मनी लॉन्ड्रिंग केस:अनिल देशमुख की डिफाल्ट जमानत याचिका अदालत ने की खारिज, ED ने किया था जमानत का विरोध

मुंबई6 महीने पहले
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मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को लिखे एक पत्र में आरोप लगाया था कि अनिल देशमुख ने गृहमंत्री रहते हुए सचिन वझे से हर महीने 100 करोड़ रुपए देने की मांग की थी। - Dainik Bhaskar
मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को लिखे एक पत्र में आरोप लगाया था कि अनिल देशमुख ने गृहमंत्री रहते हुए सचिन वझे से हर महीने 100 करोड़ रुपए देने की मांग की थी।

मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार हुए अनिल देशमुख की डिफॉल्ट जमानत याचिका विशेष अदालत ने खारिज कर दी है। देशमुख ने पिछले हफ्ते IPC की धारा 167 (2) के तहत डिफॉल्ट जमानत के लिए याचिका दायर की थी। इस पर शुक्रवार को अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था।

अनिल देशमुख की इस याचिका का प्रवर्तन निदेशालय ने विरोध किया था। ईडी ने कोर्ट में कहा था कि अदालत ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में उनके खिलाफ चार्जशीट का संज्ञान नहीं लिया है, इसलिए इस याचिका का कोई महत्व नहीं है। एक बार चार्जशीट और पूरक चार्जशीट दायर होने के बाद जमानत याचिका पर विचार नहीं किया जा सकता। इसलिए स्पेशल कोर्ट इसे खारिज करें।

देशमुख के खिलाफ दायर हुई है 7 हजार पेज की चार्जशीट
बता दें कि अनिल देशमुख को ईडी ने पिछले साल 2 नवंबर, 2021 को अरेस्ट किया था। अभी वह न्यायिक हिरासत में है। पिछले साल 29 दिसंबर को वसूली और भ्रष्टाचार के आरोप में देशमुख और उसके बेटे के खिलाफ सात हजार पेज की पूरक चार्जशीट ईडी ने दायर की थी। इसके अलावा देशमुख के निजी सचिव संजीव पालाडे और निजी सहायक कुंदन शिंदे समेत 14 लोगों के खिलाफ चार्जशीट पहले ही दायर कर चुकी है।

क्यों गिरफ्तार किए गए अनिल देशमुख?

  • ये मामला मनी लॉन्ड्रिंग और वसूली के आरोपों से जुड़ा है। मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को लिखे एक पत्र में आरोप लगाया था कि अनिल देशमुख ने गृहमंत्री रहते हुए सचिन वझे से हर महीने 100 करोड़ रुपए देने की मांग की थी।
  • इस मामले में CBI ने अनिल देशमुख के खिलाफ FIR दर्ज की थी। ED ने CBI की FIR के आधार पर कार्रवाई की है। आरोप है कि देशमुख जब महाराष्ट्र के गृहमंत्री थे तब उन्होंने बार और रेस्टोरेंट मालिकों से 4.7 करोड़ रुपए वसूले थे। ये रकम दिसंबर 2020 से फरवरी 2021 के दौरान वसूली गई थी और इस रकम को मुंबई पुलिस के असिस्टेंट इंस्पेक्टर सचिन वझे के जरिए वसूला गया था।
  • ED के मुताबिक, इस रकम में से 4.18 करोड़ रुपए दिल्ली की 4 अलग-अलग शैल कंपनियों में जमा किए गए। इन कंपनियों ने इस रकम को श्री साई शिक्षण संस्थान नाम के एक ट्र्स्ट को डोनेट कर दिया। इस ट्रस्ट को अनिल देशमुख और उनका परिवार ही चलाता है। यानी वसूली का पैसा शैल कंपनियों के जरिए देशमुख के ट्रस्ट में ही इस्तेमाल किया गया।
  • देशमुख ने अपनी पत्नी आरती देशमुख के नाम पर मुंबई के वर्ली में एक फ्लैट खरीदा था। ये फ्लैट 2004 में नगद पैसे देकर खरीदा गया, लेकिन बिक्रीनामा फरवरी 2020 में साइन किया गया, जब अनिल देशमुख महाराष्ट्र के गृहमंत्री थे। ED इस मामले में भी जांच कर रही है।
  • देशमुख परिवार की प्रीमियर पोर्ट लिंक्स नामक एक कंपनी में 50 फीसदी हिस्सेदारी है। ये हिस्सेदारी 17.95 लाख रुपए में खरीदी गई, जबकि कंपनी और उसके बाकी एसेट की कीमत 5.34 करोड़ रुपए की है। इस मामले में भी ED जांच कर रही है।

