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नारायण राणे को मंत्री बनाने के मायने:शिवसेना के खिलाफ भाजपा ने कोंकण का गढ़ किया मजबूत, मराठा समुदाय को भी साधने का बड़ा प्रयास

मुंबई16 दिन पहले
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शिवसेना से होते हुए भाजपा में पहुंचे महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और दिग्गज मराठी नेता नारायण राणे अब मोदी टीम में शामिल हो गए हैं। उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाया गया है-फाइल फोटो। - Dainik Bhaskar
शिवसेना से होते हुए भाजपा में पहुंचे महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और दिग्गज मराठी नेता नारायण राणे अब मोदी टीम में शामिल हो गए हैं। उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाया गया है-फाइल फोटो।

शिवसेना फिर कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल हुए नारायण राणे अब मोदी मंत्रिमंडल का हिस्सा बन चुके हैं। राणे को मंत्रिपद दे भाजपा ने अपना कोंकण का गढ़ मजबूत कर लिया है। कोंकण में राणे परिवार का वर्चस्व माना जाता है।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा मराठा आरक्षण रद्द करने के बाद से मराठा समुदाय, महाविकास अघाड़ी सरकार से नाराज चल रहा है। नारायण राणे मराठा समुदाय से आते हैं और भाजपा ने उन्हें मंत्री बनाकर इस समुदाय को साधने का प्रयास किया है।

1989 में शिवसेना के भाजपा संग गठबंधन किए जाने के बाद से ही भाजपा के साथ सीटों के बंटवारे की व्यवस्था में कोंकण निर्वाचन क्षेत्र हमेशा शिवसेना के हिस्से में रहा है। नतीजतन, इस क्षेत्र में भाजपा की उपस्थिति नाममात्र की ही रही है, जिसे पार्टी 2014 से ही बदलने की कोशिश में लगी थी ताकि शिवसेना पर निर्भर रहे बिना वह महाराष्ट्र को नियंत्रित करने में सक्षम हो सके। इसलिए भाजपा एक ऐसा चेहरा चाह रही थी, जो शिवसेना को टक्कर दे सके।

राणे और उनके परिवार का प्रभाव मुंबई क्षेत्र को कवर करने वाले दो जिलों, मुंबई सिटी और मुंबई उपनगर के अलावा रत्नागिरी, सिंधु दुर्ग, रायगढ़, ठाणे और पालघर जिले जिले में है।

21 सीटों पर भाजपा का प्रभाव होगा मजबूत
कोंकण क्षेत्र के मराठी युवा नौकरियों की तलाश में मुंबई आते हैं और पैसे अपने घर भेजते हैं, जिसके कारण कोंकण क्षेत्र, खासकर रत्नागिरी और सिंधु दुर्ग को अनौपचारिक रूप से ‘मनीऑर्डर इकोनॉमी’ की संज्ञा दी जाती है। मुंबई और ठाणे को छोड़कर बाकी कोंकण क्षेत्र में 21 विधानसभा सीटें हैं।

इनमें से तीन भाजपा के खाते में हैं, सिंधु दुर्ग की कांकावली, जहां से राणे के बेटे नीतेश राणे विधायक हैं, के अलावा पार्टी के पास दो सीटें रायगढ़ जिले में हैं। यहां की 10 सीटों पर शिवसेना का भी कब्जा है। अन्य सीटों पर कांग्रेस, एनसीपी का कब्जा है।

राणे की पार्टी के साथ गठबंधन से शिवसेना हुई थी नाराज
कोंकण में शिवसेना के आधार में सेंध लगाने के भाजपा के प्रयास खुले तौर पर तब नजर आने शुरू हुए जब पार्टी ने राणे के साथ 2019 में गठबंधन किया था। राणे के पार्टी में आने के बाद से भाजपा लगातार दावा कर रही है कि अब कोंकण पर उसका कब्जा हो गया है। हालांकि, शिवसेना के राउत भाजपा के दावों को नकारते हैं।

उनके मुताबिक, ‘भाजपा जब यह कहती है कि कोंकण में उसका प्रभाव बढ़ रहा है तो उसका क्या मतलब है? केवल सिंधु दुर्ग कोंकण नहीं है। इसमें सिर्फ तीन विधानसभा सीटें हैं, जिनमें से भी भाजपा के पास सिर्फ एक सीट ही है।’