमें एक कमांडो शहीद हो गए थे। - Dainik Bhaskar
मुठभेड़ के दौरान मारे गए नक्सलियों के शव। नक्सल प्रभावित गढ़चिरौली जिले के कोरपर्शी जंगल में पुलिसकर्मियों और नक्सलियों के बीच 24 दिन पहले भी एक बड़ी मुठभेड़ हुई थी जिसमें एक कमांडो शहीद हो गए थे।
  • बड़ी मात्रा में मिले हथियार, गोला-बारूद
  • c-60 कमांडो की टीम ने किया था ढेर

महाराष्ट्र के नक्सल प्रभावित गढ़चिरौली जिले के खोब्रा मेढ़ा जंगल में C-60 कमांडो टीम की नक्सलियों के साथ मुठभेड़ हो गई। इस दौरान जवानों ने पांच नक्सलियों को मार गिराया था। मारे गए नक्सलियों में दो महिला और तीन पुरुष नक्सली शामिल थे। मुठभेड़ के बाद जवानों ने जंगल से भारी मात्रा में हथियार भी बरामद किया है।

यह मुठभेड़ सुरक्षा बलों की बड़ी कामयाबी है, क्योंकि इसमें मारे गए सभी नक्सली हार्डकोर थे। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें मारा गया रूसी राव जी उर्फ पवन उर्फ भास्कर मिचामी पर अकेले ही 25 लाख रुपए का इनाम था। रूसी पर सिर्फ गढ़चिरौली डिविजन में ही 115 गंभीर अपराध विभिन्न थानों में दर्ज थे। वह DKSZC प्रमुख सदस्य था। यह संगठन छत्तीसगढ़ बार्डर समेत पूरे महाराष्ट्र और आंध्र में सक्रिय है। मारा गया दूसरा नक्सली नेता राजू उर्फ बुद्धेसिंघ नेताम जो तिपागढ़ एनओएस का डिप्टी कमांडर था उस पर 10 लाख रुपए का इनाम था। एलओएस के एक और सदस्य अमर मुया कुंजाम सुकमा के जगरगुंडा एलओएस में काम कर रहा था। उस पर 8 लाख रुपए का इनाम था। उसके खिलाफ 8 मामले दर्ज थे वह भी इस मुठभेड़ में मारा गया।

मारी गई महिला नक्सली भी नक्सल संगठन की पुरानी सदस्य थीं। सुजाता उर्फ पुनिता गावड़े पर 31 मामले दर्ज थे और उस पर 4 लाख रुपए का इनाम था। टीपागढ़ एलओएस की सदस्य अस्मिता उर्फ सुखलु पर 11 मामले दर्ज थे और उसके सिर 2 लाख रुपए का इनाम था।

छत्तीसगढ़ गढ़चिरौली बार्डर इलाके में पिछले तीन दिनों से जवानों और नक्सलियों के बीच रह-रहकर मुठभेड़ हो रही थी। जानकारी के मुताबिक, देर रात पेट्रोलिंग के लिए कुर खेड़ा तालुका के खोब्रा मेढ़ा के जंगल में नक्सलियों ने अचानक से पेट्रोलिंग पार्टी पर हमला कर दिया, जिसके बाद क्रॉस फायरिंग हुई। इसी दौरान जवानों ने पांच नक्सलियों को मार गिराया। गढ़चिरौली के SP का कहना है कि अभी फायरिंग रुकी हुई है। सर्च ऑपरेशन चल रहा है।

इससे पहले एक अधिकारी ने कहा था कि शनिवार को जिला पुलिस ने एक राइफल और तीन प्रेशर कुकर बम जब्त किए थे, जिनका इस्तेमाल नक्सली कथित रूप से सुरक्षा बलों पर हमला करने की योजना के लिये कर रहे थे। गढ़चिरौली पुलिस को सूचना मिली थी कि बड़ी संख्या में नक्सली ‘नक्सल सप्ताह’ मनाने के लिये यहां जुटने वाले हैं, जिसके मद्देजनर उसके सी-60 कमांडो ने हेतलकासा जंगली इलाके में शनिवार को नक्सल-विरोधी अभियान चलाया था। पुलिस ने कहा कि 60 से 70 नक्सलियों ने सी-60 कमांडों पर गोलीबारी शुरू कर दी, जिसका सुरक्षा बलों ने जवाब दिया। दोनों ओर से करीब एक घंटे तक गोलीबारी चली। इस दौरान नक्सली अपना सामान छोड़कर भाग गए।

जंगल में बरामद नक्सलियों का सामान।
जंगल में बरामद नक्सलियों का सामान।

24 दिन पहले भी गढ़चिरौली में हुई थी पुलिस-नक्सलियों के बीच मुठभेड़

नक्सल प्रभावित गढ़चिरौली जिले के कोरपर्शी जंगल में पुलिसकर्मियों और नक्सलियों के बीच 24 दिन पहले भी एक बड़ी मुठभेड़ हुई थी। करीब 12 घंटे तक चली मुठभेड़ में एक C-60 कमांडो शहीद हुए थे जबकि कुछ जवान घायल भी हुए थे। मुठभेड़ की जगह पर कमांडोज के फंसे होने की सूचना भी मिली थी जिसके बाद उन्हें निकालने के लिए एयरफोर्स से मदद मांगी गई थी।

महाराष्ट्र-छत्तीसगढ़ बॉर्डर पर स्थित कोरपर्शी जंगल में C-60 जवानों पर यह हमला तब हुआ था जब वे कुछ गांवों में तलाशी अभियान चला रहे थे। इन गांवों में भारी संख्या में नक्सलियों के पहुंचने की जानकारी मिली थी। इस दौरान दोनों ओर से भीषण गोलीबारी हुई। मौके पर कांकेर पुलिस के 270 से ज्यादा पुलिसकर्मियों को भेजा गया था।

जंगल में नक्सलियों के बरामद सामान में रोजाना इस्तेमाल की जाने वाली वस्तुएं भी हैं।
जंगल में नक्सलियों के बरामद सामान में रोजाना इस्तेमाल की जाने वाली वस्तुएं भी हैं।

कौन हैं C-60 एंटी नक्सल कमांडो

गढ़चिरौली जिले की स्थापना के बाद से ही पूरे क्षेत्र में नक्सली गतिविधियां बढ़ गई थी। इस पर प्रतिबंध लगाने के लिए तत्कालीन SP केपी रघुवंशी ने 1 दिसंबर 1990 को C-60 की स्थापना की। उस वक्त इस फोर्स में सिर्फ 60 विशेष कमांडो की भर्ती हुई थी, जिससे इसे यह नाम मिला। नक्सली गतिविधियों को रोकने के लिए गढ़चिरौली जिले को दो भागों में बांटा गया। पहला उत्तर विभाग, दूसरा दक्षिण विभाग।

2019 में नक्सली हमले में 15 जवान शहीद हुए थे
इससे पहले 3 मई 2019 को घात लगाकार बैठे 100 से ज्यादा नक्सलियों ने एक ऐसा ही हमला किया था। गढ़चिरौली में हुए आईईडी ब्लास्ट में 15 QRT जवान शहीद हो गए थे। इस दुर्दांत हमले के पीछे उत्‍तरी गढ़चिरोली के सीपीआई (माओवादी) का कमांडर भास्‍कर हमले का मास्‍टर माइंड बताया गया था।

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