फायरब्रांड ठाकरे के अयोध्या विरोध पर चुप्पी का 'राज':इस खेल के पीछे छिपी है ‌BJP की बड़ी इलेक्शन प्लानिंग, सलाहाकारों ने भी अयोध्या जाने से मना किया

मुंबई4 दिन पहलेलेखक: विनोद यादव
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शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे की तरह बेबाक शैली में बोलने वाले राज ठाकरे अयोध्या दौरे के कड़े विरोध के बावजूद आखिर चुप क्यों हैं? उन्होंने अपनी पार्टी के नेताओं और प्रवक्ताओं को भी संयम रखने और खामोश रहने का निर्देश क्यों दे रखा है? दैनिक भास्कर ने जब इस बात का पता लगाने का प्रयास किया, तो पता चला कि राज ठाकरे को उम्मीद है कि भाजपा अपने सांसद सांसद बृजभूषण शरण सिंह को 5 जून से पहले मना लेगी।

इसके अलावा चूंकि मनसे अब हिंदुत्व के मुद्दे पर आगे बढ़ रही है, लिहाजा उसे शिवसेना की तरह ही 'मराठी माणूस' के पुराने मसले से ऊपर उठ कर राष्ट्रव्यापी सोच रखना होगा। राज ठाकरे की अब तक की चुप्पी के पीछे महाराष्ट्र भाजपा के वरिष्ठ नेता पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और स्टेट BJP चीफ चंद्रकांत पाटिल से उनके गहरे संबंध भी एक कारण बताया जा रहा है।

सलाहकारों ने राज से फैसला बदलने को कहा
महाराष्ट्र भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने पर्दे के पीछ रहते हुए राज ठाकरे को उत्तर भारतीय वाले मसले पर शांत व संयम बरतने की हिदायत दी है, ताकि महाराष्ट्र में होने वाले 14 महानगर पालिकाओं के चुनाव में माहौल न बिगड़े। हालांकि, ब्रिजभूषण सिंह के विरोध के बावजूद मनसे नेता, कार्यकर्ता और स्वयं राज ठाकरे जहां अयोध्या जाने पर अभी तक अड़े हुए हैं, वहीं उनके राजनीतिक सलाहकारों ने उन्हें अयोध्या जाने की तारीख बदलने के विकल्प पर विचार करने की सलाह दी है।

ठाकरे शैली में जवाब देने का बढ़ रहा दबाव
सलाहकारों का कहना है कि MNS अध्यक्ष को अपने फायरब्रांड नेता वाली छवि को बरकरार रखनी चाहिए। इसके लिए बहुत जरूरी है कि भाजपा सांसद बृजभूषण को ‘ठाकरी शैली’ में जवाब दिया जाए। अयोध्या में रामलला का दर्शन खुद करने जाने से अच्छा है वहां के किसी साधु-महंत से संपर्क साधकर उनके निमंत्रण पर अयोध्या जाया जाए। यदि राज ठाकरे अयोध्या जाने की तारीख बदलते हैं, तो देश भर में संदेश जायेगा कि भाजपा सांसद ने 'मराठी भाषी नेता' को अयोध्या में दर्शन करने आने से रोका। ऐसा होने पर महाराष्ट्र में मराठी माणूस का सेंटीमेंट और सहानुभूति राज ठाकरे के प्रति बढ़ेगी।

क्या BJP अपने ट्रैप में फंसाने का प्रयास कर रही
तारीख बदलने की सलाह उनके सलाहकार इसलिए भी दे रहे हैं कि इतना सब खुलेआम होने के बावजूद न तो गृहमंत्री अमित शाह और न ही UP के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह को अपनी जुबान पर लगाम लगाने की चेतावनी दी। मनसे अध्यक्ष के करीबियों को लगता है कि राज ठाकरे को भाजपा ने अपने ट्रैप में फंसा लिया है और इस ट्रैप से बाहर निकल कर राज ठाकरे को साबित करना चाहिए कि वे किसी भी चक्रव्यू को तोड़ने की क्षमता रखते हैं।

आभा सिंह ने भी कहा, राज ठाकरे माफी मांगो
मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे की छबि फायरब्रांड आक्रामक नेता की रही है। इसके बावजूद भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने जब उनके अयोध्या दौरे का कड़े शब्दों में विरोध करना शुरू किया, तो वे चुप रहे। नतीजा यह रहा है कि सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने राज ठाकरे को UP की जनता या साधु समाज या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से माफी मांगने की सलाह देते हुए ‘चूहा’ तक कह डाला। इतना ही नहीं भाजपा सांसद ने यह भी धमकी दी कि यदि राज ठाकरे उत्तर भारतीयों से बिना माफी मांगने अयोध्या आए तो उन्हें ‘छठी का दूध याद’ दिला दिया जाएगा।

