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बारिश से बेहाल 4 राज्य:गुजरात के 4 जिलों में बाढ़ से बिगड़े हालात, उत्तराखंड और हिमाचल में कई जगह लैंडस्लाइड; महाराष्ट्र में आज फिर बारिश का अलर्ट

मुंबई2 महीने पहले

गुजरात, महाराष्ट्र और उत्तराखंड समेत देश के कई राज्यों में भारी बारिश हो रही है। गुजरात के कुछ इलाकों में तो सड़कों पर पानी का सैलाब नजर आ रहा है। मकान-दुकान, रेलवे ट्रैक सब डूब गए हैं। उधर, उत्तराखंड में लैंडस्लाइड होने से कई रास्ते और हाइवे बंद हो चुके हैं। वहीं महाराष्ट्र के पालघर और पुणे समेत कई बड़े जिलों में आज फिर बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।

अहमदाबाद के सारंगपुर इलाके में भारी बारिश की वजह से एक मकान ढह गया। अभी यह पता नहीं चल पाया है कि इस हादसे में कितना नुकसान हुआ है।
अहमदाबाद के सारंगपुर इलाके में भारी बारिश की वजह से एक मकान ढह गया। अभी यह पता नहीं चल पाया है कि इस हादसे में कितना नुकसान हुआ है।

गुजरात के 4 जिलों में हालात खराब
गुजरात के जामनगर, पोरबंदर, राजकोट और जूनागढ़ जिले में बारिश से बाढ़ के हालात बने हुए हैं। जूनागढ़ के हसनापुर, आनंदपुर, विलिंगडन, ओजात, व्रजमी, ध्राफद जैसे बड़े डैम ओवरफ्लो हो रहे हैं। इन बांधों से पानी छोड़ने की वजह से नेशनल हाइवे डूब गया। साथ ही कई गांवों में भी बाढ़ की स्थिति बन गई है। कई गांवों का संपर्क कट गया है। सड़कों पर पानी आने से जूनागढ़, पोरबंदर और गिर सोमनाथ से जुड़ने वाले सभी नेशनल और स्टेट हाइवे बंद कर दिए गए हैं। भारी बारिश के चलते गिरनार रोपवे भी फिलहाल बंद कर दिया गया है।

जूनागढ़ में कई घर पानी में डूब गए हैं। लोगों को निकालने के लिए NDRF की टीम जुटी हुई है।
जूनागढ़ में कई घर पानी में डूब गए हैं। लोगों को निकालने के लिए NDRF की टीम जुटी हुई है।

सितंबर में गुजरात में रिकॉर्ड बारिश
सौराष्ट्र इलाके में आमतौर पर बहुत कम बारिश होती है, लेकिन इस बार सितंबर के महीने में यहां रिकॉर्ड तोड़ बारिश हुई है। इसी वजह से यहां बाढ़ का कहर देखने को मिल रहा है। मौसम विभाग (IMD) के मुताबिक, गुजरात में सितंबर के पहले 15 दिनों में अगस्त के मुकाबले करीब 4 गुना बारिश हो चुकी है। गुजरात में पिछले महीने 65.3 मिमी बारिश हुई थी, जबकि सितंबर में अब तक 219.2 मिमी बारिश दर्ज की गई है।

राजकोट में बाढ़ में फंसे लोगों रेस्क्यू करते हुए आपदा राहत की टीम। फोटो मंगलवार की है।
राजकोट में बाढ़ में फंसे लोगों रेस्क्यू करते हुए आपदा राहत की टीम। फोटो मंगलवार की है।

महाराष्ट्र: पालघर में बाढ़ का कहर
महाराष्ट्र के पालघर जिले में बीते दो दिनों से हो रही तेज बारिश और बाढ़ के पानी से वसई-विरार को पानी पहुंचाने वाले मासवण पंपिंग स्टेशन और धुकटन फिल्टर प्लांट में घास और मिट्टी भर गई है और दोनों ही प्लांट डूब गए हैं। बार-बार बिजली भी गुल हो रही है, इसलिए पीने के पानी की सप्लाई प्रभावित होने की आशंका भी है। मौसम विभाग ने पालघर, पुणे, औरंगाबाद और ठाणे जिलों में भारी बारिश की आशंका जताई है। इनके अलावा विदर्भ के कुछ जिलों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है।

उत्तराखंड में भी भारी बारिश
उत्तराखंड के ज्यादातर इलाकों में भी बुधवार को भारी बारिश का सिलसिला जारी है। चमोली का पागल नाला एक बार फिर उफान पर है। वहीं, भूस्खलन के चलते बद्रीनाथ नेशनल हाइवे-58 बंद कर दिया गया है। केदारनाथ हाइवे से लेकर बद्रीनाथ हाइवे तक जगह-जगह भूस्खलन हो रहा है। इसके अलावा रुद्रप्रयाग के ग्रामीण इलाकों की सड़कें भी बारिश और भूस्खलन की वजह से टूट गई हैं तो कई जगह सड़कें जाम हैं।

शिमला में लैंडस्लाइड के बाद गिरी कार को खींचने की कोशिश करते हुए लोग।
शिमला में लैंडस्लाइड के बाद गिरी कार को खींचने की कोशिश करते हुए लोग।

हिमाचल के किन्नौर में पहाड़ का बड़ा हिसा टूटा
हिमाचल प्रदेश के किन्नोर में लैंडस्लाइड के बाद नेशनल हाइवे बंद हो गया है। किन्नौर और लाहौल स्पीति के लिए गाड़ियों की आवाजाही भी रोक दी गई है। सड़कों पर मलबा आने की वजह से कई रास्ते बंद करने पड़े हैं।

हिमाचल प्रदेश में बारिश की वजह से भूस्खलन हो रहा हैl इस वजह से कई रास्ते बंद हो गए हैं।
हिमाचल प्रदेश में बारिश की वजह से भूस्खलन हो रहा हैl इस वजह से कई रास्ते बंद हो गए हैं।

दिल्ली में भी भारी बारिश का अलर्ट
दिल्ली में बुधवार रात से हल्की से मध्यम बारिश का दौर फिर शुरू हो सकता है। मौसम विभाग (आईएमडी) ने गुरुवार को शहर में मध्यम बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। कुछ जगहों पर भारी बारिश भी हो सकती है। ऑरेंज अलर्ट बहुत ज्यादा खराब मौसम की चेतावनी के तौर पर जारी किया जाता है। मौसम विभाग ने आशंका जताई है कि बारिश की वजह से सड़कें डूबने और वाटर लॉगिंग होने की आशंका है।

दिल्ली में 46 साल बाद रिकॉर्ड बारिश
दिल्ली में मानसून के इस बार 1,146.4 मिमी तक बारिश हो चुकी है जो 46 साल में सबसे ज्यादा और पिछले साल की बारिश की तुलना में लगभग दोगुनी है। सफदरजंग वेधशाला ने बताया कि 1975 में मानसून में 1,150 मिमी बारिश हुई थी। आमतौर पर दिल्ली में मानसून के दौरान 653.6 मिमी बारिश दर्ज की जाती है।