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नियम तोड़ने पर कार्रवाई:पंकजा मुंडे का समर्थन करना पड़ा भारी, ऑफिस में पहुंचे 42 समर्थकों के खिलाफ कोविड नियम तोड़ने का केस दर्ज हुआ

मुंबई10 दिन पहले
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पूर्व मंत्री पंकजा मुंडे के ऑफिस में यह भीड़ मंगलवार शाम को हुई थी। इसके बाद पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज किया है। - Dainik Bhaskar
पूर्व मंत्री पंकजा मुंडे के ऑफिस में यह भीड़ मंगलवार शाम को हुई थी। इसके बाद पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज किया है।

मध्य मुंबई के वर्ली में भाजपा नेता पंकजा मुंडे के कार्यालय में मंगलवार को एक जनसभा का आयोजन किया गया था। आरोप है कि इस दौरान सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का जमकर उल्लंघन किया गया। इस घटना का वीडियो सामने आने के बाद अब पुलिस ने इस मामले में 42 लोगों के खिलाफ कोविड-19 के नियमों का उल्लंघन करने की FIR दर्ज की है।

जानकारी के मुताबिक, ये सभी हाल ही में हुए मंत्रिपरिषद विस्तार में पंकजा मुंडे की बहन एवं सांसद प्रीतम मुंडे को जगह नहीं मिलने के बाद पंकजा मुंडे का समर्थन करने पहुंचे थे। मुंबई पुलिस के एक अधिकारी ने बताया,'सभी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 188 और 269 के अलावा आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत केस दर्ज किया गया है। इनमें से ज्यादातर ने मास्क भी नहीं पहना था और नियम तोड़ते हुए लगातार नारेबाजी कर रहे थे।

पंकजा ने समर्थकों से कहा-वे दबाव में नहीं हैं

इसी कार्यक्रम के दौरान भाजपा की राष्ट्रीय सचिव और राज्य की पूर्व मंत्री पंकजा मुंडे ने अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए उन खबरों को खारिज किया जिसमें कहा गया था कि वह “दबाव की रणनीति” का इस्तेमाल कर रही हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष जे पी नड्डा उनके नेता हैं।

कई कार्यकर्ताओं ने पंकजा को दिया इस्तीफा

बता दें कि भाजपा के वरिष्ठ नेता रहे स्व. गोपीनाथ मुंडे की बड़ी बेटी पंकजा मुंडे के तेवर मंगलवार को नरम दिखाई दिए। पंकजा ने छोटी बहन प्रीतम मुंडे को मोदी मंत्रिमंडल में पद नहीं मिलने पर नाराजगी तो जताई, लेकिन लगे हाथ यह भी कहा कि यह धर्मयुद्ध का सही वक्त नहीं है। पंकजा ने पीएम नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह व पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा को अपना नेता बताते हुए नाराज कार्यकर्ताओं के इस्तीफे नामंजूर कर दिए।

पंकजा ने मंगलवार को अपने समर्थक पार्टी कार्यकर्ताओं से चर्चा की और इसके बाद ये बातें कहीं। पंकजा ने कहा कि कार्यकर्ताओं को विश्वास था कि हमें हालिया विस्तार में केंद्र में मंत्री पद मिलेगा। इस कारण कार्यकर्ताओं ने विरोध स्वरूप इस्तीफे का प्रस्ताव किया था। इसके साथ ही पंकजा ने अपने उन कार्यकर्ताओं के त्यागपत्र भी अस्वीकार कर दिए हैं जिन्होंने भाजपा छोड़ने की घोषणा की थी। पंकजा ने अपनी बहन प्रीतम के केंद्रीय मंत्री नहीं बन पाने के लिए महाराष्ट्र के भाजपा नेतृत्व को जिम्मेदार बताया।