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घर-घर गणेश:महाराष्ट्र के पेन इलाके में बनती हैं 3 करोड़ से ज्यादा मूर्तियां, 300 करोड़ का कारोबार; मूर्तिकारों को उम्मीद- ये गणेशोत्सव बड़ी खुशियां लाएगा

औरंगाबाद2 महीने पहलेलेखक: महेश जोशी
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कारखानों में पूरी तरह तैयार मूर्तियां। - Dainik Bhaskar
कारखानों में पूरी तरह तैयार मूर्तियां।
  • कोंकण स्थित देश में गणेश मूर्तियों के गढ़ से ग्राउंड रिपोर्ट, यहां से थाइलैंड, इंडोनेशिया और मॉरिशस भी भेजी जाती हैं मूर्तियां

बप्पा को विराजमान होने में अब कुछ ही दिन बाकी हैं। पिछले साल गणेशोत्सव कोरोना के साये में मना था। पर इस साल स्थिति बेहतर है। सबसे ज्यादा खुशी महाराष्ट्र के कोंकण क्षेत्र स्थित पेन तहसील और इसके आसपास के गांवों में गणेश की मूर्ति बनाने वाली इकाइयों में है। मूर्तिकारों को उम्मीद है कि इस बार का गणेशोत्सव उनकी जिंदगी में बड़ी खुशियां लेकर आएगा।

पिछले साल लॉकडाउन की सख्ती के कारण इनकी 90% मूर्तियां नहीं बिक पाईं थीं। रायगढ़ जिले की पेन तहसील और इसके आसपास का क्षेत्र गणेश मूर्ति हब माना जाता है। करीबी गांव हमरापुर, कलवा, जोहा, तांबडशेत, दादर, रावे, सोनकार, उरनोली, हनमंत पाडा, वडखल, बोरी, शिर्की गांवों में गणेशोत्सव के 10 दिन और पितृपक्ष के 15 दिन छोड़कर सालभर घर-घर में 6 इंच से 12 फुट की मूर्तियां बनाने का काम चलता है।

क्षेत्र में ऐसी 1600 उद्योग इकाइयां हैं। इनका सालाना कारोबार 250 से 300 करोड़ रुपए का है। ये इकाइयां हर साल 3 से 3.25 करोड़ मूर्तियां बनाती हैं। इनमें से करीब 1.25 करोड़ मूर्तियां छह राज्यों- गोवा, गुजरात, मप्र, कर्नाटक, आंध्र, तामिलनाडु के थोक व्यापारियों को सप्लाई होती हैं। फिर इनके जरिए देशभर में रिटेलर्स तक पहुंचती हैं।

क्षेत्र में हमरापुर गणेश विभाग मूर्तिकार संगठन सबसे बड़ा है। इससे 480 उद्योग इकाइयां जुड़ी हुई हैं। संगठन के सचिव राजन पाटिल कहते हैं, मूर्तिकारों ने पिछले साल बैंकों से 65 करोड़ रुपए का कर्ज लिया था। पर बीते साल सिर्फ 25-30 करोड़ का बिजनेस हो सका। इसलिए बैंक भी दबाव नहीं बना रहे। यहां से मूर्तियों की बिक्री हर साल जून में शुरू हो जाती है।

दीपक कला केंद्र के नीलेश समल बताते हैं, ‘जून के पहले हफ्ते में 900 मूर्तियां थाईलैंड और 600 मूर्तियां इंडोनेशिया व मॉरिशस भेजी गईं हैं।’ बीते दो साल में निसर्ग व ताऊ-ते तूफान, लॉकडाउन फिर बाढ़ से मूर्तिकारों को काफी नुकसान हुआ है। पिछले साल महाराष्ट्र में 4 फुट से बड़ी मूर्तियां न बनाने और घर में विसर्जन का नियम लागू हुआ था, इससे 90% (करीब 225-279 करोड़ की) मूर्तियां नहीं बिक पाईं थी। महाराष्ट्र मूर्तिकार संगठन के सदस्य नितिन मोकल कहते हैं कि कितना भी संकट आए, यहां की इकाइयों में काम बंद नहीं होता।

कच्चे सामान के दाम 37% से 400% बढ़े, महंगी मिलेंगी इस साल बप्पा की मूर्तियां

मूर्तिकार और कारोबारी अरविंद पाटिल ने बताया कि गणेश की 30% मूर्तियां शाडू मिट्टी से और 70% मूर्तियां पीओपी से बनती हैं। इस साल कच्चे माल के दामों में 37% से 400% तक इजाफा हुआ है। पिछले साल 135 रु. में मिलने वाला मिट्‌टी या पीओपी का बैग इस साल 185 रु. में मिल रहा है। रंग और ब्रश के दाम भी बेतहाशा बढ़ गए हैं।

ऐसे में मिट्टी से बनी एक फुट की बिना कलर की हुई मूर्ति इस साल रिटेल में 150 की जगह 250 रुपए में मिलेगी। वहीं, पीओपी से बिना कलर की हुई मूर्ति 100 के बजाय 150 रुपए में मिलेगी। वहीं, मिट्‌टी से बनी कलर की हुई मूर्ति 500 के बजाय 750 रु. में मिलेगी। पीओपी से बनी कलर की हुई मूर्ति 300 के बजाय 450 रुपए में मिलेगी।

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