महाराष्ट्र ATS को नहीं मिल रहे अधिकारी:DGP संजय पांडे ने फेसबुक पर भेजा आवेदन, कहा-ATS जॉइन करने पर 25% अतिरिक्त भत्ता मिलेगा

मुंबई5 महीने पहले
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पिछले हफ्ते अपने फेसबुक पेज पर लिखे पोस्ट में डीजीपी संजय पांडे ने सोशल मीडिया अकाउंट का जिक्र करते हुए इस पर आवेदन आमंत्रित किए थे।  - Dainik Bhaskar
पिछले हफ्ते अपने फेसबुक पेज पर लिखे पोस्ट में डीजीपी संजय पांडे ने सोशल मीडिया अकाउंट का जिक्र करते हुए इस पर आवेदन आमंत्रित किए थे। 

महाराष्ट्र में एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है। राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) संजय पांडे ने राज्य में आतंकवाद विरोधी दस्ते (ATS) में एसपी के दो रिक्त पदों के लिए अपने फेसबुक पेज पर आवेदन बुलवाए हैं। उन्होंने इच्छुक प्रत्याशियों से कहा है कि वे विभाग से संपर्क कर सकते हैं या सोशल मीडिया के जरिए उन्हें आवेदन भेज सकते हैं। असल में कुछ दिन पहले महाराष्ट्र एटीएस के प्रमुख विनीत अग्रवाल ने राज्य सरकार को पत्र लिखकर ATS के लिए और टीम मेंबर्स की मांग की थी। हालांकि, संजय पांडे के इस पोस्ट पर अग्रवाल ने कुछ भी कहने से मना कर दिया।

संजय पांडे ने अपने पोस्ट में यह लिखा
पिछले हफ्ते अपने फेसबुक पेज पर एक पोस्ट में डीजीपी संजय पांडे ने लिखा था कि एटीएस, मुंबई में पुलिस अधीक्षक (एसपी) के दो पद रिक्त हैं। एटीएस एक प्रतिष्ठित संस्थान है। इसमें नियुक्ति होने पर 25 प्रतिशत विशेष भत्ता प्रदान किया जाता है। इच्छुक अधिकारी सीधे एडीजी एटीएस या एडीजी पदस्थापना से संपर्क कर सकते हैं। इसके अलावा अपने सोशल मीडिया अकाउंट का जिक्र करते हुए पांडे ने इस पर भी आवेदन आमंत्रित किए थे।

इस वजह से ATS से हो रहा अधिकारियों का मोह भंग
हालांकि, अभी तक ज्यादा लोगों ने ATS में जाने की इच्छा नहीं जताई है। कई वर्तमान और पूर्व एटीएस अधिकारियों ने कहा कि राज्य की आतंकवाद विरोधी इकाई ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी चमक खो दी है, क्योंकि सबसे चर्चित और संवेदनशील मामलों की जांच सेंट्रल की राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ही कर रही है। यह एक बड़ी वजह है कि अब ATS की ओर अधिकारियों का रुझान कम हो रहा है। यही नहीं पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा, केंद्र और राज्य के बीच लगातार खींचतान ने सेंट्रल और स्टेट के एजेंसीज के बीच दरार डालने का काम किया है। इससे स्टेट एजेंसीज के प्रति लोगों का मोह भंग हो रहा है।

संजय पांडे के सोशल मीडिया में लिखे इस पोस्ट को तकरीबन एक हजार लोग लाइक कर चुके हैं।
संजय पांडे के सोशल मीडिया में लिखे इस पोस्ट को तकरीबन एक हजार लोग लाइक कर चुके हैं।

ATS के यह पद हैं खाली
सूत्रों के मुताबिक, एटीएस प्रमुख विनीत अग्रवाल ने अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) मनु कुमार श्रीवास्तव को बताया कि ATS में चार प्रमुख पद काफी समय से खाली हैं और उन्हें जल्द भरना चाहिए। एटीएस के एसपी (तकनीकी विश्लेषण) सोहेल शर्मा हायर स्टडी के लिए अमेरिका गए हैं। एटीएस में एसपी रैंक के एक अन्य अधिकारी राजकुमार शिंदे का कुछ समय पहले भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो(ACB) में तबादला किया गया था, लेकिन उन्हें अभी तक एटीएस से रिलिव नहीं किया गया है। एटीएस आईजी का पद पूर्व में सुहास वारके के पास था, लेकिन एक साल पहले उनका तबादला हो गया था। उसके बाद से यह पद भी खाली है। इसी तरह एटीएस डीआईजी का पद भी खाली है, क्योंकि शिवदीप लांडे को नवंबर में बिहार भेज दिया गया है।

कोई नहीं देगा डीजी को जवाब
मुंबई पुलिस के एक अधिकारी ने इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए कहा, एटीएस बहुत प्रतिष्ठित विभाग है। हर कोई इसमें काम करना चाहता है। कोई भी इच्छुक व्यक्ति अपने फेसबुक अकाउंट पर डीजी को जवाब नहीं देगा क्योंकि अन्य अधिकारियों को भी इसके बारे में पता चल जाएगा।

इन बड़े केस को ATS से छीन NIA को दे दिया गया
पूर्व ATS अधिकारी ने बताया,'पिछले कुछ सालों के दौरान महाराष्ट्र ATS इस्लामिक स्टेट आतंकवादी संगठन(ISIS) से संबंधित कई मामलों को देख रही थी। जिसमें 2014 में कल्याण और 2015 में मालवानी के युवाओं के ISIS में शामिल होने का केस भी शामिल था। हालांकि, कुछ समय पहले इन दोनों केस को NIA को ट्रांसफर कर दिया गया। ATS ने 2006 और 2008 के मालेगांव ब्लास्ट केस की जांच की और चार्जशीट भी फाइल की। हालांकि, इन दोनों केसों को बाद में उनसे ले कर NIA को सौंप दिया गया।

एटीएस के पूर्व अधिकारी ने आगे कहा, "एंटीलिया विस्फोटक बरामदगी मामले में महाराष्ट्र ATS ने अच्छा काम किया था। यूरेनियम बरामदगी मामले का खुलासा भी ATS टीम ने किया और मनसुख हिरेन की मौत को लेकर भी कई अहम सुराग खोज निकाले थे, लेकिन यह केस भी उनके हाथ से छीन कर NIA को सौंप दिया गया। यह बेहद निराशाजनक था और इससे ATS अधिकारियों के मनोबल पर प्रभाव पड़ा।

NIA और ATS का एक जैसा काम है सबसे बड़ी दिक्कत
इस अधिकारी के मुताबिक एनआईए और एटीएस का चार्टर मोटे तौर पर एक जैसा होने के कारण दोनों एजेंसीज आतंकवाद और नकली नोटों के मामलों को देखती हैं। उन्होंने कहा, "जब केंद्र और राज्य दोनों में एक ही पार्टी की सरकार होती है, तो दोनों एजेंसीज में सामंजस्य देखने को मिलता है, लेकिन जब ऐसा नहीं होता तो स्थिति अलग होती है। एक अन्य पूर्व एटीएस अधिकारी ने कहा कि पहले ATS में सहायक आयुक्तों की भी कमी थी, लेकिन अब स्थिति में सुधार हुआ है।

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