निरुपम ने भी कहा-राज को मांगनी चाहिए माफी
अयोध्या में सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने जहां ‘राज ठाकरे माफी मांगो’ का मुद्दा गर्म कर रखा है, वहीं मुंबई में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पूर्व सांसद संजय निरुपम ने इस मुद्दे को तूल दे रखा है। राज ठाकरे ने जब अयोध्या जाकर प्रभु श्रीराम का दर्शन करने की घोषणा की थी, तब सबसे पहले निरुपम ने ही सवाल उठाया था कि मनसे अध्यक्ष के अयोध्या जाने में कोई दिक्कत नहीं है, परंतु वहां जाने से पहले उन्हें उत्तर भारतीयों से माफी मांगनी चाहिए, क्योंकि 2008-09 में जिस तरह से मनसे नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उत्तर भारतीयों को मारा-पीटा था वह घाव अब तक भरा नहीं है।

BJP भी राज ठाकरे से माफी मांगने को कह रहे है
मुंबई भाजपा के प्रवक्ता ठाकुर संजय सिंह ने भी राज ठाकरे को पत्र लिखकर माफी मांगने की सलाह दी है। कानूनी मामलों की एक्सपर्ट और लखनऊ से भाजपा विधायक राजेश्वर सिंह की बहन आभा सिंह भी संजय निरुपम की बातों से इक्तफाक रखती हैं। उन्होंने ‘राज ठाकरे माफी मांगो’ की बात कहते हुए कहा कि मुंबई में रहने वाले उत्तर भारतीयों से मनसे अध्यक्ष को पहले माफी मांगनी चाहिए फिर अयोध्या दर्शन के लिए जाना चाहिए।

राज के दौरे के विरोध में ब्रिज भूषण शरण सिंह की ओर से इस तरह के पोस्टर अयोध्या और इसके आसपास के इलाकों में लगे हैं।
राज के दौरे के विरोध में ब्रिज भूषण शरण सिंह की ओर से इस तरह के पोस्टर अयोध्या और इसके आसपास के इलाकों में लगे हैं।

देवेंद्र फडणवीस खुद गए काशी, ठाकुर नेताओं से मुलाकात की
मुंबई मनपा चुनाव को गृह मंत्री अमित शाह ने अपने नाक का सवाल बना रखा है। पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के लिए भी 14 मनपाओं, विशेषकर मुंबई का चुनाव प्रतिष्ठा का विषय है। ऐसे में भाजपा जब तक बड़े पैमाने पर मराठी वोटरों को अपने साथ नहीं कर लेती, तब तक चुनाव जीतना मुश्किल है। यह बात भाजपा द्वारा कराए गए कई दौर के इंटर्नल सर्वे में सामने आई है। यही वजह है कि भाजपा ने मुंबई मनपा चुनाव में प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे की मदद लेने की रणनीति बनाई है।

BJP ने इसलिए राज को हिंदुत्व का मुद्दा उठाने को कहा
चूंकि, भाजपा इस वक्त हिंदुत्व के मुद्दे पर राष्ट्रीय स्तर पर सियासत कर रही है। लिहाजा राज ठाकरे को भी हिंदुत्व के मुद्दे पर आगे बढ़ने की सलाह दी गई, क्योंकि मुख्यमंत्री बनने के लिए उद्धव ठाकरे जैसे ही NCP और कांग्रेस के साथ गए हैं, महाराष्ट्र में हिंदुत्व के मुद्दे पर राजनीति करने वाली एक पार्टी की जगह खाली हो गई है। बताया जा रहा है कि गत दिनों पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस जब काशी विश्वनाथ पूजा अर्चना करने पहुंचे तो उन्होंने वहां बड़ी संख्या में ठाकुर समुदाय के नेताओं से मुलाकात की और हल्के शब्दों में पार्टी के साथ सांसद बृजभूषण शरण सिंह की भूमिका सौम्य करने का संदेश दिया।

अमित शाह के दरबार में सुलझेगा राज का विवाद!
राजनीतिक जानकारों की माने तो सांसद बृजभूषण शरण सिंह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खेमे से नहीं हैं। यही वजह है कि अब तक मुख्यमंत्री योगी ने अब तक इस मसले पर बीच का रास्ता अख्तियार किया हुआ है। फडणवीस के UP दौरे के बाद भी यदि सांसद बृजभूषण शरण सिंह के तेवर नरम नहीं पड़े, तो यह पूरा मामला जल्द गृह मंत्री अमित शाह के दरबार में सुलझाया जाना तय हुआ है।

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