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मुंबई में मददगार पुलिसवाला:इस पुलिसकर्मी ने 20 साल में किया 35 हजार लावारिस शवों का अंतिम संस्कार, संक्रमण काल में 500 से ज्यादा लोगों को इनके हाथ से मिली मुक्ति

मुंबई2 वर्ष पहले
ज्ञानदेव(टी शर्ट में) इसी तरह गाड़ियों में शवों को रख उन्हें श्मशान और कब्रिस्तान तक पहुंचाते हैं।

संक्रमण के इस काल में एक ओर जहां लोग एक-दूसरे के पास जाने से भी कतरा रहे हैं, वहीं मुंबई पुलिस डिपार्टमेंट के कांस्टेबल ज्ञानदेव प्रभाकर वारे लगातार लावारिस शवों का अंतिम संस्कार कर रहे हैं। इनमें कई ऐसे शव भी हैं, जिनके वारिस का पता हो है लेकिन संक्रमित होने के कारण उनके अपने उन्हें छूना तक नहीं चाहते हैं।

35 हजार से ज्यादा शवों का किया अंतिम संस्कार

ज्ञानदेव, ताड़देव पोलिस स्टेशन में कार्यरत हैं। ज्ञानदेव अगर शव हिन्दू का होता है तो उसे पूरे रीतिरिवाजों से श्मशान में जलाते हैं और अगर शव मुसलमान का होता है तो उसे कब्रिस्तान में दफनाते हैं। ज्ञानदेव साल 2001 यानी पिछले 20 वर्ष से यह काम लगातार करते आ रहे हैं, लेकिन पिछले कुछ दिनों के दौरान उनका काम काफी बढ़ गया है। अब तक वे 35 हजार से ज्यादा शवों का अंतिम संस्कार कर चुके हैं। ज्ञानदेव ने बताया कि वे शवों को कभी पुलिस वैन से तो कभी एम्बुलेंस से उठाकर श्मशान तक ले जाते हैं।

संक्रमण काल में उनका काम काफी बढ़ गया है। वे अब तक 500 से ज्यादा लोगों को पिछले साल से अब तक मुक्ति दिला चुके हैं।
संक्रमण काल में उनका काम काफी बढ़ गया है। वे अब तक 500 से ज्यादा लोगों को पिछले साल से अब तक मुक्ति दिला चुके हैं।

500 से ज्यादा लोगों का किया संक्रमण काल में अंतिम संस्कार

ज्ञानदेव बताते हैं कि कोरोना संक्रमण काल की शुरुआत यानी मार्च 2020 से अब तक वे 500 से ज्यादा लोगों का अंतिम संस्कार कर चुके हैं, जिसमें से 50 से ज्यादा संक्रमित मरीज थे और उनके परिजन उन्हें लेने को तैयार नहीं थे। इनमें से ज्यादातर शव जेजे हॉस्पिटल, सायन हॉस्पिटल के हैं। ज्ञानदेव को कुछ शव ऐसे भी मिले जो सड़कों पर लावारिस पड़े थे।

पुलिस विभाग की ओर से किया गया है सम्मानित
ज्ञानदेव का कर्तव्य और समाज के प्रति सेवा भाव देखते हुए मुंबई पुलिस जॉइंट कमिश्नर विश्वाश नागरे पाटिल ने इन्हें 5 हजार रुपए का चेक देकर सम्मानित किया था। और इनका प्रमोशन कॉस्टेबल से हेड कॉन्स्टेबल के पद पर कर दिया गया है। परिवार वाले उनके इस काम मे पूरी तरह से उनका साथ दे रहे हैं।

मुस्लिम शवों को वे कब्रिस्तान में दफन करवाते हैं और हिन्दू शवों को श्मशान में कई बार अपने हाथ से अग्नि देते हैं।
मुस्लिम शवों को वे कब्रिस्तान में दफन करवाते हैं और हिन्दू शवों को श्मशान में कई बार अपने हाथ से अग्नि देते हैं।

परिवार भी कर रहा ज्ञानदेव का सहयोग
उन्होंने कहा कि जब वो इस काम को कर घर लौटते है तो सबसे पहले नहा धोकर अंदर जाते है। संक्रमण के खतरे के बावजूद उनका परिवार भी उनके साथ इस काम में सहयोग करता है।