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  • Sharad Pawar: Pune Bhima Koregaon Violence Case Update | Ncp Chief Sharad Pawar Statement Will Be Recorded

भीमा कोरेगांव हिंसा मामला:विशेष जांच आयोग ने शरद पवार को पूछताछ के लिए समन भेजा, एनसीपी प्रमुख ने हिंसा के लिए मिलिंद एकबोटे और संभाजी भिड़े पर उठाया था सवाल

मुंबई3 महीने पहले
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एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पवार ने आरोप लगाया कि दक्षिणपंथी कार्यकर्ताओं मिलिंद एकबोटे और संभाजी भिड़े ने  इस हिंसा से पहले एक अलग माहौल बनाया था। - Dainik Bhaskar
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पवार ने आरोप लगाया कि दक्षिणपंथी कार्यकर्ताओं मिलिंद एकबोटे और संभाजी भिड़े ने इस हिंसा से पहले एक अलग माहौल बनाया था।

पुणे के भीमा-कोरेगांव इलाके में 1 जनवरी 2018 को हुई हिंसा के मामले में एनसीपी प्रमुख शरद पवार का बयान दर्ज किया जाएगा। इस हिंसा की जांच करने वाले आयोग ने समन भेज कर 2 अगस्त को मुंबई में उनके सामने पेश होने को कहा है।

जांच आयोग ने शरद पवार के अलावा तत्‍कालीन पुणे ग्रामीण के एसपी सुवेज हक, तत्‍कालीन एसपी संदीप पखाले, पुणे तत्‍कालीन कमिश्‍नर रवींद्र सेनगांवकर और तत्‍कालीन कलेक्‍टर सौरभ राव को भी समन जारी किया गया है।

इसलिए शरद पवार का दर्ज होगा बयान
इस साल फरवरी में, सामाजिक समूह 'विवेक विचार मंच' के सदस्य सागर शिंदे ने आयोग के समक्ष एक आवेदन दायर किया, जिसमें 2018 की जाति हिंसा के बारे में मीडिया में उनके द्वारा दिए गए कुछ बयानों के मद्देनजर पवार को तलब करने की मांग की गई थी। अपनी याचिका में शिंदे ने 18 फरवरी को पवार की प्रेस कांफ्रेंस का हवाला दिया था।

आवेदन के अनुसार, एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पवार ने आरोप लगाया कि दक्षिणपंथी कार्यकर्ताओं मिलिंद एकबोटे और संभाजी भिड़े ने पुणे शहर के बाहरी इलाके और इसके आसपास के कोरेगांव-भीमा में एक 'अलग' माहौल बनाया था। सोशल ग्रुप के सदस्‍य सागर शिंदे ने कहा था, 'उसी प्रेस कॉन्फ्रेंस में, पवार ने यह भी आरोप लगाया कि पुणे शहर के पुलिस आयुक्त की भूमिका संदिग्ध है और इसकी जांच होनी चाहिए। ये बयान इस आयोग के संदर्भ की शर्तों के दायरे में हैं और इसलिए, वे प्रासंगिक हैं।'

क्या है भीमा कोरेगांव हिंसा मामला?
हर साल पहली जनवरी को भीमा कोरेगांव में दलित समुदाय से जुड़े लोग बड़ी संख्या में जुटकर उन दलितों को श्रद्धांजलि देते हैं जिन्होंने 1818 में पेशवा की सेना के ख़िलाफ लड़ते हुए अपने प्राण गंवाये थे। 1 जनवरी 2018 को पुणे के भीमा कोरेगांव में पेशवा बाजीराव पर ब्रिटिश सैनिकों की जीत जश्न मनाया जा रहा था, तब हिंसा भड़क उठी जिसमें एक शख्स की जान गई और उस दौरान 80 वाहन भी फूंके गए थे। हालात पर काबू पाने के लिए हमें आंसू गैस और लाठी चार्ज का इस्तेमाल करना पड़ा था। इस हिंसा में कई करोड़ की सरकारी संपत्ति को भी नुकसान हुआ था।