86 साल में पहली बार नहीं विराजेंगे लालबाग के राजा / जूम पर 1200 लोगों की 3 घंटे चली बैठक में फैसला; कमेटी में एक राय- हमारे लिए देश ही देव

लालबाग के राजा की विसर्जन यात्रा में लगभग 19-20 घंटे का समय लगता रहा है। -फाइल फोटो लालबाग के राजा की विसर्जन यात्रा में लगभग 19-20 घंटे का समय लगता रहा है। -फाइल फोटो
X
लालबाग के राजा की विसर्जन यात्रा में लगभग 19-20 घंटे का समय लगता रहा है। -फाइल फोटोलालबाग के राजा की विसर्जन यात्रा में लगभग 19-20 घंटे का समय लगता रहा है। -फाइल फोटो

  • मुंबई में 'लालबाग के राजा' जहां विराजते हैं, वहां से थोड़ी ही दूरी पर कंटेनमेंट जोन है
  • सालों से चली आ रही इस परंपरा को खंडित करने का फैसला लेना आसान नहीं था

विनोद यादव

विनोद यादव

Jul 01, 2020, 09:40 PM IST

मुंबई. कोरोना के चलते देश के सबसे मशहूर गणपति 'लालबाग के राजा' का इस साल आगमन नहीं होगा। जहां 'लालबागचा राजा' की मूर्ति स्थापित होती है, उससे कुछ ही दूरी पर कंटेनमेंट इलाका है। 86 सालों में यह पहली बार है जब लालबाग के राजा नहीं विराजेंगे। सालों से चली आ रही इस परंपरा को खंडित करने का फैसला लेना आसान नहीं था।

ऐसे में कमेटी के 1200 सदस्यों ने मीटिंग की। कोरोना के चलते जूम एप पर हुई यह मीटिंग करीब तीन घंटे तक चली। बैठक में सभी सदस्य एक बात पर एकमत थे कि 'देश ही देव' हैं। अंत में 'लालबाग के राजा' को इस साल नहीं विराजने का फैसला हुआ।

हर दिन लाखों लोग करते हैं 'लालबाग के राजा' के दर्शन 
लालबाग के राजा के दर्शन करने हर दिन लाखों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, अमिताभ बच्चन तक लालबाग के राजा के दर्शन करने आते रहे हैं। मुंबई की इस सबसे मशहूर गणपति के प्रति लोगों की आस्था की वजह से ही इसके विसर्जन का जुलूस सुबह से शुरू होता है और विसर्जन स्थल तक पहुंचने में लगभग 19 घंटे तक का समय लग जाता है। इसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं।

बप्पा के विसर्जन यात्रा के दौरान कई लाख लोग शामिल होते हैं।

रात 9 बजे शुरू हुई बैठक 12 बजे तक चली

86 सालों से चली आ रही लालबाग के राजा के आगमन की परंपरा को स्थगित करने का निर्णय लेना लालबाग का राजा सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडल के सदस्यों के लिए आसान नहीं था। मंडल के सचिव सुधीर साल्वी बताते हैं कि मंगलवार को बैठक हुई। इसमें 1200 सदस्य शामिल हुए। जूम एप पर हुई मीटिंग की शुरुआत रात 9 बजे हुई और यह 12 बजे तक चली। इसमें यह तय हुआ कि 22 अगस्त से शुरू हो रहे गणेशोत्सव के दौरान लालबाग के राजा की स्थापना नहीं की जाएगी। 

“लालबाग के राजा” की मूर्ति जिस स्थान पर स्थापित की जाती है उससे थोड़ी ही दूर पर संक्रमित मरीज पाए जाने की वजह से वह इलाका सील कर दिया गया है।

गणेशोत्सव के स्थान पर इस बार 'स्वास्थ्य उत्सव'
मंडल के सचिव सुधीर साल्वी कहते हैं- हम 'देश ही देव' मानते हैं। लिहाजा जब मुंबई सहित पूरे देश में कोरोना का संकट है, तो हमने यहां आने वाले श्रद्धालुओं, पुलिस कर्मियों और मनपा कर्मियों के स्वास्थ्य को महत्व दिया है। लालबाग के राजा को मानने वालों की संख्या लाखों में है। यदि हमने मूर्ति स्थापित की तो बड़ी संख्या में श्रद्धालु आएंगे। इससे संक्रमण फैलने का डर है। इसलिए हम इस बार मूर्ति स्थापना नहीं करेंगे। हम इस बार स्वास्थ्य उत्सव के रूप में गणेशोत्सव मनाएंगे।

यह लालबाग के राजा की 1934 में स्थापित प्रतिमा का तस्वीर है। 

केईएम अस्पताल के साथ मिलकर आयोजित करेंगे प्लाज्मा डोनेशन कैंप
साल्वी ने कहा, 'केईएम अस्पताल के साथ मिलकर इस बार स्वास्थ्य उत्सव मनाएंगे। इस दौरान प्लाज्मा डोनेशन कैंप लगाएंगे। प्लाज्मा डोनेट करने आने वाले व्यक्ति की स्क्रीनिंग की जाएगी और उसका डेटा तैयार किया जाएगा।' 

उन्होंने यह भी बताया कि गलवान घाटी में चीनी सैनिकों के साथ हुई हिंसक झड़प में शहीद हुए भारतीय सैनिकों के परिजन का सम्मान किया जाएगा। इसके अलावा, कोरोना मरीजों के इलाज के लिए 25 लाख रुपए का चेक मंडल की ओर से मुख्यमंत्री को दिया जाएगा।

इसलिए खास है लालबाग के राजा

लालबाग के राजा की मूर्ति हर साल एक जैसी रहती है। हालांकि, थीम बदल दी जाती है। मूर्ति बनाने में करीब एक लाख रुपए की लागत आती है। मूर्ति की ऊंचाई करीब 12 फीट के करीब होती है।

आज का राशिफल

पाएं अपना तीनों तरह का राशिफल, रोजाना