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देश के सबसे बड़े ऑटोमोबाइल हब चाकण से रिपोर्ट:कोरोना की दूसरी लहर में मजदूर यहां से नहीं लौट रहे; कंपनियां टीके, रहने और खाने की व्यवस्था कर रहीं

पुणे6 दिन पहलेलेखक: मंगेश फल्ले
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ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरिंग हब चाकण से मजदूर पिछले साल की तरह वापस नहीं लौट रहे हैं, कंपनियों ने पिछले लॉकडाउन में हुईं परेशानियों से सबक लेते हुए कई ऐसे कदम उठाए हैं, जिससे इस बार मजदूरों को वैसी तकलीफ नहीं उठानी पड़ रही, जैसी पहले उठानी पड़ी थीं। - Dainik Bhaskar
ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरिंग हब चाकण से मजदूर पिछले साल की तरह वापस नहीं लौट रहे हैं, कंपनियों ने पिछले लॉकडाउन में हुईं परेशानियों से सबक लेते हुए कई ऐसे कदम उठाए हैं, जिससे इस बार मजदूरों को वैसी तकलीफ नहीं उठानी पड़ रही, जैसी पहले उठानी पड़ी थीं।

महाराष्ट्र में रोज 50 हजार कोरोना मरीज मिल रहे हैं, जो 14 महीने के कोरोनाकाल में राज्य का सर्वाधिक आंकड़ा है। इसलिए वहां आंशिक लॉकडाउन की स्थिति है। इसके बावजूद देश के सबसे बड़े ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरिंग हब चाकण से मजदूर पिछले साल की तरह वापस नहीं लौट रहे हैं। कंपनियों ने पिछले लॉकडाउन के दौरान हुईं परेशानियों से सबक लेते हुए कई ऐसे कदम उठाए हैं, जिससे इस बार मजदूरों को वैसी तकलीफ नहीं उठानी पड़ रही, जैसी पहले उठानी पड़ी थीं।

कंपनियां श्रमिकों का जल्द टीकाकरण कराने के साथ ही उनके रहने की व्यवस्था, काम बंद होने की नौबत आने पर खाने की व्यवस्था और क्वारेंटाइन सेंटर जैसे प्रबंध कर रही हैं। पुणे के नजदीक औद्योगिक केंद्र चाकण की देश के कुल ऑटोमोबाइल प्रोडक्शन में 40% हिस्सेदारी है। पिछले साल लॉकडाउन की वजह से दो लाख मजदूर चाकण से यूपी, बिहार, मध्यप्रदेश, पश्चिम बंगाल, राजस्थान, छत्तीसगढ़, झारखंड आदि लौट गए थे, जिन्हें बाद में वापस लाने में कंपनियों को काफी मशक्कत करनी पड़ी थी।

इस वजह से ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री को पूरी क्षमता से काम शुरू करने में देरी हुई थी। मराठा चैम्बर ऑफ कॉमर्स, इंडस्ट्रीज एंड एग्रीकल्चर (मकिया) के प्रेसिडेंट सुधीर मेहता कहते हैं- पिछले साल हम स्थिति को ठीक से समझ नहीं पाए थे, इसलिए पलायन हुआ। लेकिन, इस बार हम ऐसा नहीं होने दे रहे।

अगर आने वाले दिनों में काम कुछ समय के लिए बंद भी हो जाए, तो भी हमने मजदूरों को यहीं ठहराने और उनके खाने-पीने की व्यवस्था कर दी है। कोरोना के मामले बढ़ते हैं, तो इसके लिए हम क्वारेंटाइन सेंटर भी बनवा रहे हैं।

पुणे में रोज एक लाख टीके लग रहे, इनमें ज्यादातर मजदूर
कंपनियों ने प्रशासन के साथ मिलकर मजदूरों के टीकाकरण का अभियान छेड़ा है। पुणे में हर रोज एक लाख लोगों काे टीके लग रहे हैं। इनमें ज्यादा श्रमिक हैं। मकिया के निदेशक प्रशांत गिरबाने कहते हैं- ‘कोविड की दूसरी लहर का असर अभी इंडस्ट्री पर नहीं पड़ा है। हमारे सर्वे के मुताबिक, फरवरी में कुल क्षमता का 85% उत्पादन हुआ था, जो मार्च में 83% रहा।

कंपनियों के 86% कर्मचारी नियमित रूप से काम पर आ रहे हैं।’ फेडरेशन ऑफ चाकण इंडस्ट्रीज के सचिव दिलीप बटवाल कहते हैं- ‘पिछले लॉकडाउन में इंडस्ट्री के साथ ही मजदूरों को भी मुश्किलों का सामना करना पड़ा था। क्योंकि, कोई नहीं जानता था कि लॉकडाउन खत्म कब होगा। लेकिन, अब ऐसा नहीं है। महाराष्ट्र सरकार ने उद्योगों को चालू रखने की छूट दे रखी है।’

रेलवे ने कहा- टिकट बुकिंग पहले जैसी; 75-80% यात्री क्षमता से चल रहीं 1353 ट्रेनें
मजदूरों के लौटने की अपुष्ट खबरों के बीच रेलवे ने साफ किया है कि पिछले कुछ दिनों में रेलवे के टिकट बुकिंग में अंतर नहीं आया है। अभी ट्रेनों में यात्रियों की संख्या कुल क्षमता कीे 75-80% है, जो एक महीने से स्थिर है। मुंबई-दिल्ली जैसे बड़े शहरों से छोटे शहरों के लिए ट्रैफिक अभी सामान्य है। रेलवे के प्रवक्ता के मुताबिक, लॉकडाउन की आशंका के चलते यात्रियों की संख्या में बढ़ोतरी जैसी कोई स्थिति नहीं है। ऐसा होता है तो ट्रेनें बढ़ाई जा सकती हैं।

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