शिवसेना के निशाने पर फिर से कांग्रेस पार्टी:सामना में लिखा-कांग्रेस की हालत एक जर्जर महल की तरह हो गई है, मुस्लिम और दलित वोटर्स इनके हाथ से छूटे

मुंबईएक महीने पहलेलेखक: प्रियंक द्विवेदी
शिवसेना इससे पहले भी कई बार कांग्रेस को लेकर निशाना साधते रही है।

महाराष्ट्र में साथ मिलकर सरकार चलाने वाले शिवसेना ने फिर एक बार कांग्रेस पार्टी पर निशाना साधा है। पार्टी के मुखपत्र सामना की संपादकीय में शिवसेना ने लिखा है कि अब कांग्रेस की हालत एक जर्जर महल की तरह हो गई है। संपादकीय में शिवसेना ने लिखा है कि मुंबई समेत पूरे महाराष्ट्र के मुसलमान सिर्फ शिवसेना को वोट देते हैं। शिवसेना के इस स्टेप के बाद दोनों दलों के बीच पड़ी दरार बड़ी हो सकती है।

बता दें कि शिवसेना शासित बीएमसी ने सोमवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी की मुंबई के शिवाजी मैदान में होने वाली रैली को अनुमति देने से मना कर दिया था, जिसके खिलाफ कांग्रेस के नेताओं ने बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया है। यह भी दोनों दलों के बीच टकराव को दर्शाता है।

'मुस्लिम और दलित वोटर्स कांग्रेस के हाथ से छूटे'
सामना में शिवसेना ने लिखा है, ''कांग्रेस की वर्तमान अवस्था गांव में जमींदारी गंवा चुके जर्जर महल की तरह हो रही है। ऐसा विश्लेषण शरद पवार जैसे नेता ने किया है। इसकी वजह से उनकी आलोचना हुई थी। मुस्लिम और दलित मतों की भरपूर जमा-पूंजी जमींदारी का फल था। इन्हीं मुस्लिम-दलितों की ‘नकदी’ के कारण कांग्रेस का महल मजबूत और आलीशान लगता था। आज ये दोनों खनखनाते सिक्के कांग्रेस की मुट्ठी से छूट गए और उत्तर प्रदेश, बिहार, आंध्रप्रदेश, पश्चिम बंगाल जैसे बड़े राज्यों में कांग्रेस का पतन हुआ है। मुंबई-महाराष्ट्र के मुसलमान खुलकर शिवसेना को वोट देते हैं।''

'राम की तुलना में बाबर की भक्ति में लीन रहे'
सामना में आगे लिखा है, ''मुसलमानों के मतों के लिए फालतू व्यर्थ दुलार न करने वाली शिवसेना को मुस्लिम समाज अपना माने, यह कांग्रेस जैसी सेकुलर पार्टी के लिए चिंतन का विषय है। राम की तुलना में बाबर की भक्ति में शासकों के लीन होने पर लोगों के असंतोष में विस्फोट हुआ और कांग्रेस उसमें जलने लगी। इस सच्चाई से इंकार नहीं किया जा सकता है।

'कांग्रेस ने पीड़ित मुसलमान महिला के अधिकार को खारिज किया'
शिवसेना ने आगे लिखा,'शाहबानो प्रकरण में कांग्रेस ने पीड़ित मुसलमान महिला के अधिकार को खारिज कर दिया और शरीयत में न्यायालय ने हस्तक्षेप किया, ऐसा मानकर संविधान संशोधन किया। यह कुछ लोगों को नहीं जंचा, लेकिन मोदी सरकार ने बेखौफ होकर तीन तलाक विरोधी कानून बना कर पीड़ित मुसलमान महिलाओं को ढाढ़स दिया।''

'कांग्रेस को सिर्फ मुस्लिम और ईसाइयों की चिंता'
शिवसेना ने लिखा, ''कांग्रेस को सिर्फ मुसलमान और ईसाइयों की ही चिंता है। अल्पसंख्यकों के चोंचलों को पूरा करना यही कांग्रेस की नीति है, ऐसी सोच लोगों में आज भी मजबूती से बैठी हुई है। इसे दूर करना होगा। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में प्रियंका गांधी ने एक नया दांव खेला है, लेकिन वहां मुसलमान व दलित अखिलेश यादव, मायावती का साथ देते हैं तो सवर्ण बीजेपी के हिंदुत्ववाद की थाली बजाते हैं, यह वास्तविकता ही है। कभी किसी समय देश में मुसलमान, दलित वोट बैंक की राजनीति होती थी और हिंदुओं के मन को नकार दिया जाता है, ऐसी भावना तीव्र थी। आज हिंदू वोट बैंक की राजनीति सफल हो रही है। बीजेपी उसी का ‘खा’ रही है।

'मुसलमान भारत माता का ही पुत्र है'
शिवसेना ने लिखा है, 'मातृभूमि को वंदन करने वाला देश के लिए त्याग करने को तत्पर रहनेवाला मुसलमान भारत माता का ही पुत्र है, यह विचार मतलब राष्ट्रवाद और धर्मनिरपेक्षता है। शिवसेना ने हिंदुत्व के रूप में इसी विचार का समर्थन किया। ‘महंगाई बढ़ी है, जीना मुहाल हो गया है कुछ तो करो,’ ऐसा जनता कहती है तब ‘महंगाई बढ़ गई। चिंता मत करो। राम मंदिर तैयार हो ही गया है। अब मथुरा के मंदिर का काम शुरू करते हैं।’ ऐसा उत्तर देना हिंदू संस्कृति के अनुरूप नहीं है।'