पूरे मामले की शुरुआत कहां से हुई?

25 फरवरी 2021 को मुकेश अंबानी के घर एंटीलिया के पास विस्फोटकों से भरी एक SUV बरामद हुई थी। पुलिस को SUV में जिलेटिन रॉड और वाहनों की नंबर प्लेट मिली थीं। ये SUV उस वक्त मनसुख हीरेन की कस्टडी में थी, जिसकी लाश ठाणे के एक नाले में मिली थी। इस मामले की जांच पहले सचिन वझे के ही जिम्मे थी, लेकिन बाद में जांच का जिम्मा NIA को सौंपा गया। NIA ने मार्च में वझे को गिरफ्तार कर लिया। NIA ने चार्जशीट में सचिन वझे समेत 10 लोगों को आरोपी बनाया था। वझे पर आरोप था कि उन्होंने खुद को सुपरकॉप साबित करने के लिए विस्फोटक भरी SUV अंबानी के घर के पास पार्क की थी।

इसके बाद महाराष्ट्र सरकार ने मुंबई पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह का ट्रांसफर कर उन्हें होमगार्ड का DG बना दिया। ट्रांसफर के बाद परमबीर सिंह ने उद्धव ठाकरे को चिट्ठी लिखी जिसमें अवैध वसूली के आरोप लगाए गए।

ED के आरोपों पर देशमुख का क्या कहना है?

देशमुख शुरू से ही ED द्वारा लगाए गए आरोपों को झूठा बता रहे हैं। देशमुख ने दावा किया है कि जांच एजेंसी ने मामले की जांच में "गैर-पारदर्शी" और "अनुचित" तरीका अपनाया है।

हाल ही में जारी एक वीडियो में देशमुख ने कहा है कि उन पर ED की जांच में सहयोग न करने के आरोप गलत हैं। 'जब भी ED का समन आया मैंने उनका लिखित रूप से बताया कि हाईकोर्ट के केस की नतीजा आने के बाद मैं खुद ED ऑफिस आउंगा। मेरे ऊपर आरोप लगाने वाले मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह आज कहां हैं?'

12 अधिकारियों के बयान दर्ज

ED ने इस मामले में पुलिस अधीक्षक स्तर के करीब 12 अधिकारियों के बयान दर्ज किए हैं, जिनमें प्रमुख सचिव, आईपीएस और राज्य पुलिस सेवा के अधिकारी शामिल हैं। यह जानकारी सामने आई कि देशमुख के कहने पर इनके तबादले हुए थे। जिन अधिकारियों के बयान दर्ज किए गए हैं उनमें सबसे बड़ा नाम पूर्व मुख्य सचिव सीताराम कुंटे का था। कुंटे से 7 दिसंबर को लंबी पूछताछ हुई थी। ईडी कार्यालय से निकलने के बाद कुंटे ने कहा कि उन्हें ईडी ने अनिल देशमुख मामले के संबंध में कुछ जानकारी के लिए बुलाया था और उन्होंने वही उपलब्ध कराई। इसके अलावा पुणे पुलिस के डीसीपी ट्रैफिक, राहुल श्रीरामे, अकोला जिले के एसपी जी श्रीधर के नाम प्रमुख थे।

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