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10 नवजात जिंदा जले, वहां से ग्राउंड रिपोर्ट:मां ने ठीक से निहारा भी नहीं था कि बेटे की मौत की खबर आ गई, बहन तो चेहरा भी नहीं देख पाई

भंडारा7 दिन पहलेलेखक: सुमन पांडेय
शुक्रवार को खुशी के मारे विकेश ने मिठाइयां बांटी, लेकिन उसकी खुशी कुछ ही घंटे में मातम में बदल गई।

महाराष्ट्र में भंडारा जिले के आसपास के 10 गांवों में अब मातम पसरा है। जिन 10 परिवारों ने अपने बच्चों को खोया अब वहां सिर्फ आंसू और गम का माहौल है। शुक्रवार देर रात जिला अस्पताल के सिक न्यूबोर्न केयर यूनिट (SNCU) में आग लगने से 10 नवजात की मौत हो गई। आग शॉर्ट सर्किट से लगी थी। इस यूनिट में 17 बच्चे रखे गए थे। सात को बचा लिया गया।

जिले के श्रीनगर गांव में रहने वाले विकेश शिवदास धूड़से मजदूरी करते हैं। हादसे से करीब नौ घंटे पहले यानी शुक्रवार दोपहर उनकी पत्नी योगिता ने एक बेटे को जन्म दिया था। बच्चे का वजन कम होने की वजह से पैदा होते ही परिजन उसे जिला अस्पताल लेकर आए और SNCU में एडमिट करवा दिया। योगिता अपने बच्चे को ठीक से निहार भी नहीं पाई थी और बच्चा उनसे इतनी दूर चला गया कि अब वह कभी लौट कर नहीं आएगा।

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विकेश की चार साल की बेटी भाई के आने से बेहद खुश थी। उसने तो अपने भाई का चेहरा भी नहीं देखा था।
विकेश की चार साल की बेटी भाई के आने से बेहद खुश थी। उसने तो अपने भाई का चेहरा भी नहीं देखा था।

बेटी को भाई से मिलने का बेसब्री से इंतजार था
विकेश की चार साल की बेटी के भाई के आने से बेहद खुश थी। परिवार में सभी के चेहरों पर मुस्कान थी। शुक्रवार को विकेश ने मिठाइयां बांटी, लेकिन उसकी खुशी कुछ ही घंटे में मातम में बदल गई। अब मां-पिता के आंसू रोके नहीं रुक रहे। विकेश ने बताया कि उसके परिवार को उम्मीद थी कि जल्द ही उनका बेटा ठीक हो कर लौट आएगा।

जल्द घर आने वाली थी बिटिया
भंडारा जिले से लगे हुए भोजापुर गांव के रहने वाले विश्वनाथ ने बताया, 'मेरी बेटी का वजन कम होने की वजह से उसे इलाज के लिए अस्पताल में करीब एक महीने पहले भर्ती किया था। अब उसकी सेहत में सुधार था और उसे छुट्टी दी जानी थी। हम बेहद खुश थे। शनिवार को सुबह करीब चार बजे हमें यह दुखद खबर मिली।'

स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे एक पीड़ित परिवार को मुआवजे का चेक सौंपते हुए।
स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे एक पीड़ित परिवार को मुआवजे का चेक सौंपते हुए।

परिवार पूछ रहा-क्या 5 लाख रुपए में लौट आएगी बेटी?
विश्वनाथ ने बताया, 'जब हम अस्पताल पहुंचे तब तक हमें किसी ने यह नहीं बताया कि हमारी बेटी की मौत हो चुकी है। कुछ देर बाद अस्पताल के कुछ कर्मचारियों ने इस बात का खुलासा किया। महाराष्ट्र के विधानसभा अध्यक्ष नाना पटोले भोजापुर गांव पहुंचे और विश्वनाथ के परिवार से मुलाकात कर उन्हें मुआवजे का चेक सौंपा, लेकिन परिवार मायूसी भरे चेहरे में यही पूछ रहा है कि क्या यह पांच लाख लौटा सकते हैं उनकी बच्ची को?

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